शोध का उद्देश्य समाज में सार्थक परिवर्तन लाना होना चाहिए : प्रो. राजेंद्र सांगवान
- एमडीयू में रिसर्च विषय पर व्याख्यान
शोध का उद्देश्य समाज में सार्थक परिवर्तन लाना होना चाहिए : प्रे. राजेंद्र सांगवान
- एमडीयू में रिसर्च विषय पर व्याख्यान
टीएचटी न्यूज, रोहतक :
“शोध का उद्देश्य केवल ज्ञान अर्जन नहीं, बल्कि समाज में सार्थक परिवर्तन लाना होना चाहिए।” इसी भावना को केंद्र में रखते हुए यूजीसी-मालवीय मिशन शिक्षक प्रशिक्षण केंद्र, महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित द्विसाप्ताहिक रिफ्रेशर कोर्स के अंतर्गत आज के विशेष सत्र में प्रख्यात वैज्ञानिक एवं रैफल्स विश्वविद्यालय, नीमराणा के कुलपति प्रो. (डॉ.) राजेन्द्र एस. सांगवान ने इम्पैक्टफुल रिसर्च विषय पर एक अत्यंत प्रेरणादायक एवं विचारोत्तेजक व्याख्यान दिया।
प्रो. सांगवान ने प्रतिभागियों को विचार से नवाचार और सामाजिक प्रभाव तक की शोध यात्रा की व्याख्या करते हुए बताया कि प्रभावशाली शोध वह है, जो अकादमिक सीमाओं से आगे बढ़कर समाज, नीति, पर्यावरण, स्वास्थ्य, अर्थव्यवस्था और तकनीकी नवाचार तक वास्तविक असर डालता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि “एक विचार या आविष्कार तब तक नवाचार नहीं बन सकता जब तक वह उपयोगकर्ता के लिए व्यावहारिक समाधान या मूल्य न बन जाए।” उन्होंने mRNA वैक्सीन, CRISPR तकनीक, ग्रीन रिवोल्यूशन और लेज़र जैसे उदाहरणों के माध्यम से यह समझाया कि कैसे वैज्ञानिक शोध नवाचार का मार्ग प्रशस्त करते हैं।
प्रो. सांगवान ने ‘क्राउड-इंस्पायर्ड इनोवेशन’ की महत्ता पर बल देते हुए कहा कि जब समाज, समुदाय और शैक्षिक संस्थान एकजुट होकर काम करते हैं, तो जटिल सामाजिक समस्याओं का समाधान अधिक प्रभावी रूप से संभव होता है। उन्होंने डिजिटल प्लेटफॉर्म्स, नागरिक विज्ञान नेटवर्क, ओपन साइंस और नीति-निर्माण में अकादमिक सहयोग की भूमिका को रेखांकित करते हुए बताया कि शोध का दायरा केवल प्रकाशन नहीं, बल्कि कम्युनिटी स्केल-अप, पॉलिसी ट्रांसलेशन और उद्यमिता तक विस्तार पाना चाहिए।
अपने व्याख्यान में उन्होंने आदर्श शोध के 10 प्रमुख तत्वों को स्पष्ट करते हुए बताया कि प्रभावशाली शोध में स्पष्ट शोध प्रश्न, सशक्त सैद्धांतिक आधार, कठोर कार्यप्रणाली, उच्च गुणवत्ता वाला डेटा, ठोस निष्कर्ष, सामाजिक प्रासंगिकता, सरल संवाद, पारदर्शिता, बहुविषयक सहयोग तथा लक्षित प्रसार आवश्यक हैं। उन्होंने यह भी साझा किया कि भारत की ऐतिहासिक खोजें — ‘शून्य’ और ‘पहिया’ — किस प्रकार वैश्विक विज्ञान और दर्शन के मूल स्तंभ बन चुकी हैं।
युवा शिक्षकों को प्रेरित करते हुए उन्होंने कहा, “आज विचार को नवाचार में बदलने का साहस ही असली शोध है। रिसर्च एक यात्रा है, और नवाचार उसका ठोस और उपयोगी गंतव्य।” उन्होंने भविष्य की संभावनाओं पर भी प्रकाश डाला—जैसे स्पेस एलिवेटर, हॉलोग्राफिक तकनीक, अंतर-प्रजातीय संवाद, और संवेदनशील आभासी सहयोग—जो शोध के नए क्षितिज खोल सकते हैं।
प्रो. मुनीश गर्ग, निदेशक, यूजीसी-मलवीय मिशन शिक्षक प्रशिक्षण केंद्र ने मुख्य वक्ता का स्वागत करते हुए कहा कि प्रो. सांगवान जैसे दूरदर्शी वैज्ञानिक का मार्गदर्शन प्रतिभागियों को शोध और नवाचार की नई दिशा प्रदान करेगा। डॉ. माधुरी हुड्डा, उपनिदेशक, ने वक्ता के प्रति आभार व्यक्त किया। सत्र का संयोजन गुरुनानक गर्ल्स कॉलेज, यमुनानगर की श्रीमती विभा अवस्थी एवं डॉ. गुरजिंदर कौर द्वारा कुशलतापूर्वक किया गया।
-------------