टेक्सटाइल से Solar तक – एक हरियाणवी बिजनेसमैन की ग्रोथ स्टोरी

- 20 वर्षों से ऑस्ट्रेलिया में रहकर सौर ऊर्जा, टेक्सटाइल, रोबोटिक्स और कोबोट जैसे क्षेत्रों में बड़ा बिजनेस खड़ा करने वाले नरेश कौशिक की कहानी

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टेक्सटाइल से Solar तक – एक हरियाणवी बिजनेसमैन की ग्रोथ स्टोरी

टेक्सटाइल से Solar तक – एक हरियाणवी बिजनेसमैन की ग्रोथ स्टोरी

- 20 वर्षों से ऑस्ट्रेलिया में रहकर सौर ऊर्जा, टेक्सटाइल, रोबोटिक्स और कोबोट जैसे क्षेत्रों में बड़ा बिजनेस खड़ा करने वाले नरेश कौशिक की कहानी

ओपी वशिष्ठ, नई दिल्ली / रोहतक

पानीपत के जलालपुर गांव से निकलकर ऑस्ट्रेलिया तक अपनी अलग पहचान बनाने वाले नरेश कौशिक आज उन प्रवासी हरियाणवी उद्यमियों में गिने जाते हैं, जिन्होंने मेहनत, जोखिम और दूरदृष्टि के दम पर अंतरराष्ट्रीय मंच पर सफलता हासिल की है। पिछले करीब बीस वर्षों से ऑस्ट्रेलिया में रह रहे नरेश कौशिक वहां की नागरिकता ले चुके हैं और ऑस्ट्रेलिया के साथ-साथ न्यूजीलैंड व अन्य देशों में भी कई कंपनियां स्थापित कर चुके हैं। सौर ऊर्जा उत्पादन, इंडस्ट्रियल सॉल्यूशंस, रोबोटिक्स और कोबोट यूनिट जैसे आधुनिक क्षेत्रों में उनका काम भविष्य की तकनीक से जुड़ा है, वहीं भारत में उनका पारंपरिक टेक्सटाइल कारोबार आज भी मजबूती से आगे बढ़ रहा है।

शुरुआती सफर: पानीपत से ग्लोबल मंच तक

हरियाणा के पानीपत की पहचान टेक्सटाइल उद्योग के लिए रही है। नरेश कौशिक का परिवार भी लंबे समय से इसी कारोबार से जुड़ा रहा। घरेलू स्तर से शुरू हुआ यह व्यापार धीरे-धीरे निर्यात तक पहुंचा और यहीं से अंतरराष्ट्रीय बाजार को समझने की शुरुआत हुई। इसी अनुभव ने उन्हें विदेश में व्यापार स्थापित करने की प्रेरणा दी।

ऑस्ट्रेलिया पहुंचने के बाद शुरुआती चुनौतियां आसान नहीं थीं। नए देश की नीतियां, बाजार और प्रतिस्पर्धा को समझना एक बड़ा काम था, लेकिन लगातार प्रयासों और व्यावसायिक समझ के बल पर उन्होंने अपनी पहचान बनानी शुरू की।

टांशु ग्रुप: परंपरा और तकनीक का संगम

नरेश कौशिक के नेतृत्व में टांशु ग्रुप ने धीरे-धीरे एक बहुआयामी औद्योगिक पहचान बनाई। टेक्सटाइल से शुरू हुई यात्रा आज इंजीनियरिंग, इंडस्ट्रियल सॉल्यूशंस, लॉजिस्टिक्स, सौर ऊर्जा, ऑटोमेशन और स्मार्ट मैन्युफैक्चरिंग तक पहुंच चुकी है।

यह समूह पारंपरिक उद्योगों और आधुनिक तकनीक के बीच संतुलन बनाकर आगे बढ़ा है। ऑस्ट्रेलिया की तकनीक और प्रबंधन अनुभव को भारत की कार्यशैली और श्रम क्षमता से जोड़ना इसकी सबसे बड़ी ताकत मानी जा रही है।

टेक्सटाइल सेक्टर: जड़ों से जुड़ी पहचान

भारत में टांशु ग्रुप की सबसे मजबूत मौजूदगी पानीपत के टेक्सटाइल सेक्टर में दिखाई देती है। यहां तैयार होने वाले होम फर्निशिंग उत्पाद, कालीन और अन्य वस्त्र आज विदेशों तक निर्यात हो रहे हैं। यह सिर्फ व्यापार नहीं, बल्कि हरियाणा की कारीगरी और मेहनत का वैश्विक प्रदर्शन है।स्थानीय कारीगरों और छोटे उद्यमियों को काम देकर समूह रोजगार के अवसर भी पैदा कर रहा है। आधुनिक मशीनों और बेहतर उत्पादन तकनीकों को जोड़कर टेक्सटाइल उद्योग को प्रतिस्पर्धी बनाने का प्रयास किया जा रहा है।

