रोहतक के शहीद स्क्वाड्रन लीडर लोकेंद्र सिंधु को अंतिम विदाई

- राजस्थान के चुरु में जगुआर ट्रेनर जेट हुआ था दुर्घटनाग्रस्त

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रोहतक के शहीद स्क्वाड्रन लीडर लोकेंद्र सिंधु को अंतिम विदाई

रोहतक के शहीद स्क्वाड्रन लीडर लोकेंद्र सिंधु को अंतिम विदाई

- राजस्थान के चुरु में जगुआर ट्रेनर जेट हुआ था दुर्घटनाग्रस्त

टीएचटी न्यूज, रोहतक :

राजस्थान के चूरू में दुर्घटनाग्रस्त हुए जगुआर ट्रेनर जेट के पायलट स्क्वाड्रन लीडर लोकेंद्र सिंधु (32) का पार्थिव शरीर वीरवार दोपहर लगभग 3 बजे रोहतक पहुंचा। शीला बाईपास के पास रामबाग श्मशान घाट में उनका सैन्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया।

दुर्घटना कैसे हुई

9 जुलाई की सुबह प्रशिक्षण उड़ान के दौरान दो सीट वाले जगुआर में तकनीकी गड़बड़ी आने के बाद विमान 500 फीट से भी नीचे आ गया। प्रशिक्षक की सीट पर बैठे लोकेंद्र ने बस्ती से दूर खुले क्षेत्र की ओर विमान मोड़ा, पर अत्यधिक कम ऊंचाई के कारण जेट को दोबारा उठाया नहीं जा सका। मौके पर ही दोनों पायलट शहीद हो गए। भारतीय वायुसेना ने कोर्ट ऑफ इन्क्वायरी के आदेश दिए हैं।

एक महीने पहले बने थे पिता

10 जून 2025 को लोकेंद्र के बेटे का जन्म हुआ था। पितृत्व अवकाश के बाद वे 30 जून को ड्यूटी पर लौटे। हादसे से कुछ घंटे पहले उन्होंने परिवार के व्हाट्सऐप समूह में बेटे की तस्वीरें साझा कीं और अपने पिता से बात की थी।

करियर और बहादुरी

खैरी साध गांव में 9 नवंबर 1992 को जन्मे लोकेंद्र ने 2010 में पहले ही प्रयास में एनडीए परीक्षा उत्तीर्ण की। तीन वर्ष की एनडीए और एक वर्ष की बेंगलुरु प्रशिक्षण के बाद 2015 में वायुसेना में कमीशन मिला। अधिकांश समय वे एकल सीट वाले जगुआर उड़ाते रहे। पूर्व में उड़ान के दौरान कैनोपी उड़ जाने पर भी उन्होंने विमान को सुरक्षित उतारा था, जिससे उनकी दक्षता और साहस की प्रशंसा हुई।

परिवार में वायुसेना का जज्बा

2020 में उनकी शादी डॉ. सुरभि से हुई। बड़ी बहन अंशी वायुसेना में विंग कमांडर के पद से सेवानिवृत्त हो चुकी हैं, जबकि बहनोई अभी सक्रिय सेवा में हैं। माँ अनीता देवी हाल ही में सरकारी सेवा से सेवानिवृत्त हुई हैं।

कर्तव्य सर्वोपरि

वायुसेना के आदर्श—पहले विमान, फिर नागरिक, अंत में स्वयं—को निभाते हुए लोकेंद्र ने अपनी जान की चिंता किए बिना विमान को आबादी से दूर ले जाने का प्रयास किया। रोहतक आज अपने इस वीर सपूत को नम आंखों से विदाई देगा, जिसकी शहादत आने वाली पीढ़ियों को कर्तव्य और साहस का अर्थ सिखाती रहेगी।

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