हरियाणा राज्यसभा चुनाव: कांग्रेस ने कर्मवीर बौद्ध को बनाया उम्मीदवार, BJP ने संजय भाटिया पर लगाया दांव
- कांग्रेस से ओबीसी समाज की नाराजगी, ओबीसी मोर्चा के प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष तेलूराम ने छोड़ी कांग्रेस
हरियाणा राज्यसभा चुनाव: कांग्रेस ने कर्मवीर बौद्ध को बनाया उम्मीदवार, BJP ने संजय भाटिया पर लगाया दांव
- कांग्रेस से ओबीसी समाज की नाराजगी, ओबीसी मोर्चा के प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष तेलूराम ने छोड़ी कांग्रेस
ओपी वशिष्ठ, रोहतक :
हरियाणा में राज्यसभा चुनाव को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। कांग्रेस ने कर्मवीर सिंह बौद्ध को राज्यसभा का उम्मीदवार बनाया है। बताया जा रहा है कि उनका नाम राहुल गांधी की सिफारिश पर तय किया गया। वहीं भारतीय जनता पार्टी ने पूर्व सांसद संजय भाटिया को अपना प्रत्याशी बनाया है।
राज्यसभा चुनाव के लिए गुरुवार को नामांकन दाखिल करने का अंतिम दिन है। यदि कांग्रेस और भाजपा की ओर से एक-एक उम्मीदवार ही मैदान में रहते हैं तो दोनों उम्मीदवारों का निर्विरोध चुना जाना लगभग तय माना जा रहा है। हालांकि किसी तीसरे उम्मीदवार के मैदान में उतरने की स्थिति में 16 मार्च को मतदान कराया जाएगा।
कांग्रेस में OBC नेताओं की नाराजगी की चर्चा
कांग्रेस द्वारा कर्मवीर बौद्ध को उम्मीदवार बनाए जाने के बाद पार्टी के अंदर ओबीसी नेताओं में नाराजगी की चर्चा शुरू हो गई है। कांग्रेस के एक धड़े की मांग थी कि टिकट महेंद्रगढ़ के पूर्व विधायक राव दान सिंह को दिया जाए।
बताया जा रहा है कि इसी मुद्दे को लेकर कांग्रेस के ओबीसी मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष तेलूराम जांगड़ा ने इस्तीफा दे दिया।
कांग्रेस ने पहले ही तय कर लिया था कि इस बार राज्यसभा के लिए अनुसूचित जाति वर्ग से उम्मीदवार उतारा जाएगा। इस सूची में कर्मवीर बौद्ध के अलावा पूर्व प्रदेश अध्यक्ष उदय भान, पूर्व विधायक जयवीर वाल्मीकि और पूर्व सांसद अशोक तंवर के नाम भी चर्चा में थे। अंततः पार्टी नेतृत्व ने कर्मवीर बौद्ध के नाम पर मुहर लगा दी।
कौन हैं कर्मवीर सिंह बौद्ध
कर्मवीर सिंह बौद्ध मूल रूप से अंबाला के रहने वाले हैं और हरियाणा सिविल सचिवालय से प्रशासनिक अधिकारी (एडीओ) के पद से करीब चार साल पहले सेवानिवृत्त हुए हैं। सचिवालय में वे खरीद-फरोख्त और केयरटेकर से जुड़े कार्यों को देखते थे।
बताया जाता है कि एक विवाद के बाद उन्हें सस्पेंड भी किया गया था, जिसके चलते उन्हें आगे प्रमोशन नहीं मिल पाया और वे एडीओ पद से ही सेवानिवृत्त हुए।
राजनीतिक रूप से उन्हें किसी भी गुट से अलग और संतुलित चेहरा माना जाता है। वे संविधान बचाओ अभियान में सक्रिय रहे हैं और कई सामाजिक मुद्दों पर आवाज उठाते रहे हैं। पिछले वर्ष चर्चा में रहे आईपीएस वाई. पूरन कुमार सुसाइड केस में हुए आंदोलन में भी उनका नाम सामने आया था।
भाजपा का दांव: संजय भाटिया
भाजपा ने राज्यसभा चुनाव के लिए पूर्व सांसद संजय भाटिया को उम्मीदवार बनाया है। संजय भाटिया पानीपत के मॉडल टाउन के रहने वाले हैं और छात्र जीवन से ही एबीवीपी के माध्यम से भाजपा से जुड़े रहे हैं।
उन्होंने आईबी कॉलेज, पानीपत से बीकॉम की पढ़ाई की और इसके बाद संगठन में लगातार सक्रिय रहे।
2019 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने करनाल से सांसद का चुनाव जीता था। उनकी जीत का अंतर देश में दूसरे नंबर पर रहा था। उन्हें उस चुनाव में 9 लाख से अधिक वोट मिले थे।
हालांकि 2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने करनाल सीट से मनोहर लाल खट्टर को उम्मीदवार बनाया और संजय भाटिया का टिकट काट दिया गया। इसके बाद से वे संगठनात्मक गतिविधियों में सक्रिय थे।
राज्यसभा चुनाव का गणित
हरियाणा विधानसभा में कुल 90 विधायक हैं। इनमें
भाजपा – 48
कांग्रेस – 37
निर्दलीय – 3
इनेलो – 2
राज्यसभा की दो सीटों के लिए जीत का कोटा 31 वोट तय होता है।
इस गणित के अनुसार भाजपा अपने उम्मीदवार को आसानी से 31 वोट दिला सकती है, जबकि कांग्रेस के पास भी अपने उम्मीदवार को जिताने के लिए पर्याप्त संख्या है। ऐसे में यदि दोनों दल एक-एक उम्मीदवार ही उतारते हैं तो दोनों सीटें निर्विरोध तय हो सकती हैं।
निर्दलीय उम्मीदवार उतरा तो मुकाबला हो सकता है दिलचस्प
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि अगर कोई निर्दलीय उम्मीदवार मैदान में उतरता है तो मुकाबला रोचक हो सकता है। संभावित नामों में राव दान सिंह और गोपाल कांडा का जिक्र किया जा रहा है।
हालांकि ऐसी स्थिति में भी जीत के लिए क्रॉस वोटिंग की जरूरत पड़ेगी, क्योंकि किसी भी तीसरे उम्मीदवार के लिए 31 वोट जुटाना आसान नहीं होगा।
चुनाव आयोग ने की तैयारियां
राज्यसभा चुनाव के लिए चुनाव आयोग ने नोटिफिकेशन जारी कर दिया है।
हरियाणा के आईएएस अधिकारी पंकज अग्रवाल को रिटर्निंग ऑफिसर बनाया गया है, जबकि हरियाणा विधानसभा के डिप्टी सेक्रेटरी गौरव गोयल को असिस्टेंट रिटर्निंग ऑफिसर की जिम्मेदारी दी गई है।
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