जलवायु परिवर्तन का सबसे बड़ा बोझ महिलाओं पर, समाधान में भी उनकी सबसे अहम भूमिका: प्रो. डॉ. सुरेंद्र कुमार यादव

- The Haryana Talks पॉडकास्ट में एमडीयू के प्रोफेसर ने कहा— बढ़ती गर्मी, जल संकट और बदलता मौसम महिलाओं के स्वास्थ्य, शिक्षा, आजीविका और भविष्य को सबसे अधिक प्रभावित कर रहा है; हर घर को बनना होगा ‘क्लाइमेट वारियर’।

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जलवायु परिवर्तन का सबसे बड़ा बोझ महिलाओं पर, समाधान में भी उनकी सबसे अहम भूमिका: प्रो. डॉ. सुरेंद्र कुमार यादव

जलवायु परिवर्तन का सबसे बड़ा बोझ महिलाओं पर, समाधान में भी उनकी सबसे अहम भूमिका: प्रो. डॉ. सुरेंद्र कुमार यादव

- The Haryana Talks पॉडकास्ट में एमडीयू के प्रोफेसर ने कहा— बढ़ती गर्मी, जल संकट और बदलता मौसम महिलाओं के स्वास्थ्य, शिक्षा, आजीविका और भविष्य को सबसे अधिक प्रभावित कर रहा है; हर घर को बनना होगा ‘क्लाइमेट वारियर’।

ओपी वशिष्ठ, रोहतक :

जलवायु परिवर्तन अब केवल पर्यावरण का मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि यह सामाजिक, आर्थिक और स्वास्थ्य संबंधी गंभीर चुनौती बन चुका है। इसका सबसे अधिक प्रभाव महिलाओं और कमजोर वर्गों पर पड़ रहा है। बढ़ती गर्मी, घटता भूजल, अनियमित बारिश और प्राकृतिक संसाधनों पर बढ़ते दबाव के कारण महिलाओं की जिम्मेदारियां और चुनौतियां लगातार बढ़ रही हैं।

इन मुद्दों पर The Haryana Talks के विशेष पॉडकास्ट में महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय (एमडीयू), रोहतक के बॉटनी विभाग के प्रोफेसर एवं विश्वविद्यालय की आउटरीच गतिविधियों के इंचार्ज प्रो. डॉ. सुरेंद्र कुमार यादव ने विस्तार से चर्चा की। उन्होंने जलवायु परिवर्तन के वैज्ञानिक पहलुओं के साथ-साथ हरियाणा के ग्रामीण परिवेश में महिलाओं के सामने आने वाली वास्तविक चुनौतियों और उनके संभावित समाधानों पर भी प्रकाश डाला।

बातचीत के दौरान प्रो. यादव ने सरल भाषा में समझाया कि जलवायु परिवर्तन केवल मौसम के सामान्य बदलाव का नाम नहीं है, बल्कि पृथ्वी के तापमान में लगातार वृद्धि, वर्षा के स्वरूप में परिवर्तन, लंबे सूखे, अत्यधिक गर्मी और प्राकृतिक संसाधनों पर बढ़ते दबाव का व्यापक प्रभाव है। उन्होंने कहा कि हरियाणा में भी तापमान में वृद्धि, गिरता भूजल स्तर और अनियमित वर्षा जैसे संकेत स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहे हैं।

पॉडकास्ट में महिलाओं पर पड़ने वाले प्रभावों पर विशेष चर्चा हुई। प्रो. यादव ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाएं पानी लाने, पशुपालन, चारा जुटाने और कृषि कार्यों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। जल संकट और बदलते मौसम के कारण इन कार्यों में अधिक समय और श्रम लग रहा है, जिसका असर उनके स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार और परिवार की आर्थिक स्थिति पर पड़ता है। उन्होंने यह भी कहा कि अत्यधिक गर्मी का प्रभाव गर्भवती महिलाओं, नवजात शिशुओं और बुजुर्ग महिलाओं के स्वास्थ्य पर अधिक गंभीर हो सकता है।

उन्होंने अपने आउटरीच कार्यक्रमों के अनुभव साझा करते हुए बताया कि कई गांवों में जल संकट और बदलती जलवायु के कारण महिलाओं के दैनिक जीवन में उल्लेखनीय बदलाव आए हैं। उनके अनुसार, जलवायु परिवर्तन का प्रभाव केवल पर्यावरण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सामाजिक संरचना और आर्थिक अवसरों को भी प्रभावित कर रहा है।

पॉडकास्ट में भविष्य की चुनौतियों पर भी चर्चा हुई। प्रो. यादव ने कहा कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले वर्षों में जल और खाद्य सुरक्षा जैसी समस्याएं और गंभीर हो सकती हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सरकारों के साथ-साथ आम नागरिकों की भागीदारी भी उतनी ही आवश्यक है।

महिलाओं की भूमिका पर उन्होंने कहा कि यदि उन्हें जल संरक्षण, वृक्षारोपण, कचरा प्रबंधन और सतत जीवनशैली के प्रति जागरूक और सक्षम बनाया जाए तो वे जलवायु परिवर्तन के खिलाफ सबसे प्रभावी नेतृत्व कर सकती हैं। उन्होंने स्कूल स्तर से ही बच्चों, विशेषकर बेटियों, में पर्यावरण संरक्षण की शिक्षा को मजबूत करने की आवश्यकता बताई।

पॉडकास्ट के अंत में प्रो. यादव ने संदेश दिया कि "जलवायु परिवर्तन केवल पर्यावरण का नहीं, बल्कि हर परिवार के भविष्य का प्रश्न है। यदि आज पानी बचाने, पेड़ लगाने और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण की दिशा में सामूहिक प्रयास नहीं किए गए, तो आने वाली पीढ़ियों के लिए गंभीर संकट खड़ा हो सकता है।"