‘आर्थिक आत्मरक्षा’ के लिए राज्यपाल आचार्य देवव्रत की बड़ी पहल
- अब बस और ट्रेन से करेंगे सफर, विश्वविद्यालयों में मनाया जाएगा ‘नो व्हीकल डे’
‘आर्थिक आत्मरक्षा’ के लिए राज्यपाल आचार्य देवव्रत की बड़ी पहल
- अब बस और ट्रेन से करेंगे सफर, विश्वविद्यालयों में मनाया जाएगा ‘नो व्हीकल डे’
ओपी वशिष्ठ, कुरुक्षेत्र, 12 मई।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा ‘आर्थिक आत्मरक्षा’ को लेकर किए गए आह्वान के बाद गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने सादगी और ईंधन बचत को लेकर कई महत्वपूर्ण फैसले लिए हैं। राज्यपाल ने घोषणा की है कि देश में पेट्रोलियम की स्थिति सामान्य होने तक वह राज्य के भीतर यात्रा के लिए हेलीकॉप्टर और हवाई जहाज का उपयोग नहीं करेंगे। इसके बजाय वे ट्रेन, राज्य परिवहन बसों और अन्य सार्वजनिक साधनों से सफर करेंगे। आचार्य देवव्रत हरियाणा के कुरूक्षेत्र में गुरुकुल का संचालन करते हैं। प्राकृतिक खेती को लेकर मिशन चला रहे हैं, जिसमें हजारों किसानों को जागरूक कर प्राकृतिक खेती के लिए प्रेरित कर चुके हैं।
इस संबंध में लोकभवन में आयोजित बैठक में राज्यपाल ने अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ चर्चा करते हुए ईंधन बचत और आत्मनिर्भरता को लेकर विशेष निर्देश जारी किए। बैठक में लोकभवन के वरिष्ठ अधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे।
राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने अपने काफिले में भी न्यूनतम वाहनों के उपयोग के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि अनावश्यक सरकारी वाहनों का इस्तेमाल बंद होना चाहिए, ताकि अधिक से अधिक ईंधन की बचत की जा सके। उन्होंने अपने जेड प्लस सुरक्षा काफिले में भी गाड़ियों की संख्या कम करने का निर्णय लिया है।
इसके साथ ही राज्यपाल ने प्रदेश के सभी विश्वविद्यालयों के कुलपतियों से सप्ताह में कम से कम एक दिन ‘कंबशन इंजन मुक्त दिवस’ मनाने की अपील की है। इस दिन शिक्षक, विद्यार्थी और कर्मचारी पेट्रोल-डीजल वाहनों की जगह साइकिल, इलेक्ट्रिक वाहन या सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करेंगे। लोकभवन में भी सप्ताह में एक दिन ‘नो व्हीकल डे’ मनाने का फैसला लिया गया है।
राज्यपाल ने कहा कि प्रधानमंत्री द्वारा दिए गए सात सूत्रों में ईंधन बचत, स्वदेशी उत्पादों को अपनाना, प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देना और खाद्य तेल की खपत कम करना बेहद महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने कहा कि यह केवल आर्थिक बचत का विषय नहीं, बल्कि राष्ट्रहित और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा मुद्दा है।
उन्होंने कहा कि यदि नागरिक व्यक्तिगत सुविधाओं से ऊपर उठकर ‘राष्ट्र प्रथम’ की भावना के साथ कार्य करें, तो भारत आर्थिक रूप से और अधिक आत्मनिर्भर बन सकता है। राज्यपाल ने लोगों से इस अभियान को जनआंदोलन बनाने की अपील भी की।
-------------