न्याय प्रणाली वर्षों नहीं बल्कि कुछ महीनों में न्याय प्रदान करे : न्यायाधीश अशोक जैन
- भारतीय प्रबंध संस्थान रोहतक में लॉ समिट 2025: इंडिया @ 2047 – कानूनी उत्कृष्टता के माध्यम से सशक्तिकरण
न्याय प्रणाली वर्षों नहीं बल्कि कुछ महीनों में न्याय प्रदान करे : न्यायाधीश अशोक जैन
- भारतीय प्रबंध संस्थान रोहतक में लॉ समिट 2025: इंडिया @ 2047 – कानूनी उत्कृष्टता के माध्यम से सशक्तिकरण
टीएचटी न्यूज, रोहतक :
भारतीय प्रबंध संस्थान (आईआईएम) रोहतक ने अपने इंटीग्रेटेड प्रोग्राम इन लॉ (आईपीएल) के तहत 14 सितम्बर 2025 को वार्षिक लॉ सम्मेलन 2025 का आयोजन किया। दो सफल संस्करणों के बाद, यह सम्मेलन इस वर्ष “इंडिया @ 2047: कानूनी उत्कृष्टता के माध्यम से सशक्तिकरण” विषय के साथ आयोजित किया गया। आईआईएम रोहतक ही एकमात्र आईआईएम है, जहाँ कानून और प्रबंधन को मिलाकर विशेष आईपीएल कार्यक्रम उपलब्ध है । इस अवसर पर तीन रोचक पैनल चर्चाओं का आयोजन किया, जिसमें 400 से अधिक विद्यार्थियों और संकाय सदस्यों ने भाग लिया।
सम्मेलन की शुरुआत मुख्य अतिथि अशोक कुमार जैन, न्यायाधीश, राजस्थान उच्च न्यायालय तथा आईआईएम रोहतक के निदेशक प्रोफेसर धीरज शर्मा द्वारा दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुई। न्यायमूर्ति जैन ने “इंडिया @ 2047: कानूनी उत्कृष्टता के माध्यम से सशक्तिकरण” विषय पर विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि भारत को वर्ष 2047 तक पूर्ण विकसित राष्ट्र बनाने के लिए आवश्यक है कि इसकी न्याय प्रणाली वर्षों नहीं बल्कि कुछ महीनों में न्याय प्रदान करे, जैसा कि हाल ही में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा त्वरित निर्णयों की दिशा में प्रयासों से स्पष्ट होता है। उन्होंने समावेशी कॉरपोरेट पुनर्गठन, पारदर्शी वित्तीय बाजार,
वैश्विक स्तर के मध्यस्थता केंद्र और तकनीक-आधारित न्यायालयों की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि सतत विकास तभी संभव है जब आर्थिक प्रगति के साथ समानता और पर्यावरणीय संरक्षण का संतुलन बना रहे। अपने अंतिम विचारों में उन्होंने कहा कि भारत की आर्थिक लोकतंत्र की आकांक्षा केवल कानूनी उत्कृष्टता के माध्यम से ही पूरी हो सकती है। डॉ. भीमराव अंबेडकर का उल्लेख करते हुए उन्होंने निष्कर्ष निकाला कि राजनीतिक लोकतंत्र सामाजिक लोकतंत्र पर आधारित होना चाहिए और एक विकसित भारत के निर्माण की कुंजी कानूनी उत्कृष्टता है।
प्रोफेसर धीरज शर्मा ने अपने स्वागत भाषण में आईआईएम रोहतक के इंटीग्रेटेड प्रोग्राम इन लॉ पर प्रकाश डाला, जिसका उद्देश्य ऐसे पेशेवर तैयार करना है जिनके पास क़ानून और प्रबंधन दोनों की समझ हो। उन्होंने पाठ्यक्रम की विविधता का उल्लेख करते हुए बताया कि इसमें विद्यार्थी कैलकुलस और मनोविज्ञान से लेकर व्यवसाय और मुख्य क़ानून विषयों तक का अध्ययन करते हैं। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि 500 से अधिक विद्यार्थियों के साथ यह कार्यक्रम एक विस्तृत संकाय आधार से समर्थित है, जिसमें 50 से अधिक अंतरराष्ट्रीय संस्थानों के विज़िटिंग प्रोफेसर भी शामिल हैं। प्रोफेसर शर्मा ने गर्व के साथ बताया कि शीर्ष संस्थानों में इंटर्नशिप के माध्यम से उद्योग जगत से सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली है, जो इस कार्यक्रम की बढ़ती पहचान को दर्शाती है। अपने विचार रखते हुए उन्होंने कहा कि क़ानून ही वह तत्व है जो सभ्य दुनिया को अराजकता से अलग करता है। निदेशक ने शिक्षा की भूमिका पर भी
बल दिया, जो युवाओं को स्वतंत्र रूप से सोचने, विविधता का सम्मान करने और बाहरी प्रभावों का विरोध करने में सक्षम बनाती है। अपने संबोधन के अंत में उन्होंने कहा कि यद्यपि इस सम्मेलन में कॉरपोरेट पुनर्गठन, आर्बिट्रेशन और व्यापक कानूनी मुद्दों पर विचार प्रस्तुत किए जाएंगे, लेकिन सबसे महत्वपूर्ण पक्ष व्यक्तिगत निर्णय-निर्माण की क्षमता है।
