बदलते मौसम के पीछे वैज्ञानिक और मानवीय कारणों का खुलासा, क्लाइमेंट चेंज मुख्य कारण
- एमडीयू के भूगोल विभाग के पूर्व प्रोफेसर डा. महताब सिंह ने दी द हरियाणा टाक्स से विशेष बातचीत
बदलते मौसम के पीछे वैज्ञानिक और मानवीय कारणों का खुलासा, क्लाइमेंट चेंज मुख्य कारण
- एमडीयू के भूगोल विभाग के पूर्व प्रोफेसर डा. महताब सिंह ने दी द हरियाणा टाक्स से विशेष बातचीत
ओपी वशिष्ठ, रोहतक :
औद्योगीकरण, शहरीकरण और वनों की कटाई जैसे कारक पर्यावरण के संतुलन को बिगाड़ रहे हैं। हरियाणा और पंजाब जैसे राज्यों में तेजी से हो रहा शहरी विस्तार और कृषि पद्धतियों में बदलाव भी मौसम की अनिश्चितता को बढ़ा रहे हैं। ग्रीनहाउस गैसों के बढ़ते उत्सर्जन के कारण पृथ्वी का तापमान लगातार बढ़ रहा है, जिससे मौसम चक्र प्रभावित हो रहा है। यह कहना है महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय रोहतक के भूगोल विभाग में पूर्व प्रोफेसर डा. महताब सिंह राणा का। उन्होंने क्लाइमेंट विषय पर द हरियाणा टाक्स से विशेषत बातचीत की।
विश्वविद्यालय के पूर्व प्रोफेसर और भूगोल विशेषज्ञ डा. महताब सिंह हरियाणा और उत्तर भारत में तेजी से बदलते मौसम के पीछे के कारणों को वैज्ञानिक दृष्टिकोण से समझाया गया। डॉ. मेहताब सिंह ने बताया कि बीते कुछ वर्षों में मौसम के पैटर्न में असामान्य बदलाव देखने को मिले हैं। असमय बारिश, अचानक आंधी-तूफान और तापमान में तेजी से उतार-चढ़ाव अब सामान्य होता जा रहा है। उन्होंने कहा कि यह बदलाव केवल प्राकृतिक कारणों से नहीं, बल्कि मानवीय गतिविधियों के कारण भी तेजी से बढ़ रहा है।
डॉ. सिंह ने असमय बारिश और तूफानों के पीछे के विज्ञान को भी सरल भाषा में समझाया। उन्होंने बताया कि वातावरण में नमी और तापमान के असंतुलन के कारण अचानक मौसम में बदलाव आता है, जिससे तेज आंधी और भारी बारिश जैसी घटनाएं बढ़ रही हैं। यह स्थिति किसानों के लिए विशेष रूप से चिंता का विषय है, क्योंकि इससे फसलों को भारी नुकसान होता है।
खास बातें
हरियाणा और उत्तर भारत में मौसम तेजी से हो रहा है अनिश्चित
असमय बारिश और आंधी-तूफान की घटनाओं में वृद्धि
जलवायु परिवर्तन के पीछे मानवीय गतिविधियों की बड़ी भूमिका
औद्योगीकरण, शहरीकरण और वनों की कटाई प्रमुख कारण
ग्रीनहाउस गैसों से बढ़ रहा वैश्विक तापमान
किसानों और आम जनजीवन पर बढ़ता प्रभाव
चर्चा के दौरान यह भी जोर दिया गया कि यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो भविष्य में स्थिति और गंभीर हो सकती है। डॉ. मेहताब सिंह ने कहा कि व्यक्तिगत स्तर पर छोटे-छोटे प्रयास, जैसे पेड़ लगाना, ऊर्जा की बचत करना और पर्यावरण के प्रति जागरूक रहना, बड़े बदलाव ला सकते हैं।
यह संवाद न केवल वैज्ञानिक जानकारी प्रदान करता है, बल्कि समाज को यह सोचने पर भी मजबूर करता है कि पर्यावरण संरक्षण के लिए हर व्यक्ति की भूमिका कितनी महत्वपूर्ण है। विश्वविद्यालय स्तर पर इस तरह की चर्चाएं युवाओं को जागरूक बनाने में अहम भूमिका निभाती हैं।
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