अब कर्मचारियों के लिए कल्याण, लचीलापन और समावेशन बेहद जरूरी हो गए हैं : प्रो. धीरज शर्मा

- भारतीय प्रबंध संस्थान रोहतक में प्रबंधन शिखर सम्मेलन 2025: नेतृत्व, नवाचार और रणनीतिक दृष्टिकोण

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अब कर्मचारियों के लिए कल्याण, लचीलापन और समावेशन बेहद जरूरी हो गए हैं : प्रो. धीरज शर्मा

अब कर्मचारियों के लिए कल्याण, लचीलापन और समावेशन बेहद जरूरी हो गए हैं : प्रो. धीरज शर्मा

- भारतीय प्रबंध संस्थान रोहतक में प्रबंधन शिखर सम्मेलन 2025: नेतृत्व, नवाचार और रणनीतिक दृष्टिकोण

टीएचटी न्यूज, रोहतक :

भारतीय प्रबंध संस्थान रोहतक (आईआईएम) के निदेशक प्रोफेसर धीरज शर्मा ने छात्रों की मेहनत की सराहना की। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन उद्योग और शिक्षा जगत के रिश्तों को मजबूत करते हैं। उन्होंने कोविड-19 के बाद कार्यस्थल पर आए बदलावों का जिक्र करते हुए बताया कि अब कर्मचारियों के लिए कल्याण, लचीलापन और समावेशन बेहद जरूरी हो गए हैं। साथ ही उन्होंने उपभोक्ता व्यवहार पर प्रकाश डाला और कहा कि पहले की पीढ़ियाँ भौतिक संपत्ति को प्राथमिकता देती थीं, जबकि आज का युवा अनुभव, यात्रा और व्यक्तिगत विकास को अधिक महत्व देता है। उनके विचारों ने नेतृत्व, प्रतिभा और समावेशन पर नए दृष्टिकोण की दिशा तय की। वे आज आईअाईएम के प्रबंधन शिखर सम्मेलन 2025 के आयोजन पर संबोधित कर रहे थे। इस वर्ष का विषय “रणनीतिक बदलावों का मार्गदर्शन : तीव्र परिवर्तन के युग में तत्परता, नवाचार और रणनीतिक बदलाव” था। इस अवसर पर 300 से अधिक विद्यार्थी तथा उद्योग जगत के वरिष्ठ नेतृत्वकर्ता उपस्थित रहे। PwC,Zomato, Bombay Shaving Company, Jindal Stainless, Avalon Consulting, Salesforce और Schneider Electric जैसी प्रमुख कंपनियों ने इसमें भाग लिया। यह सम्मेलन तीव्र गति से बदलते व्यापारिक वातावरण में तत्परता, धैर्य और उद्देश्य पर विचार-विनिमय का प्रमुख मंच बना।

वर्तमान में 1800 से अधिक विद्यार्थियों के साथ, आईआईएम रोहतक राष्ट्रीय महत्व का संस्थान है और इसे एएमबीए मान्यता प्राप्त है। यह वैश्विक प्रबंधन संस्थानों के शीर्ष 2 प्रतिशत में सम्मिलित है। साथ ही, QS वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग्स में 151+ स्थान प्राप्त कर संस्थान ने शैक्षणिक और नीतिगत उत्कृष्टता में अपनी बढ़ती पहचान को और सुदृढ़ किया है।

संस्थान के डीन (शैक्षणिक) प्रोफेसर कौस्तव घोष ने कहा कि आज कंपनियाँ जनरेटिव एआई, ईएसजी और एसडीजी लक्ष्यों के जरिये अपनी तैयारी मजबूत कर रही हैं।उनके अनुसार, अस्थायी और स्थायी बदलावों में फर्क करना जरूरी है। उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि दूरस्थ कार्य अब स्थायी बदलाव है। प्रो. घोष ने यह भी उल्लेख किया कि हाइब्रिड नेतृत्व और उद्यमशीलता आने वाले समय की चुनौतियाँ हैं। उन्होंने उद्योग और शिक्षण जगत के बीच विचार-विनिमय को उपयोगी बताते हुए सभी वक्ताओं तथा आयोजन दल का आभार व्यक्त किया।

