एमडीयू में क्रिटिकेयर कॉन्क्लेव: उन्नत गहन चिकित्सा तकनीकों पर विशेषज्ञों का गहन मंथन
भविष्य में कृत्रिम फेफड़ों और एआई-इंटीग्रेटेड इक्मो संभव: डॉ. यतिन मेहता
एमडीयू में क्रिटिकेयर कॉन्क्लेव: उन्नत गहन चिकित्सा तकनीकों पर विशेषज्ञों का गहन मंथन
भविष्य में कृत्रिम फेफड़ों और एआई-इंटीग्रेटेड इक्मो संभव: डॉ. यतिन मेहता
टीएचटी न्यूज, रोहतक
गहन चिकित्सा सेवाओं के क्षेत्र में भविष्य में कृत्रिम फेफड़ों और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस इंटीग्रेटेड इक्मो (एक्स्ट्रा कॉर्पोरियल मेम्ब्रेन ऑक्सीजेनेशन) महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। यह बात मेदांता गुरुग्राम के क्रिटिकल केयर निदेशक डॉ. यतिन मेहता ने महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय में आयोजित द्वितीय क्रिटिकेयर स्टेट कॉनक्लेव 2025 के दौरान कही। वे प्रथम डॉ. अरविंद दहिया स्मृति व्याख्यान में मुख्य अतिथि वक्ता के रूप में बोल रहे थे।
डॉ. मेहता ने इक्मो तकनीक की शुरुआत, विकास यात्रा और वर्तमान उपयोग पर व्यापक जानकारी साझा की। उन्होंने स्पष्ट किया कि गंभीर अवस्था में यह तकनीक हृदय और फेफड़ों की बाहरी सहायता प्रदान कर जीवन बचाने में निर्णायक भूमिका निभाती है। उन्होंने कहा कि आने वाले वर्षों में एआई-आधारित इक्मो प्रणालियाँ चिकित्सीय निर्णय क्षमता को और अधिक सटीक बना सकती हैं।
यह एक दिवसीय राज्य स्तरीय सम्मेलन सोसायटी ऑफ क्रिटिकल केयर मेडिसिन (रोहतक शाखा) और कायनोस हॉस्पिटल द्वारा, एपीआई हरियाणा व आईएपी हरियाणा के सहयोग से आयोजित किया गया। सम्मेलन में चार तकनीकी सत्र आयोजित हुए जिनमें इक्मो और सीआरआरटी (कंटीन्यूअस रीनल रिप्लेसमेंट थेरेपी) के नवीन आयामों पर विस्तृत चर्चा हुई।
कार्यक्रम में उत्कृष्ट शोध प्रस्तुतियों के लिए डॉ. अरविंद दहिया ओरैशन अवार्ड प्रदान किया गया और पोस्टर एवं पेपर प्रेजेंटेशन के लिए प्रतिभागियों को सम्मानित किया गया। वक्ताओं ने इस आयोजन को हरियाणा में गहन चिकित्सा सेवाओं के स्तर को बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।
इस सम्मेलन की आयोजन अध्यक्षा एवं कायनोस हॉस्पिटल की निदेशिका डॉ. कीर्ति बेरवाल दहिया ने स्वागत भाषण देकर कार्यक्रम का संचालन किया। उन्होंने कहा कि स्वर्गीय डॉ. अरविंद दहिया सामुदायिक स्वास्थ्य सेवाओं की उन्नति के लिए सदैव प्रेरक शक्ति रहे और यह व्याख्यान उनकी स्मृति को समर्पित है।
सम्मेलन में डॉ. ध्रुव चौधरी और डॉ. नवीन मल्होत्रा ने डॉ. दहिया से जुड़े संस्मरण साझा किए। तकनीकी सत्रों में डॉ. विवेक गुप्ता, डॉ. आशीष नंदवानी, डॉ. कुणाल गांधी, डॉ. एकल अरोड़ा, डॉ. गौरव आर्य, डॉ. अनिल सचदेव, डॉ. वरुण नरवाल, डॉ. सुमन लता, डॉ. सन्नी कुमार और डॉ. साक्षी अग्रवाल ने प्रस्तुतियाँ दीं।
परिसंवाद सत्र में डॉ. यतिन मेहता, डॉ. विवेक गुप्ता, डॉ. आदित्य बतरा और डॉ. अश्वनी कुमार ने कार्डियोजेनिक शॉक के उपचार संबंधी दृष्टिकोण पर चर्चा की। सत्र का संचालन डॉ. प्रशांत कुमार और डॉ. कीर्ति बेरवाल दहिया ने किया।
कार्यक्रम में डॉ. अरविंद दहिया के परिजन—आर.पी. दहिया, प्रेमवती और परविंदर—के अलावा डॉ. गीता गठवाला, डॉ. हरप्रीत सिंह, डॉ. सुशीला तक्षक, डॉ. जय प्रकाश, डॉ. परवीन मल्होत्रा, डॉ. पवन शर्मा सहित प्रदेशभर से अनेक वरिष्ठ चिकित्सक उपस्थित रहे।
समापन सत्र में आयोजकों ने कहा कि इस प्रकार के सम्मेलन चिकित्सकों को नवीनतम तकनीकों से परिचित कराने के साथ-साथ व्यवहारिक कौशल को मजबूत करने का अनूठा अवसर प्रदान करते हैं।
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