आईआईएम रोहतक में लॉ समिट-2026: आर्थिक विकास के साथ सतत विकास और सुशासन पर जोर
राजस्थान हाईकोर्ट के अतिरिक्त न्यायाधीश न्यायमूर्ति अनूरूप सिंघी ने किया उद्घाटन; 50 से अधिक विधि विशेषज्ञों और शिक्षाविदों की भागीदारी, 400 से अधिक विद्यार्थियों ने लिया हिस्सा
आईआईएम रोहतक में लॉ समिट-2026: आर्थिक विकास के साथ सतत विकास और सुशासन पर जोर
- राजस्थान हाईकोर्ट के अतिरिक्त न्यायाधीश न्यायमूर्ति अनूरूप सिंघी ने किया उद्घाटन; 50 से अधिक विधि विशेषज्ञों और शिक्षाविदों की भागीदारी, 400 से अधिक विद्यार्थियों ने लिया हिस्सा
टीएचटी न्यूज, रोहतक :
भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम) रोहतक में आयोजित वार्षिक लॉ समिट-2026 में आर्थिक प्रगति, सतत विकास, सुशासन और जनविश्वास के बीच संतुलन स्थापित करने पर जोर दिया गया। ‘सुशासन, विश्वास और विकास’ (Governance, Trust and Growth) थीम पर आयोजित इस सम्मेलन में कॉरपोरेट प्रशासन, वित्तीय सेवाओं में नियामकीय विश्वास और बदलते कारोबारी परिवेश में कानून की भूमिका पर चर्चा हुई। कार्यक्रम में राजस्थान हाईकोर्ट के अतिरिक्त न्यायाधीश न्यायमूर्ति अनूरूप सिंघी मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। सम्मेलन में 50 से अधिक विधि विशेषज्ञों और शिक्षाविदों के साथ 400 से अधिक विद्यार्थियों ने भाग लिया।
आर्थिक प्रगति के साथ सतत विकास जरूरी: न्यायमूर्ति सिंघी
न्यायमूर्ति अनूरूप सिंघी ने कहा कि सुशासन, विश्वास और विकास के लक्ष्यों को हासिल करने के लिए आर्थिक प्रगति और सतत विकास के बीच संतुलन बनाए रखना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि कानून और व्यवसाय दोनों लगातार बदलते रहते हैं। इसलिए कानूनी प्रक्रियाओं और दृष्टिकोणों को बाजार की बदलती परिस्थितियों तथा कारोबारी जरूरतों के अनुरूप विकसित करना जरूरी है। उन्होंने आईआईएम रोहतक के इंटीग्रेटेड प्रोग्राम इन लॉ के विद्यार्थियों को कानून और प्रबंधन का संयुक्त ज्ञान हासिल करने के लिए बधाई दी। साथ ही, इस ज्ञान का इस्तेमाल वास्तविक कारोबारी चुनौतियों के समाधान में करने का आह्वान किया।
न्यायमूर्ति सिंघी ने विद्यार्थियों को मौलिकता और नैतिक मूल्यों के प्रति प्रतिबद्ध रहने की सलाह देते हुए कहा कि न्याय केवल होना ही नहीं चाहिए, बल्कि होता हुआ दिखाई भी देना चाहिए। उन्होंने न्याय व्यवस्था में निष्पक्षता, पारदर्शिता और जनविश्वास को महत्वपूर्ण बताया।
जिज्ञासा और नैतिकता से विकसित होगा नेतृत्व: प्रो. धीरज शर्मा
आईआईएम रोहतक के निदेशक प्रो. धीरज शर्मा ने कहा कि लॉ समिट संस्थान की महत्वपूर्ण शैक्षणिक परंपरा बन चुका है। उन्होंने विद्यार्थियों को रटकर सीखने के बजाय सवाल पूछने, स्वतंत्र चिंतन करने और स्वयं पहल करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कानूनी व्यवस्था में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) की बढ़ती भूमिका का उल्लेख करते हुए कहा कि न्यायिक निर्णयों में एकरूपता के साथ मानवीय विवेक और संवेदनशीलता बनाए रखना भी जरूरी है। प्रो. शर्मा ने केंद्र सरकार के मिशन ‘कर्मयोगी’ का जिक्र करते हुए सार्वजनिक सेवा में पेशेवर दक्षता, नैतिक आचरण और जवाबदेही के महत्व पर बल दिया। उन्होंने विद्यार्थियों से निरंतर सीखने और उत्कृष्टता की दिशा में प्रयास करने का आह्वान किया।