महिलाओं को रोजगार: आत्मनिर्भरता की दिशा

टांशु ग्रुप की पहल का एक महत्वपूर्ण पहलू ग्रामीण महिलाओं को रोजगार से जोड़ना है। टेक्सटाइल उत्पादों का काम उन्हें घर पर ही दिया जाता है, जिससे वे परिवार की जिम्मेदारियों के साथ-साथ आय का स्रोत भी बना पा रही हैं। यह पहल सामाजिक और आर्थिक दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

सौर ऊर्जा और ग्रीन एनर्जी में कदम

समूह ने पर्यावरण अनुकूल ऊर्जा के क्षेत्र में भी सक्रिय भूमिका निभाई है। सौर ऊर्जा उत्पादन और ग्रीन एनर्जी से जुड़े प्रोजेक्ट्स पर काम कर टांशु ग्रुप टिकाऊ विकास की दिशा में योगदान दे रहा है। यह क्षेत्र भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए तेजी से विकसित हो रहा है।

रोबोटिक्स और कोबोट: भविष्य की तकनीक

भारत में रोबोटिक और कोबोट यूनिट स्थापित करना नरेश कौशिक की दूरदर्शिता को दर्शाता है। इंडस्ट्रियल ऑटोमेशन के माध्यम से उत्पादन क्षमता बढ़ाने और गुणवत्ता सुधारने पर जोर दिया जा रहा है। इससे युवाओं के लिए नई तकनीकी स्किल्स और रोजगार के अवसर भी पैदा हो रहे हैं।

लॉजिस्टिक्स और फ्रेट सेवाओं में मजबूत पकड़

भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच व्यापारिक आवाजाही को आसान बनाने के लिए समूह ने लॉजिस्टिक्स और फ्रेट सेवाओं में भी निवेश किया है। सप्लाई चेन को मजबूत कर उत्पादों की डिलीवरी को तेज और व्यवस्थित बनाया गया है। यह अंतरराष्ट्रीय व्यापार में प्रतिस्पर्धा बढ़ाने में मददगार साबित हो रहा है।

Make in India से प्रेरित निवेश

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “मेक इन इंडिया” अभियान ने नरेश कौशिक को भारत में निवेश के लिए प्रेरित किया। उन्होंने न केवल उद्योग स्थापित किए, बल्कि रोजगार सृजन और कौशल विकास पर भी ध्यान दिया। इससे स्थानीय युवाओं को नए अवसर मिले हैं।

प्रवासी हरियाणवी और एसोसिएशन की भूमिका

ऑस्ट्रेलिया में हरियाणा के लोगों ने एक मजबूत एसोसिएशन बनाई है, जो नए लोगों की मदद करने, सांस्कृतिक परंपराओं को बचाने और सामाजिक जुड़ाव बनाए रखने का काम करती है। यह नेटवर्क प्रवासी भारतीयों के लिए सहारा और सहयोग का माध्यम बना हुआ है।

अंतरराष्ट्रीय पहचान और सम्मान

हाल ही में नरेश कौशिक को इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेन ट्रेड की ओर से ऑस्ट्रेलिया के 30 सफल बिजनेसमैन में शामिल किया गया है। यह उपलब्धि उनकी व्यावसायिक सफलता और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ती पहचान को दर्शाती है।

भारत–ऑस्ट्रेलिया व्यापार: नई संभावनाएं

भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच 100 बिलियन डॉलर की ट्रेड डील भविष्य में आर्थिक सहयोग को और मजबूत बना सकती है। विशेषज्ञ मानते हैं कि इससे उद्योग, तकनीक और निवेश के क्षेत्र में नए अवसर खुलेंगे। टांशु ग्रुप जैसे उद्यम इन संबंधों को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

युवाओं के लिए प्रेरणा

नरेश कौशिक की कहानी हरियाणा के युवाओं और उद्यमियों के लिए प्रेरणा है। यह संदेश देती है कि सीमित संसाधनों के बावजूद अगर सोच बड़ी हो और मेहनत निरंतर हो, तो वैश्विक मंच तक पहुंचना संभव है। पारंपरिक उद्योगों को आधुनिक तकनीक से जोड़ना ही भविष्य का रास्ता है।

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