अंगदान कर खाकी वर्दी का आखिरी फर्ज निभा गया सिपाही, 5 लोगों को मिला नया जीवन

- कैबिनेट मंत्री डा. अरविंद शर्मा ने परिवार को ₹5 लाख सहायता की घोषणा; कुलपति डा. एचके अग्रवाल बोले—“यह महादान मानवता की मिसाल”

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अंगदान कर खाकी वर्दी का आखिरी फर्ज निभा गया सिपाही, 5 लोगों को मिला नया जीवन

अंगदान कर खाकी वर्दी का आखिरी फर्ज निभा गया सिपाही, 5 लोगों को मिला नया जीवन

- कैबिनेट मंत्री डा. अरविंद शर्मा ने परिवार को ₹5 लाख सहायता की घोषणा; कुलपति डा. एचके अग्रवाल बोले—“यह महादान मानवता की मिसाल”

रोहतक | द हरियाणा टॉक्स

पंडित भगवत दयाल शर्मा स्वास्थ्य विज्ञान विश्ववविद्यालय रोहतक में एक भावुक और प्रेरणादायक घटना सामने आई, जहां हरियाणा पुलिस के एक जवान ने मृत्यु के बाद भी मानवता की मिसाल कायम करते हुए अंगदान कर पांच लोगों को नया जीवन दिया।

सुनारियां जेल में तैनात इस सिपाही के ब्रेन डेड घोषित होने के बाद उसके परिवार ने कठिन निर्णय लेते हुए अंगदान की अनुमति दी। इस निर्णय के चलते सिपाही का लिवर, किडनी, पैंक्रियाज और कॉर्निया जरूरतमंद मरीजों को प्रत्यारोपित किए गए।

श्रद्धांजलि देने पहुंचे कैबिनेट मंत्री डा. अरविंद शर्मा ने कहा कि यह घटना सिर्फ एक खबर नहीं, बल्कि एक आंदोलन है, जो समाज को यह सोचने पर मजबूर करती है कि हम अपने जीवन के बाद भी दूसरों के काम आ सकते हैं। उन्होंने परिवार के साहस की सराहना करते हुए ₹5 लाख की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की। मंत्री ने कहा कि “अंगदान कोई साधारण दान नहीं, बल्कि जीवन का विस्तार है। एक व्यक्ति का यह निर्णय कई लोगों को नई जिंदगी दे सकता है।”

डा. एचके अग्रवाल, कुलपति, पीजीआईएमएस ने कहा कि एक सच्चा सिपाही जीवन भर देश की सेवा करता है और मृत्यु के बाद भी समाज के काम आता है। उन्होंने इसे “मानवता का महाकुंभ” बताते हुए कहा कि यह घटना पूरे हरियाणा के लिए प्रेरणा है।

भावनात्मक पहलू: आंसुओं के बीच लिया गया निर्णय

डॉक्टरों के अनुसार, सिपाही लंबे समय से गंभीर बीमारी से जूझ रहा था और ऑपरेशन के बाद उसे ब्रेन डेड घोषित किया गया। यह खबर परिवार के लिए बेहद दुखद थी, लेकिन इसी कठिन समय में उन्होंने अंगदान का साहसिक निर्णय लिया। सिपाही की पत्नी ने भावुक होकर कहा कि “अगर मेरे पति के जाने से किसी और का घर बच सकता है, तो यह सबसे बड़ा सुकून होगा।”

ग्रीन कॉरिडोर से बचीं जानें

अंगों के प्रत्यारोपण के लिए रोहतक से दिल्ली तक ग्रीन कॉरिडोर बनाया गया, जिससे समय पर अंग पहुंचाकर मरीजों की जान बचाई जा सकी। इस पूरी प्रक्रिया में पुलिस और चिकित्सा टीम की अहम भूमिका रही। पीजीआईएमएस के निदेशक डा. एसके सिंघल ने बताया कि सिपाही के अंगों से एक साथ पांच लोगों की जिंदगी बचाई गई।

मुख्य बिंदु

सिपाही के अंगदान से 5 लोगों को नया जीवन

लिवर, किडनी, पैंक्रियाज और कॉर्निया का हुआ प्रत्यारोपण

परिवार ने दुख की घड़ी में लिया साहसिक निर्णय

₹5 लाख आर्थिक सहायता की घोषणा

ग्रीन कॉरिडोर बनाकर समय पर अंग पहुंचाए गए

अंगदान के प्रति बढ़ रही जागरूकता

State Organ and Tissue Transplant Organization (सोटो) के प्रयासों से हरियाणा में अंगदान को लेकर जागरूकता बढ़ रही है। पहले जहां लोग भ्रांतियों के कारण डरते थे, अब वे स्वयं आगे आकर जानकारी ले रहे हैं। डॉक्टरों के अनुसार, पिछले कुछ समय में अंगदान के प्रति लोगों का रुझान तेजी से बढ़ा है और अधिक लोग इस अभियान से जुड़ रहे हैं।

अंतिम विदाई: भावुक कर देने वाला दृश्य

अंगदान की प्रक्रिया पूरी होने के बाद सिपाही को पूरे सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई। पुलिस के जवानों ने सलामी दी और पूरा अस्पताल परिसर कुछ समय के लिए मौन हो गया। यह दृश्य न केवल शोक का, बल्कि गर्व और प्रेरणा का भी प्रतीक था।

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