चार प्रमुख विषयों पर हुई पैनल चर्चा
सम्मेलन में कॉरपोरेट संस्थानों, वित्तीय सेवा कंपनियों और विधि फर्मों के विशेषज्ञों ने चार प्रमुख विषयों पर विचार साझा किए।
पहली चर्चा में कानूनी सुशासन और व्यावसायिक प्रगति के बीच समन्वय, जोखिमों के आकलन तथा स्पष्ट और पूर्वानुमेय कानूनी प्रक्रियाओं की आवश्यकता पर विचार किया गया।
दूसरे सत्र में वित्तीय सेवाओं में नियामकीय विश्वास मजबूत करने, उपभोक्ताओं के भरोसे और नवाचार के अनुरूप नियामकीय ढांचे को विकसित करने पर चर्चा हुई।
तीसरी पैनल चर्चा आधुनिक कॉरपोरेट बोर्डरूम में सुशासन पर केंद्रित रही। इसमें संस्थानों में शुरुआत से मजबूत प्रशासनिक संस्कृति विकसित करने, जिम्मेदारियां स्पष्ट करने और निदेशक मंडल की निगरानी तथा प्रबंधन की स्वायत्तता के बीच संतुलन बनाए रखने पर जोर दिया गया।
चौथे सत्र में पारंपरिक कानूनी सलाहकार से रणनीतिक कारोबारी भागीदार के रूप में वकीलों की बदलती भूमिका पर चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने कहा कि कानूनी विशेषज्ञता के साथ व्यावसायिक समझ और विवेकपूर्ण निर्णय लेने की क्षमता भी जरूरी है।
इन चर्चाओं में अनंत लॉ सॉलिसिटर्स एंड पार्टनर्स, एपीएसी फाइनेंशियल सर्विसेज, बायोकॉन, केनरा एचएसबीसी लाइफ इंश्योरेंस, सीएमएस इंडसलॉ, फॉक्स मंडल एंड एसोसिएट्स, हुंडई मोटर इंडिया, मास्टरकार्ड सेंड, एसबीआई म्यूचुअल फंड, जेप्टो और अन्य प्रमुख संस्थानों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
कानून और प्रबंधन की एकीकृत शिक्षा में आईआईएम रोहतक की पहचान
आईआईएम रोहतक में वर्तमान में 1,600 से अधिक विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। संस्थान के अनुसार, उसे एएमबीए और बीजीए से मान्यता प्राप्त है तथा क्यूएस वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग में 151+ श्रेणी में स्थान हासिल है।
संस्थान वर्ष 2021 से पांच वर्षीय इंटीग्रेटेड प्रोग्राम इन लॉ (आईपीएल) संचालित कर रहा है। आईआईएम रोहतक के अनुसार, यह कानून और प्रबंधन की एकीकृत शिक्षा प्रदान करने वाला देश का एकमात्र आईआईएम है। इस कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को कानूनी विशेषज्ञता के साथ व्यावसायिक और प्रबंधकीय दृष्टिकोण प्रदान करना है।
लॉ समिट-2026 ने कानून, प्रबंधन और सुशासन के बीच बेहतर तालमेल की आवश्यकता को रेखांकित किया। सम्मेलन में यह संदेश उभरा कि सतत आर्थिक विकास, पारदर्शी प्रशासन, नैतिक नेतृत्व और जनविश्वास एक मजबूत एवं उत्तरदायी व्यवस्था के प्रमुख आधार हैं।
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