झज्जर ने बदली पहचान: कभी लिंगानुपात से बदनाम जिला अब महिला नेतृत्व का मॉडल

- डीसी से लेकर पुलिस आयुक्त, सिटी मजिस्ट्रेट और एसडीएम तक अहम जिम्मेदारियों पर महिला अधिकारी; प्रशासनिक व्यवस्था में दिख रहा संवेदनशील और प्रभावी नेतृत्व

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झज्जर ने बदली पहचान: कभी लिंगानुपात से बदनाम जिला अब महिला नेतृत्व का मॉडल

झज्जर ने बदली पहचान: कभी लिंगानुपात से बदनाम जिला अब महिला नेतृत्व का मॉडल

- डीसी से लेकर पुलिस आयुक्त, सिटी मजिस्ट्रेट और एसडीएम तक अहम जिम्मेदारियों पर महिला अधिकारी; प्रशासनिक व्यवस्था में दिख रहा संवेदनशील और प्रभावी नेतृत्व

ओपी वशिष्ठ, रोहतक :

हरियाणा का झज्जर जिला, जो कभी गिरते लिंगानुपात और ‘बेटी बचाओ’ जैसे अभियानों की जरूरत को लेकर राष्ट्रीय बहस का केंद्र रहा था, अब महिला नेतृत्व की नई मिसाल बनकर सामने आ रहा है। जिले के प्रशासनिक और पुलिस ढांचे में महिलाओं की मजबूत मौजूदगी ने झज्जर की पहचान को एक नए सामाजिक बदलाव से जोड़ दिया है।

हाल ही में आईएएस अधिकारी वर्षा खंगवाल की उपायुक्त के रूप में नियुक्ति के बाद झज्जर में महिला नेतृत्व और अधिक मजबूत हुआ है। वर्तमान समय में जिले के कई अहम प्रशासनिक और कानून व्यवस्था से जुड़े पद महिलाओं के हाथों में हैं। पुलिस आयुक्त के पद पर राजश्री सिंह, सिटी मजिस्ट्रेट के रूप में ऋतु बंसल और बेरी की एसडीएम के रूप में रेनुका नांदल अपनी जिम्मेदारियां संभाल रही हैं।

प्रशासनिक हलकों में इसे केवल संयोग नहीं, बल्कि हरियाणा में बदलती सामाजिक सोच और महिलाओं की बढ़ती भागीदारी के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। खास बात यह है कि जिस झज्जर को कभी कन्या भ्रूण हत्या और बिगड़े लिंगानुपात के संदर्भ में उदाहरण के तौर पर पेश किया जाता था, वहीं अब महिला अधिकारी शासन व्यवस्था की अग्रिम पंक्ति में दिखाई दे रही हैं।

महिला अधिकारियों की मौजूदगी को लेकर लोगों में सकारात्मक चर्चा भी देखने को मिल रही है। माना जा रहा है कि प्रशासनिक निर्णयों में संवेदनशीलता, संवाद और जनसुनवाई की संस्कृति को इससे नई मजबूती मिल रही है। विशेषकर महिलाओं से जुड़े मामलों में महिला अधिकारियों तक लोगों की पहुंच अधिक सहज मानी जा रही है।

उपायुक्त वर्षा खंगवाल ने कहा कि निर्णय लेने वाले पदों पर महिलाओं की भागीदारी समाज में सकारात्मक बदलाव का आधार बनती है। वहीं पुलिस आयुक्त राजश्री सिंह ने इसे महिलाओं पर बढ़ते विश्वास और ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ अभियान की सोच का विस्तार बताया। एसडीएम रेनुका नांदल के अनुसार महिला अधिकारी अक्सर शिकायतों को अधिक धैर्य और संवेदनशीलता से सुनती हैं, जिससे लोगों का भरोसा भी बढ़ता है।

झज्जर में महिला अधिकारियों की यह मजबूत उपस्थिति अब केवल प्रशासनिक व्यवस्था का हिस्सा नहीं, बल्कि सामाजिक बदलाव और बदलती मानसिकता की नई तस्वीर मानी जा रही है।

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