यूएचएस रोहतक और हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय के बीच एमओयू, संक्रामक व महिला रोगों पर शोध को मिलेगा नया आयाम

- हड्डी की टीबी, एंडोमेट्रियोसिस और पार्किंसंस जैसी बीमारियों की त्वरित पहचान व इलाज में मिलेगी मदद: कुलपति डॉ. एच.के. अग्रवाल

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यूएचएस रोहतक और हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय के बीच एमओयू, संक्रामक व महिला रोगों पर शोध को मिलेगा नया आयाम

यूएचएस रोहतक और हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय के बीच एमओयू, संक्रामक व महिला रोगों पर शोध को मिलेगा नया आयाम

- हड्डी की टीबी, एंडोमेट्रियोसिस और पार्किंसंस जैसी बीमारियों की त्वरित पहचान व इलाज में मिलेगी मदद: कुलपति डॉ. एच.के. अग्रवाल

ओपी वशिष्ठ, रोहतक

पीजीआईएमएस रोहतक में मरीजों को उच्च गुणवत्ता का इलाज उपलब्ध कराने की प्रतिबद्धता को और मजबूत करते हुए पंडित भगवत दयाल शर्मा स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय (यूएचएस) ने गुरुवार को हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय (सीयूएच), महेंद्रगढ़ के साथ एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए। यह साझेदारी संक्रामक रोगों और महिलाओं से जुड़ी बीमारियों पर अनुसंधान को नई दिशा देगी, जिससे हरियाणा सहित आसपास के राज्यों की जनता को सीधा लाभ मिलेगा।

यूएचएस के कुलपति डॉ. एच.के. अग्रवाल ने बताया कि हरियाणा सरकार और विश्वविद्यालय का निरंतर प्रयास है कि शोध के माध्यम से मरीजों को नवीनतम और सटीक उपचार उपलब्ध कराया जाए। इसी उद्देश्य से सीयूएच के साथ यह अहम एमओयू किया गया है।

डॉ. अग्रवाल ने बताया कि इस सहयोग के तहत हड्डी की टीबी पर विशेष शोध किया जाएगा। पीजीआईएमएस रोहतक में मरीजों की हड्डी से लिए गए सैंपल सीयूएच भेजे जाएंगे, जहां आधुनिक तकनीक के माध्यम से एक ही दिन में यह पता लगाया जा सकेगा कि मरीज को हड्डी की टीबी है या नहीं। इससे इलाज में देरी नहीं होगी और रोग पर समय रहते नियंत्रण संभव हो सकेगा।

इसके अलावा महिलाओं में पाई जाने वाली एंडोमेट्रियोसिस बीमारी की जांच के लिए ब्लड सैंपल सीयूएच महेंद्रगढ़ भेजे जाएंगे, जिससे 24 घंटे के भीतर बीमारी की पुष्टि हो सकेगी और समय पर इलाज शुरू किया जा सकेगा।

हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. टंकेश्वर कुमार ने कहा कि पीजीआईएमएस रोहतक के साथ यह एमओयू सार्वजनिक स्वास्थ्य के महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सहयोगी अनुसंधान और नैदानिक इंटरफेस को आगे बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

उन्होंने बताया कि सीयूएच के बायोकेमिस्ट्री विभाग द्वारा शुरू की गई इस साझेदारी का फोकस लाइफस्टाइल डिसऑर्डर, महिला स्वास्थ्य और संक्रामक रोगों पर संयुक्त शोध को बढ़ावा देना है, जो वर्तमान समय की प्रमुख चिकित्सा और सामाजिक चुनौतियाँ हैं।

यूएचएस के कुलसचिव डॉ. रूप सिंह ने कहा कि यह साझेदारी अंतर-संस्थागत अनुसंधान को गति देने, अनुवादात्मक परिणामों को बढ़ावा देने और नए वित्त पोषित प्रोजेक्ट्स को आकर्षित करने में सहायक सिद्ध होगी।

निदेशक डॉ. एस.के. सिंघल ने बताया कि इस एमओयू के तहत सीयूएच और पीजीआईएमएस संयुक्त शोध परियोजनाएं, डेटा आधारित स्वास्थ्य मूल्यांकन, प्रशिक्षण कार्यक्रम और संसाधन-साझेदारी की पहल करेंगे, जिससे चिकित्सा और जैव प्रौद्योगिकी विज्ञान में क्षेत्रीय क्षमता का विस्तार होगा।

सीयूएच के डॉ. विकास धीगडा ने बताया कि विश्वविद्यालय में बायोमेडिकल रिसर्च भी चल रही है, जिसके माध्यम से पॉलीथिन को फंगस और बैक्टीरिया की मदद से नष्ट करने पर काम किया जा रहा है। वहीं डॉ. अंतरेश कुमार ने कहा कि यह एमओयू पार्किंसंस रोग की शुरुआती पहचान में भी सहायक होगा।

इस अवसर पर कुलसचिव डॉ. रूप सिंह, निदेशक डॉ. एस.के. सिंघल, डीन एकेडमिक अफेयर्स डॉ. एम.जी. वशिष्ठ, डीन डॉ. अशोक चौहान, डीन छात्र कल्याण डॉ. सविता सिंघल, स्त्री रोग विभागाध्यक्ष डॉ. पुष्पा दहिया सहित सीयूएच व पीजीआईएमएस के कई वरिष्ठ अधिकारी और विशेषज्ञ उपस्थित रहे।

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