परमवीर चक्र विजेता होशियार सिंह दहिया ने 1971 में पाक सेना को खदेड़ दिया था

- सोनीपत के गांव सिसाना के निवासी हरियाणा के पहले परमवीर च्रक विजेता सेना अधिकारी

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परमवीर चक्र विजेता होशियार सिंह दहिया ने 1971 में पाक सेना को खदेड़ दिया था

परमवीर चक्र विजेता होशियार सिंह दहिया ने 1971 में पाक सेना को खदेड़ दिया था

- सोनीपत के गांव सिसाना के निवासी हरियाणा के पहले परमवीर च्रक विजेता सेना अधिकारी

- रोहतक के जाट स्कूल में की थी पढ़ाई, 1963 में मिला थाा ग्रेनेडियर रेजिमेंट में कमीशन

ओपी वशिष्ठ, रोहतक :

सोनीपत के गांव सिसाना के मेजर (बाद में ब्रिगेडियर) होशियार सिंह दहिया हरियाणा के पहले परमवीर चक्र विजेता थे। रोहतक के जाट कालेज में पढ़ाई की और 1963 में भारतीय सेना के ग्रेनेडियर रेजिमेंट में कमीशन मिला। 1971 की लड़ाई में पाकिस्तानी सेना का न केवल डटकर मुकाबला किया बल्कि खदेड़ दिया था।

होशियार सिंह दहिया का जन्म (5 मई 1937 को हरियाणा के सोनीपत जिले के सिसाना गांव में चौधरी हीरा सिंह के घर हुआ था। रोहतक के जाट स्कूल और कॉलेज में अपनी स्कूली शिक्षा और एक वर्ष का अध्ययन करने के बाद होशियार सिंह दहिया सेना में शामिल हो गए। उन्हें 30 जून 1963 को भारतीय सेना के ग्रेनेडियर रेजिमेंट में कमीशन किया गया था। उनकी पहली तैनाती नेफ़ा (नॉर्थ-ईस्ट फ़्रंटियर एजेंसी) (NEFA) में थी । 1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में, उन्होंने राजस्थान क्षेत्र से भाग लिया। उन्होंने भारतीय सेना में समर्पण के साथ सेवा की और ब्रिगेडियर के रूप में सेवानिवृत्त हुए। उन्हें भारत के सर्वोच्च सैन्य सम्मान परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया था। छह दिसंबर 1998 को प्राकृतिक कारणों से उनका निधन हो गया।

1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में दिया था शौर्य क परिचय

1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान तीसरे ग्रेनेडियर को 15-17 दिसम्बर 1971 से शकरगढ़ सेक्टर में बसंतर नदी में एक पुल का निर्माण करने का कार्य दिया गया था। नदी दोनों तरफ से गहरी लैंड माइन से ढकी हुई थी और पाकिस्तानी सेना द्वारा अच्छी तरह से संरक्षित थी। कमांडर 'सी' कंपनी मेजर होशियार सिंह को जर्पाल के पाकिस्तानी इलाके पर कब्जा करने का आदेश दिया गया था। पाकिस्तानी सेना ने प्रतिक्रिया करते हुए जवाबी कार्यवाही की। हमले के दौरान मेजर होशियार सिंह एक खाई से दूसरी खाई में अपने सैनिकों का हौसला बढ़ने के लिए भागते रहे तेजी से खड़े होने के लिए प्रोत्साहित करते रहे परिणामस्वरूप उनकी कंपनी ने पाकिस्तानी सेना के भारी हमलों के बावजूद दुश्मन को बहुत क्षति पहुंचाई और उनके सभी हमलों को विफल कर दिया। गम्भीर रूप से घायल होने के बावजूद मेजर होशियार सिंह ने युद्धविराम तक पीछे हटने से मना कर दिया। इस अभियान के दौरान मेजर होशियार सिंह ने सेना की सर्वोच्च परंपराओं में सबसे विशिष्ट बहादुरी, अतुलनीय लड़ाई भावना और नेतृत्व को प्रदर्शित किया। इसी शौर्य प्रदर्शन के चलते उनको परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया था।

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