एमडीयू में स्किल इकोसिस्टम को मिलेगा नया आयाम
विद्यार्थियों और शिक्षकों की क्षमता निर्माण व अपग्रेडेशन पर विशेष फोकस : कुलपति प्रो. राजबीर सिंह
एमडीयू में स्किल इकोसिस्टम को मिलेगा नया आयाम
विद्यार्थियों और शिक्षकों की क्षमता निर्माण व अपग्रेडेशन पर विशेष फोकस : कुलपति प्रो. राजबीर सिंह
टीएचटी न्यूज, रोहतक :
महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय (एमडीयू), रोहतक अब कौशल आधारित शिक्षा के क्षेत्र में एक नई पहल की ओर बढ़ रहा है। विश्वविद्यालय ने विद्यार्थियों और शिक्षकों की क्षमता निर्माण (capacity building), डिमांड ड्रिवेन स्किल्स और टीचर स्किल अपग्रेडेशन को अपनी प्राथमिकता सूची में शीर्ष पर रखा है। कुलपति प्रो. राजबीर सिंह ने कहा कि एमडीयू का लक्ष्य स्थानीय और राष्ट्रीय स्तर पर एक सशक्त स्किल इकोसिस्टम (Skill Ecosystem) विकसित करना है, जिससे शिक्षा को रोजगार से सीधा जोड़ा जा सके।
कुलपति कार्यालय में आयोजित एक विशेष बैठक की अध्यक्षता करते हुए प्रो. राजबीर सिंह ने कहा कि यह पहल नई शिक्षा नीति (NEP 2020) की भावना के अनुरूप है। उन्होंने कहा कि “एमडीयू विद्यार्थियों और शिक्षकों की स्किल कम्पेटेन्सी को विकसित करने के लिए ठोस कदम उठा रहा है। हमारा उद्देश्य है कि विश्वविद्यालय से निकलने वाला हर विद्यार्थी न केवल डिग्रीधारी हो, बल्कि उसके पास ऐसा कौशल भी हो जो उसे आत्मनिर्भर बनाए और उद्योग जगत की आवश्यकताओं को पूरा कर सके।”
उन्होंने बताया कि इस नई पहल को पहले चरण में यूनिवर्सिटी इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (UIET) में लागू किया जाएगा। दूसरे चरण में इसे विश्वविद्यालय के प्रोफेशनल पाठ्यक्रमों में विस्तारित किया जाएगा, और अंततः सभी विभागों को इस ढांचे से जोड़ा जाएगा।
प्रो. राजबीर सिंह ने कहा कि एमडीयू विद्यार्थियों और शिक्षकों की स्किल डेवलपमेंट क्षमता को बढ़ाने के लिए इंडस्ट्री, स्किल डेवलपमेंट संस्थानों और अन्य संगठनों के साथ समझौता ज्ञापन (MoUs) साइन करेगा। इन साझेदारियों के माध्यम से ट्रेनिंग प्रोग्राम, इंडस्ट्री इंटरफेस सत्र, हैंड्स-ऑन वर्कशॉप्स और स्किल सर्टिफिकेशन कोर्स आयोजित किए जाएंगे।
उन्होंने कहा कि “भविष्य की अर्थव्यवस्था कौशल आधारित होगी। ऐसे में विश्वविद्यालयों का दायित्व है कि वे युवाओं को केवल किताबों तक सीमित न रखें, बल्कि उन्हें जीवन और रोजगार के व्यावहारिक कौशलों से लैस करें।”
बैठक में कुलपति के सलाहकार प्रो. ए. के. राजन ने कहा कि विद्यार्थियों को उद्योग जगत की मांग के अनुरूप तैयार करना समय की आवश्यकता है। उन्होंने सुझाव दिया कि विश्वविद्यालय को ऐसे कोर्स और गतिविधियाँ शुरू करनी चाहिए जो विद्यार्थियों को वास्तविक कार्यक्षेत्र की चुनौतियों के लिए तैयार करें।
आईक्यूएसी निदेशक प्रो. बी. नरसिम्हन, पं. दीनदयाल उपाध्याय सेंटर फॉर स्किल एंड वोकेशनल एजुकेशन के निदेशक प्रो. युद्धवीर, एलुमनाई रिलेशन्स निदेशक प्रो. सुमित गिल, एडीईपी इम्प्लीमेंटेशन नोडल ऑफिसर प्रो. एस. के. तिवारी, और यूआईईटी निदेशक प्रो. अश्वनी ढींगड़ा ने बैठक में अपने सुझाव साझा किए। सभी विशेषज्ञों ने इस बात पर सहमति जताई कि स्किल और शिक्षा का एकीकरण ही आज की सबसे बड़ी आवश्यकता है।
बैठक में यह भी तय किया गया कि विश्वविद्यालय स्थानीय उद्योगों, MSMEs और स्टार्टअप्स के साथ भी साझेदारी करेगा, ताकि विद्यार्थियों को ऑन-साइट लर्निंग, लाइव प्रोजेक्ट्स और इंटर्नशिप के अवसर मिल सकें।
अंत में कुलपति प्रो. राजबीर सिंह ने कहा कि एमडीयू का विज़न केवल शिक्षा देने का नहीं, बल्कि ऐसे नागरिक तैयार करने का है जो समझदार, कुशल और समाज में योगदान देने वाले हों। उन्होंने कहा कि “हमारा प्रयास रहेगा कि एमडीयू को हरियाणा ही नहीं, बल्कि पूरे देश में स्किल इनोवेशन का मॉडल विश्वविद्यालय बनाया जाए।”
इस पहल से उम्मीद की जा रही है कि एमडीयू आने वाले वर्षों में स्किल-ड्रिवन एजुकेशन का केंद्र बनेगा, जहाँ शिक्षण और प्रशिक्षण दोनों का समन्वय होगा और विद्यार्थी आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में अपनी भूमिका निभा सकेंगे।
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