सम्मेलन में चार मुख्य परिचर्चाएँ आयोजित की गईं :

पहली परिचर्चा “रणनीतिक लचीलापन : पारंपरिक ढाँचों से आगे व्यापार मॉडल की नई सोच” पर केंद्रित थी। इसमें नेतृत्वकर्ताओं ने बताया कि तेज़ी से बदलते बाज़ार में प्रतिस्पर्धी बने रहने के लिए कंपनियों को चुस्त रहना होगा। एक नेतृत्वकर्ता ने कहा – “संस्थाओं को अब लचीला होना ही होगा, वरना वे पीछे रह जाएँगी।” चर्चा में अनुसंधान व विकास में निवेश, आँकड़ों का जिम्मेदारी से उपयोग और अस्थायी घटनाओं की बजाय स्थायी रुझानों पर

ध्यान देने की बात कही गई।

दूसरी परिचर्चा “ब्रांडिंग का बदलता भविष्य: व्यवधान और शोर के दौर में मार्केटिंग की तैयारी”  पर आधारित थी। इस चर्चा में ब्रांड की प्रासंगिकता बनाए रखने के उपायों पर विचार हुआ। नेतृत्वकर्ता ने कहा कि बदलते समय के साथ तालमेल रखते हुए मूल्यों के प्रति निष्ठावान रहना आवश्यक है। उन्होंने स्पष्टता, पारदर्शिता और सह-निर्माण पर बल दिया और निष्कर्ष निकाला कि स्थायी ब्रांड वही हैं जो परिवर्तन को निरंतर प्रक्रिया मानते हैं।

तीसरी परिचर्चा “रणनीतिक जन-योजना : प्रतिभा-आधारित अर्थव्यवस्था में कर्मचारी मूल्य की पुनर्परिभाषा” पर केंद्रित थी और इसमें तकनीकी रूप से सक्षम विविध कार्यबल के लिए कर्मचारी मूल्य प्रस्ताव को नया रूप देने पर चर्चा हुई। चर्चा में लचीलापन, कल्याण और उद्देश्यपूर्ण लक्ष्यों के साथ-साथ तकनीक के माध्यम से व्यक्तिगत करियर यात्रा बनाने की भूमिका पर बल दिया गया। यह भी कहा गया कि कर्मचारियों को केवल संसाधन नहीं, बल्कि सहभागी के रूप में देखा जाना चाहिए।

चौथी परिचर्चा, “प्रतिभा 3.0 : अव्यवस्था के वातावरण में क्षमता, नवाचार और निरंतरता का संवर्धन” पर केंद्रित थी और इसमें संगठनों द्वारा ऐसे तंत्र बनाने की आवश्यकता पर चर्चा हुई जो प्रयोग की भावना, विभिन्न क्षेत्रों में सीखने और आत्म- निर्देशित करियर विकास को बढ़ावा दें। निष्कर्ष यह रहा कि उद्देश्य, तत्परता और सतत शिक्षा की संस्कृति से ही भविष्य की चुनौतियों के लिए सक्षम कार्यबल तैयार किया जा सकता है। इस सम्मेलन ने एक बार फिर यह सिद्ध किया कि आईआईएम रोहतक उद्योग, अकादमिक सहयोग, विचार नेतृत्व और नवाचार का प्रमुख केंद्र है। सभी परिचर्चाओं का निष्कर्ष यह रहा कि बदलते समय का सामना करने के लिए कंपनियों को नई रणनीतियाँ अपनानी होंगी, ब्रांड्स को लचीला रखना होगा और कर्मचारी-केंद्रित विधियाँ अपनानी होंगी।

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