MDU रोहतक में VC की मीटिंग पर घमासान: रजिस्ट्रार सस्पेंड, Governor ऑफिस ने बहाल किया; EC बैठक स्थगित
भर्ती, अधिकार और राजनीति के बीच फंसा यूनिवर्सिटी प्रशासन
MDU रोहतक में VC की मीटिंग पर घमासान: रजिस्ट्रार सस्पेंड, Governor ऑफिस ने बहाल किया; EC बैठक रद्द
- भर्ती, अधिकार और राजनीति के बीच फंसा यूनिवर्सिटी प्रशासन
ओपी वशिष्ठ, रोहतक :
रोहतक स्थित महर्षि दयानंद यूनिवर्सिटी (MDU) में प्रशासनिक टकराव अब खुलकर सामने आ गया है। वाइस चांसलर और रजिस्ट्रार के बीच बढ़ा विवाद अब सरकार और राजभवन तक पहुंच गया है। कार्यकारी परिषद (EC) की बैठक को लेकर शुरू हुआ मामला सस्पेंशन, बहाली और विरोध प्रदर्शन तक जा पहुंचा है।
यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर प्रो. राजबीर सिंह ने 17 फरवरी को रजिस्ट्रार डॉ. कृष्ण कांत और कंप्यूटर साइंस विभाग के वरिष्ठ प्रोफेसर डॉ. नसीब सिंह गिल को निलंबित कर दिया। यह कार्रवाई उस समय हुई जब 18 फरवरी को होने वाली कार्यकारी परिषद की बैठक को लेकर यूनिवर्सिटी में विरोध शुरू हो गया था।
EC बैठक और भर्ती विवाद बना टकराव की वजह
जानकारी के मुताबिक, EC की बैठक यूनिवर्सिटी में खाली पदों पर नियुक्तियों को लेकर बुलाई गई थी। बताया जा रहा है कि 20 फरवरी को VC का कार्यकाल समाप्त होने वाला है और उससे पहले भर्तियों को अंतिम रूप देने की तैयारी चल रही थी।
इसी बीच रजिस्ट्रार की ओर से पत्र जारी कर कहा गया कि बैठक में कोई अधिकारी शामिल नहीं होगा। इसके बाद प्रशासनिक तनाव बढ़ गया और VC की ओर से रजिस्ट्रार व एक प्रोफेसर को सस्पेंड कर दिया गया।
Governor ऑफिस का हस्तक्षेप, सस्पेंशन बहाल
विवाद बढ़ने के बाद बुधवार को हरियाणा राजभवन की ओर से दो अलग-अलग पत्र जारी किए गए।
पहले पत्र में EC की बैठक को तत्काल प्रभाव से रद्द करने के आदेश दिए गए।
दूसरे पत्र में रजिस्ट्रार डॉ. कृष्ण कांत के निलंबन को बहाल करने के निर्देश दिए गए।
राजभवन के निर्देशों के बाद यूनिवर्सिटी प्रशासन ने मीटिंग रद्द करने का संदेश जारी किया और बैठक स्थगित कर दी गई।
VC ऑफिस के बाहर धरना, आरोपों की झड़ी
EC बैठक के विरोध में कई प्रोफेसर और कर्मचारी VC कार्यालय के बाहर धरने पर बैठ गए। विरोध करने वाले शिक्षकों और कर्मचारियों ने VC पर पक्षपात, मानसिक प्रताड़ना और भ्रष्टाचार जैसे आरोप लगाए।
स्टाफ के प्रतिनिधियों का कहना है कि रजिस्ट्रार ने सरकार के निर्देशों का पालन करते हुए बैठक का विरोध किया था, जिसके बाद उन्हें सस्पेंड कर दिया गया। वहीं कुछ प्रोफेसरों ने यह भी आरोप लगाया कि यूनिवर्सिटी में शिकायतों को दबाने और कुछ लोगों को बचाने के प्रयास हो रहे हैं।
हायर एजुकेशन विभाग पहले ही दे चुका था निर्देश
इस पूरे विवाद से पहले हरियाणा उच्च शिक्षा विभाग ने 17 फरवरी को पत्र जारी कर स्पष्ट कहा था कि EC की पूर्व बैठक को आगे बढ़ाया जा चुका है और सरकार की मंजूरी के बिना फैसलों को लागू नहीं किया जा सकता।
विभाग ने यह भी कहा कि नियुक्तियों से जुड़े निर्णय नियमों के खिलाफ हैं और नई बैठक में उन्हें वैध ठहराने की कोशिश सरकार के आदेशों का उल्लंघन होगी।
क्या है EC और क्यों अहम है इसकी भूमिका?
कार्यकारी परिषद यूनिवर्सिटी की सबसे शक्तिशाली प्रशासनिक इकाई मानी जाती है।
अकादमिक नीतियों से लेकर वित्तीय फैसलों तक अंतिम निर्णय
प्रोफेसर और अन्य शिक्षकों की नियुक्ति
यूनिवर्सिटी के प्रशासनिक कामकाज की निगरानी
इस परिषद का अध्यक्ष वाइस चांसलर होता है और रजिस्ट्रार सचिव की भूमिका निभाता है। साल में कम से कम चार बार इसकी बैठक होना अनिवार्य है।
बढ़ती राजनीति और प्रशासनिक संकट
रजिस्ट्रार के निलंबन और फिर बहाली के बाद यूनिवर्सिटी में राजनीतिक माहौल भी गर्म हो गया है। यह मामला अब केवल प्रशासनिक नहीं बल्कि सत्ता और अधिकारों की लड़ाई के रूप में देखा जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह विवाद यूनिवर्सिटी की स्वायत्तता, सरकार के नियंत्रण और नियुक्तियों की पारदर्शिता जैसे बड़े सवाल खड़े करता है। आने वाले दिनों में जांच और प्रशासनिक कार्रवाई इस मामले की दिशा तय करेगी।
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