पहली पैनल चर्चा का विषय था – “भारत में कॉरपोरेट पुनर्गठन: कानूनी ढांचा, प्रतिस्पर्धा संबंधी चिंताएँ और न्यायपालिका की भूमिका”, जिसका संचालन अनिल अग्रवाल, सदस्य, प्रतिस्पर्धा आयोग (Competition Commission of India) ने किया। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि आने वाले 20 वर्षों में भारत के वैश्विक नेतृत्व का मार्ग उसकी लचीलापन, समावेशिता और वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता पर निर्भर करेगा, और इस दृष्टि में कॉरपोरेट पुनर्गठन को केंद्र में रखा जाना आवश्यक है। पैनल सदस्यों ने चर्चा को आगे बढ़ाते हुए भारत के विकसित अर्थव्यवस्था बनने के मार्ग पर विचार साझा किए और ज़ोर दिया कि मज़बूत कानूनों और त्वरित विवाद निपटान की व्यवस्था से ही एक भरोसेमंद कारोबारी वातावरण सुनिश्चित हो सकता है। चर्चा का समापन विकसित भारत, सतत विकास और समावेशिता पर केंद्रित रहा।
दूसरी पैनल चर्चा का विषय था – “भारत का कॉरपोरेट वित्तीय पारितंत्र: नियामक विकास, न्यायपालिका की भूमिका और बाज़ार की प्रवृत्तियाँ”, जिसका संचालन डॉ. अनिता अनुप, मुख्य महाप्रबंधक, भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने किया। पैनल सदस्यों ने चर्चा की शुरुआत करते हुए इस बात पर ज़ोर दिया कि निवेशकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के साथ-साथ बाज़ार की वृद्धि को समर्थन देने में सेबी की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने निजी इक्विटी, विलय एवं अधिग्रहण (M&A) और सूचीबद्ध न की गई कंपनियों की विकास में भूमिका पर प्रकाश डाला और जिम्मेदार जोखिम उठाने तथा निष्पक्ष व्यावसायिक प्रथाओं की आवश्यकता को रेखांकित किया। चर्चा का समापन न्यायपालिका की आर्थिक संतुलन बनाए रखने में भूमिका और उत्तरदायी शासन की आवश्यकता पर बल देते हुए हुआ।
तीसरी पैनल चर्चा का विषय था – “भारत में विवाद समाधान की बदलती प्रकृति: नियामक विकास, न्यायिक प्रवृत्तियाँ और संस्थागत चुनौतियाँ”। इस चर्चा का केंद्र बिंदु यह रहा कि वैकल्पिक विवाद समाधान (ADR) तंत्र किस प्रकार व्यावसायिक प्रक्रियाओं को और सुगम बना सकता है।पैनल सदस्यों ने अदालतों पर निर्भरता कम करने के लिए मध्यस्थता (Mediation) और पंचाट (Arbitration) के व्यापक उपयोग का आग्रह किया। उन्होंने बताया कि एडीआर समय, लागत और संसाधन की बचत करता है। साथ ही, मजबूत संस्थानों, अधिक संख्या में युवा पंचों तथा उद्योग जगत में बढ़ती जागरूकता की आवश्यकता पर ज़ोर दिया। सत्र का निष्कर्ष यह रहा कि न्यायिक बोझ को कम करने और भरोसा बनाने के लिए तकनीक का समावेश अत्यंत महत्वपूर्ण है।
सम्मेलन ने प्रतिष्ठित कंपनियों से आए प्रख्यात उद्योग नेताओं को एक साथ सफलतापूर्वक जोड़ा, जहाँ उन्होंने विचार साझा किए और भारत की न्याय प्रणाली के भविष्य पर चर्चा की।
इन संस्थानों के प्रतिनिधियों ने लिया हिस्सा
अदाणी एंटरप्राइजेज लिमिटेड, एनाग्राम पार्टनर्स, अयाना रिन्यूएबल पावर, देसाई एंड दिवानजी, ग्रेविटास लीगल, हम्मुराबी एंड सोलोमन पार्टनर्स, एचएसए एडवोकेट्स, आईसीआईसीआई बैंक, जेएसए एडवोकेट्स एंड सॉलिसिटर्स, खैतान एंड कंपनी, कोटक महिंद्रा बैंक, एस एंड आर एसोसिएट्स, शार्दुल अमरचंद मंगलदास एंड कंपनी, टाटा एआईजी जनरल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड और वाडिया गांधी एंड कंपनी। सम्मेलन ने देश की प्रतिष्ठित कंपनियों से आए प्रख्यात उद्योग विशेषज्ञों को एक मंच पर एकत्र किया, जहाँ उन्होंने विचार साझा किए और भारत की न्याय प्रणाली के भविष्य पर चर्चा की। इनमें शामिल कंपनियाँ थीं: अदाणी एंटरप्राइजेज लिमिटेड, एनाग्राम पार्टनर्स, अयाना रिन्यूएबल पावर, देसाई एंड दिवानजी, ग्रेविटास लीगल, हम्मुराबी एंड सोलोमन पार्टनर्स, एचएसए एडवोकेट्स, आईसीआईसीआई बैंक, जेएसए एडवोकेट्स एंड सॉलिसिटर्स, खैतान एंड कंपनी, कोटक महिंद्रा बैंक, एस एंड आर एसोसिएट्स, शार्दुल अमरचंद मंगलदास एंड कंपनी, टाटा एआईजी जनरल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड और वाडिया गांधी एंड कंपनी के प्रतिनिधियों ने चर्चा में हिस्सा लिया।
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