एमडीयू की मेडिकेटेड च्युइंग गम को मिला पेटेंट, सफर में उल्टी-चक्कर से मिलेगी तुरंत राहत
- बिना पानी खाए जा सकेगी दवा, मुंह की झिल्ली से सीधे शरीर में पहुंचकर तेजी से करेगी असर
एमडीयू की मेडिकेटेड च्युइंग गम को मिला पेटेंट, सफर में उल्टी-चक्कर से मिलेगी तुरंत राहत
- बिना पानी खाए जा सकेगी दवा, मुंह की झिल्ली से सीधे शरीर में पहुंचकर तेजी से करेगी असर
ओपी वशिष्ठ, रोहतक :
बस, ट्रेन या कार में सफर के दौरान उल्टी, जी मिचलाना और चक्कर आने जैसी समस्याओं से जूझने वाले लोगों के लिए राहत की खबर है। महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय (एमडीयू) के फार्मास्युटिकल साइंसेज विभाग के वैज्ञानिकों द्वारा विकसित विशेष मेडिकेटेड च्युइंग गम को भारतीय पेटेंट कार्यालय से पेटेंट प्राप्त हुआ है। यह नवाचार मोशन सिकनेस से पीड़ित लोगों को बिना पानी के दवा लेने की सुविधा और तेजी से राहत प्रदान करेगा।
यह पेटेंट विभागाध्यक्ष प्रो. दीपक कौशिक, एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. विनीत मित्तल तथा पूर्व शोधार्थी डॉ. प्रेरणा कौशिक के संयुक्त शोध कार्य को मिला है। शोध टीम ने एमडीयू के कुलपति प्रो. मिलाप पूनिया और कुलसचिव प्रो. संदीप बंसल को पेटेंट स्वीकृति पत्र सौंपकर इस उपलब्धि की जानकारी दी।
कड़वी दवा का निकाला समाधान
शोधकर्ताओं ने बताया कि मोशन सिकनेस के इलाज में उपयोग होने वाली प्रोमेथाजीन दवा का स्वाद काफी कड़वा होता है, जिसके कारण कई बार मरीजों में मतली और उल्टी की समस्या बढ़ जाती है। इसी चुनौती को देखते हुए वैज्ञानिकों ने विशेष टेस्ट-मास्किंग तकनीक का उपयोग कर मेडिकेटेड च्युइंग गम तैयार की है, जिससे दवा का कड़वापन महसूस नहीं होता।
बिना पानी, कहीं भी और कभी भी उपयोग
इस च्युइंग गम की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसे लेने के लिए पानी की आवश्यकता नहीं होगी। यात्री सफर के दौरान आसानी से इसका उपयोग कर सकेंगे। वैज्ञानिकों के अनुसार, च्युइंग गम चबाने की प्रक्रिया स्वयं भी मतली और चक्कर की समस्या को कम करने में सहायक होती है।
तेजी से होगा असर
दवा मुंह की झिल्ली (Oral Mucosa) के माध्यम से सीधे शरीर में अवशोषित होती है, जिससे इसका प्रभाव पारंपरिक गोलियों की तुलना में जल्दी शुरू हो सकता है। इसके लिए दवा को पेट से होकर गुजरने की जरूरत नहीं पड़ती।
बच्चों और बुजुर्गों के लिए भी उपयोगी
शोधकर्ताओं के अनुसार यह तकनीक उन मरीजों के लिए भी बेहद लाभदायक है जिन्हें गोली या कैप्सूल निगलने में कठिनाई होती है। प्राकृतिक गम बेस और आधुनिक स्वाद-छिपाने वाली तकनीक के कारण यह उत्पाद बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी आयु वर्ग के लोगों के लिए सुविधाजनक बनाया गया है।
कुलपति और कुलसचिव ने दी बधाई
कुलपति प्रो. मिलाप पूनिया ने शोध टीम को बधाई देते हुए कहा कि विश्वविद्यालय ऐसे शोधों को प्रोत्साहित कर रहा है जो सीधे समाज की समस्याओं का समाधान प्रस्तुत करते हैं। उन्होंने शोधकर्ताओं को तकनीक के व्यावसायीकरण और फंडिंग परियोजनाओं की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।
कुलसचिव प्रो. संदीप बंसल ने भी इस उपलब्धि पर शोधकर्ताओं को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि विश्वविद्यालय में शोध और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए अनुकूल वातावरण उपलब्ध कराया जा रहा है। उन्होंने विश्वास जताया कि यह तकनीक भविष्य में चिकित्सा क्षेत्र में नई संभावनाओं के द्वार खोलेगी।
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