स्कूली छात्रों ने सुपवा में सीखी देशभर की शिल्प कलाएं
- डिजाइन फेस्टिवल ‘सूत्रम’ के दूसरे दिन विभिन्न स्कूलों से पहुंची छात्र-छात्राओं की टीमें | लाइव वर्कशॉप में विशेषज्ञों ने सिखाईं हथकरघा, फुलकारी, टेराकोटा और ब्लॉक पेंटिंग जैसी कलाएं
स्कूली छात्रों ने सुपवा में सीखी देशभर की शिल्प कलाएं
- डिजाइन फेस्टिवल ‘सूत्रम’ के दूसरे दिन विभिन्न स्कूलों से पहुंची छात्र-छात्राओं की टीमें | लाइव वर्कशॉप में विशेषज्ञों ने सिखाईं हथकरघा, फुलकारी, टेराकोटा और ब्लॉक पेंटिंग जैसी कलाएं
टीएचटी न्यूज, रोहतक :
दादा लख्मी चंद स्टेट यूनिवर्सिटी ऑफ परफॉर्मिंग एंड विजुअल आर्ट्स (डीएलसी सुपवा) में आयोजित तीन दिवसीय डिजाइन फेस्टिवल ‘सूत्रम’ के दूसरे दिन गुरुवार को स्कूली छात्र-छात्राओं ने भारतीय कला, शिल्प और फैशन की विविधता को करीब से जाना। शहर के विभिन्न स्कूलों से टीचर्स के साथ पहुंची छात्र-छात्राओं की टीमों ने डिजाइन प्रदर्शनी का अवलोकन करने के साथ-साथ लाइव वर्कशॉप में विशेषज्ञों से पारंपरिक शिल्प कलाएं सीखने में भी रुचि दिखाई।
डिजाइन बिल्डिंग में आयोजित ‘सूत्रम’ में महाराजा अग्रसेन पब्लिक स्कूल, पठानिया पब्लिक स्कूल, मॉडल स्कूल सहित विभिन्न स्कूलों के छात्र पहुंचे। प्रदर्शनी में सुपवा के विद्यार्थियों ने पारंपरिक और आधुनिक परिधानों के साथ भारतीय कला एवं शिल्प को रचनात्मक अंदाज में प्रदर्शित किया। फैकल्टी ऑफ डिजाइन में प्रवेश करते ही अलग-अलग डमी पर विद्यार्थियों द्वारा तैयार किए गए परिधान प्रदर्शित किए गए थे।
प्रदर्शनी में विशेष रूप से तैयार किया गया भारत का मानचित्र भी आकर्षण का केंद्र रहा। इसमें विभिन्न राज्यों की पारंपरिक शिल्प कलाओं को वहां प्रचलित कपड़ों और कलात्मक तकनीकों के माध्यम से प्रदर्शित किया गया। प्रदर्शनी परिसर की साज-सज्जा में भी सुपवा के विद्यार्थियों ने अपनी रचनात्मकता का प्रदर्शन किया।
सुपवा के कुलगुरु डॉ. अमित आर्य ने भी डिजाइन फेस्टिवल का दौरा कर विद्यार्थियों का उत्साहवर्धन किया। उन्होंने ब्लॉक पेंटिंग की लाइव वर्कशॉप में हिस्सा लिया और पेंटिंग बनाकर इस कला को करीब से समझा। इस दौरान रजिस्ट्रार डॉ. गुंजन मलिक मनोचा भी मौजूद रहीं।
लाइव वर्कशॉप बनी आकर्षण का केंद्र
‘सूत्रम’ में विभिन्न राज्यों की पारंपरिक शिल्प कलाओं को प्रदर्शित करने के लिए आयोजित लाइव वर्कशॉप में दिनभर भीड़ रही। स्कूली छात्रों के साथ प्रदर्शनी देखने पहुंचे शहरवासियों ने भी विशेषज्ञों से इन कलाओं के बारे में जानकारी ली। कई छात्रों ने कारीगरों के पास बैठकर स्वयं भी शिल्प तकनीक सीखने का प्रयास किया।
हथकरघा की लाइव वर्कशॉप पद्मश्री खेमराज सुंदरियाल ने ली। उन्हें हैंडलूम और हैंडीक्राफ्ट के क्षेत्र में करीब 50 वर्ष का अनुभव है। पंजाब की प्रसिद्ध फुलकारी एंब्रॉयडरी की वर्कशॉप गुरिंदर कौर भुल्लर ने संचालित की। कमला अवार्ड से सम्मानित भुल्लर को फुलकारी के क्षेत्र में 40 वर्ष का अनुभव है।
फैब्रिक जूलरी की लाइव वर्कशॉप वंदना गुप्ता ने ली, जो केंद्रीय कपड़ा मंत्रालय की पंजीकृत कारीगर हैं। टेराकोटा शिल्प की बारीकियां दयाचंद ने छात्रों को सिखाईं। वे भारत सरकार के नेशनल अवार्डी हैं। वहीं, ब्लॉक पेंटिंग की वर्कशॉप अवधेश पांडेय ने ली। वे नेशनल अवार्ड के साथ नेशनल मेरिट अवार्ड से भी सम्मानित हैं।
‘चौपाटी’ में फूड स्टॉल भी बने आकर्षण
‘सूत्रम’ में सुपवा के विद्यार्थियों ने ‘चौपाटी’ के बैनर तले विभिन्न फूड आइटम्स के स्टॉल भी लगाए। इन स्टॉल पर दिनभर फूड लवर्स की भीड़ देखने को मिली। डिजाइन फेस्टिवल का समापन 14 अगस्त को सुपवा के छात्र-छात्राओं द्वारा प्रस्तुत फैशन शो के साथ होगा।
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