गुमनाम नायकों की गाथा नई पीढ़ी तक पहुंचाना जरूरी: कर्नल योगेंद्र सिंह

- एमडीयू में ‘हरियाणा के गुमनाम नायक’ विषय पर विशेष व्याख्यान | स्थानीय इतिहास को शोध और अकादमिक विमर्श का हिस्सा बनाने पर जोर

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गुमनाम नायकों की गाथा नई पीढ़ी तक पहुंचाना जरूरी: कर्नल योगेंद्र सिंह

गुमनाम नायकों की गाथा नई पीढ़ी तक पहुंचाना जरूरी: कर्नल योगेंद्र सिंह

- एमडीयू में ‘हरियाणा के गुमनाम नायक’ विषय पर विशेष व्याख्यान | स्थानीय इतिहास को शोध और अकादमिक विमर्श का हिस्सा बनाने पर जोर

टीएचटी न्यूज, रोहतक :

हरियाणा की धरती ने स्वतंत्रता आंदोलन में ऐसे अनेक वीरों को जन्म दिया, जिन्होंने साहस, त्याग और देशभक्ति के बल पर इतिहास में महत्वपूर्ण योगदान दिया, लेकिन इनमें से कई नायकों की गाथाएं आज भी व्यापक स्तर पर सामने नहीं आ सकी हैं। ऐसे गुमनाम नायकों के योगदान को इतिहास की मुख्यधारा में लाना और उनकी संघर्षगाथा नई पीढ़ी तक पहुंचाना जरूरी है। यह बात कर्नल योगेंद्र सिंह ने महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय (एमडीयू) में आयोजित विशेष व्याख्यान में कही।

स्वतंत्रता दिवस के उपलक्ष्य में एमडीयू के इतिहास एवं पुरातत्व विभाग और इतिहास सोसायटी ‘इतिहास चेतना’ की ओर से ‘हरियाणा के गुमनाम नायक’ विषय पर कार्यक्रम आयोजित किया गया। कर्नल योगेंद्र सिंह ने हरियाणा के कम चर्चित स्वतंत्रता सेनानियों के जीवन, संघर्ष और बलिदान से जुड़े विभिन्न ऐतिहासिक प्रसंग विद्यार्थियों के साथ साझा किए।

उन्होंने कहा कि इतिहास केवल प्रसिद्ध व्यक्तित्वों और बड़ी घटनाओं का दस्तावेज नहीं है। इसमें उन अनगिनत लोगों की भूमिका भी शामिल है, जिन्होंने देश की आजादी के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर किया। उन्होंने विद्यार्थियों से अपने क्षेत्र के स्थानीय इतिहास को जानने और कम चर्चित ऐतिहासिक स्रोतों एवं प्रसंगों पर शोध करने का आह्वान किया।

कर्नल योगेंद्र सिंह ने कहा कि युवा जब अपने क्षेत्र के इतिहास और वहां के नायकों को जानेंगे, तभी वे स्वतंत्रता आंदोलन के व्यापक स्वरूप को बेहतर तरीके से समझ सकेंगे।

कार्यक्रम के उद्घाटन संबोधन में सामाजिक विज्ञान संकाय के डीन प्रो. सेवा सिंह दहिया ने कहा कि भारत का स्वतंत्रता आंदोलन केवल राष्ट्रीय स्तर पर चर्चित नेताओं तक सीमित नहीं था। देश के अलग-अलग हिस्सों में आम लोगों, समुदायों और स्थानीय नायकों ने भी आजादी की लड़ाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने कहा कि स्थानीय इतिहास को सामने लाए बिना भारतीय राष्ट्रवाद और स्वतंत्रता आंदोलन की संपूर्ण तस्वीर सामने नहीं आ सकती।

कार्यक्रम के समापन पर इतिहास एवं पुरातत्व विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रो. जयवीर धनखड़ ने कहा कि ऐतिहासिक स्मृतियां केवल अतीत को समझने का माध्यम नहीं हैं, बल्कि वर्तमान और भविष्य को दिशा देने का काम भी करती हैं। उन्होंने युवाओं से इतिहास को जिज्ञासा और जिम्मेदारी के साथ समझने तथा स्वतंत्रता सेनानियों के त्याग से प्रेरणा लेकर राष्ट्र निर्माण में योगदान देने का आह्वान किया।

व्याख्यान के बाद आयोजित संवाद सत्र में विद्यार्थियों और शोधार्थियों ने हरियाणा के गुमनाम नायकों, स्वतंत्रता आंदोलन और स्थानीय इतिहास से जुड़े सवाल पूछे। चर्चा में क्षेत्रीय इतिहास को शोध एवं अकादमिक विमर्श के माध्यम से व्यापक इतिहास का हिस्सा बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया गया।

कार्यक्रम में डॉ. विकास पंवार, डॉ. मोनिका, डॉ. बीरबल, डॉ. शर्मीला यादव और डॉ. स्नेहलता सहित शिक्षक, शोधार्थी और विद्यार्थी मौजूद रहे।

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