गुरमीत राम रहीम को फिर मिली पैरोल, 30 दिन के लिए सुनारिया जेल से बाहर आया डेरा प्रमुख
2017 से जेल में बंद राम रहीम 16वीं बार पैरोल/फरलो पर रिहा; सुबह 6:30 बजे रोहतक जेल से निकला, सिरसा डेरे में पहुंचा
गुरमीत राम रहीम को फिर मिली पैरोल, 30 दिन के लिए सुनारिया जेल से बाहर आया डेरा प्रमुख
- 2017 से जेल में बंद राम रहीम 16वीं बार पैरोल/फरलो पर रिहा; सुबह 6:30 बजे रोहतक जेल से निकला, सिरसा डेरे में पहुंचा
टीएचटी न्यूज, रोहतक :
डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह एक बार फिर पैरोल पर जेल से बाहर आ गया है। साध्वी यौन शोषण मामले में 20 वर्ष की सजा काट रहे राम रहीम को 30 दिन की पैरोल मिली है। मंगलवार सुबह करीब 6:30 बजे वह रोहतक स्थित सुनारिया जेल से बाहर निकला और लगभग सवा 9 बजे सिरसा स्थित डेरा मुख्यालय पहुंच गया।
जेल प्रशासन ने सुरक्षा और भीड़ नियंत्रण को देखते हुए राम रहीम को सुबह जल्दी रिहा किया। सिरसा डेरे में उसके काफिले की एंट्री पिछले गेट से कराई गई। उसके काफिले में टोयोटा लैंड क्रूजर और फॉर्च्यूनर लिजेंडर समेत आठ लग्जरी वाहन शामिल थे। सिरसा पहुंचने के बाद स्थानीय प्रशासन और पुलिस को अलर्ट मोड पर रखा गया है।
इस साल दूसरी बार जेल से बाहर
वर्ष 2026 के पहले पांच महीनों में यह दूसरी बार है जब राम रहीम पैरोल पर जेल से बाहर आया है। इससे पहले 5 जनवरी 2026 को उसे 40 दिन की पैरोल मिली थी। उस दौरान वह सिरसा स्थित डेरा मुख्यालय में रहा था। इससे पहले कई अवसरों पर वह उत्तर प्रदेश के बागपत स्थित डेरा आश्रम में भी ठहरा था।
सिरसा पहुंचने के बाद राम रहीम ने अपने अनुयायियों के लिए एक वीडियो संदेश भी जारी किया, जिसमें उसने डेरा प्रबंधन द्वारा जारी निर्देशों का पालन करने की अपील की।
2017 से काट रहा है सजा
राम रहीम 25 अगस्त 2017 से जेल में बंद है। उसे साध्वियों के यौन शोषण के दो मामलों में 20 वर्ष की सजा सुनाई गई थी। इसके बाद 17 जनवरी 2019 को पत्रकार रामचंद्र छत्रपति हत्याकांड में भी उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी।
हालांकि बाद में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने राम रहीम को पत्रकार रामचंद्र छत्रपति हत्याकांड में बरी कर दिया। अदालत ने मामले में अन्य तीन दोषियों कुलदीप सिंह, निर्मल सिंह और कृष्ण लाल की सजा बरकरार रखी।
इसके अलावा अक्टूबर 2021 में डेरा प्रबंधक रणजीत सिंह हत्याकांड में सीबीआई अदालत ने राम रहीम को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी, लेकिन बाद में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने इस मामले में भी उसे बरी कर दिया।
16वीं बार मिली पैरोल या फरलो
साल 2017 में जेल जाने के बाद से राम रहीम को अब तक 16 बार पैरोल या फरलो मिल चुकी है। हर बार उसकी रिहाई राजनीतिक और सामाजिक बहस का विषय बनती रही है। विभिन्न राजनीतिक दल समय-समय पर इन रिहाइयों को लेकर सवाल उठाते रहे हैं।
क्या होती है पैरोल और फरलो?
पैरोल
पैरोल एक अस्थायी रिहाई होती है, जो विशेष परिस्थितियों में दी जाती है। परिवार में मृत्यु, गंभीर बीमारी, विवाह या अन्य जरूरी कारणों के आधार पर कैदी को सीमित अवधि के लिए जेल से बाहर रहने की अनुमति दी जाती है। पैरोल रेगुलर और कस्टडी दो प्रकार की हो सकती है।
फरलो
फरलो कैदी का एक कानूनी अधिकार माना जाता है। इसके लिए किसी विशेष आपात परिस्थिति की आवश्यकता नहीं होती। विभिन्न राज्यों में इसके लिए अलग-अलग नियम और प्रक्रिया निर्धारित हैं। फरलो का उद्देश्य लंबे समय से जेल में बंद कैदियों को परिवार और समाज के साथ सीमित समय बिताने का अवसर देना होता है।
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