हाय हैंडसम नाटक दिया समाज को कड़ा संदेश

- घरफूंक थियेटर सीरीज में हुआ नाटक का मंचन

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हाय हैंडसम नाटक दिया समाज को कड़ा संदेश

हाय हैंडसम नाटक दिया समाज को कड़ा संदेश

- घरफूंक थियेटर सीरीज में हुआ नाटक का मंचन

टीएचटी न्यूज, रोहतक :

सप्तक द्वारा पठानिया वर्ल्ड कैंपस के सहयोग से आयोजित घरफूंक थियेटर सीरीज में इस बार नाटककार जयवर्धन द्वारा लिखित हास्य नाटक 'हाय हैंडसम' का सफल मंचन किया गया। सोसर्ग स्टूडियो में दिल्ली की क्रिएटिव आर्ट ग्रुप सोसायटी की ओर से शशांक साशा द्वारा निर्देशित यह नाटक जीवन का सार समझाता है कि बुढ़ापे में एक व्यक्ति को अपना अकेलापन दूर करने के लिए एक साथी की जरूरत होती है। ऐसा साथी, जो उसकी बात सुने और अपनी कहे, क्योंकि बच्चे अपनी जिंदगी में व्यस्त होने के कारण अक्सर अपने बूढ़े माता-पिता को भूल जाते हैं।

हास्य-व्यंग्य अौर दिल को छू गया नाटक

बुजुर्गों की भावनात्मक जरूरतों को दर्शाने वाला नाटक 'हाय हैंडसम' हास्य-व्यंग्य से भरपूर और दिल को छू लेने वाला है। नाटक की कहानी कर्नल कपूर के इर्द-गिर्द घूमती है, जो एक उत्साही और अकेला सेवानिवृत्त सेना अधिकारी है और दादा बनने की खुशी के लिए तरसता है। वह अपने बेटे और बहू से परिवार शुरू करने का आग्रह करता है, लेकिन उसकी उम्मीदें बार-बार धराशायी हो जाती हैं क्योंकि उसकी बहू मातृत्व की तुलना में अपने मॉडलिंग करियर पर अधिक ध्यान केंद्रित करती है और बेटा कायर होने के साथ-साथ मूर्ख भी है तथा सारा समय पूजा-पाठ में लगा रहता है।

पारिवारिक तनाव से निकल सकते हैं बाहर

इस पारिवारिक तनाव के बीच, कपूर की मुलाकात सीता देवी से होती है, जो उनकी समधन है और अपने जीवन के अंतिम वर्षों में भी एक सुंदर और अकेली महिला है। उन दोनों की दोस्ती एक सामान्य रिश्ते के रूप में शुरू होने के बाद एक ऐसे गहरे बंधन में बदल जाती है, जो अक्सर वरिष्ठ नागरिकों के भावनात्मक जीवन को नकारने वाले सामाजिक मानदंडों को चुनौती देता है। उनकी बढ़ती हुई निकटता परिवार के भीतर हास्य, भ्रम और अंततः समझ का स्रोत बन जाती है। नाटक में राहुल भाटिया ने कर्नल कपूर (कर्नल), शशांक साशा ने स्वामी (बेटा), अंजली लोहिया ने मंदा (बहु), गौरी भारद्वाज ने सीता (समधन) और अक्की सिंह ने कमाल (नौकर) की भूमिकाओं को साकार किया। सभी ने अपने जीवंत अभिनय से दर्शकों की खूब दाद बटोरी।

मजाकिया संवादों और प्यारे पलों के ज़रिए, हाय हैंडसम एक मज़बूत संदेश देता है कि प्यार, साथ और भावनात्मक संतुष्टि इंसान की अंतहीन ज़रूरतें हैं जो किसी खास उम्र की मोहताज नहीं होतीं। यह नाटक दर्शकों को यह सोचने के लिए भी प्रेरित करता है कि हम अपने बुज़ुर्गों के साथ कैसा व्यवहार करते हैं। यह एक मनोरंजक लेकिन विचारोत्तेजक प्रस्तुति थी जो दर्शकों के मानसपटल पर एक स्थायी छाप छोड़ने में सफल रही। नाटक ने न केवल लोगों को खूब हँसाया, बल्कि उन्हें बुजुर्गों की मनोस्थिति के बारे में भी बखूबी अवगत करवाया।

इस अवसर पर घरफूंक थिएटर सीरीज के क्रिएटर विश्वदीपक त्रिखा, सप्तक के अध्यक्ष अविनाश सैनी, मशहूर नगाड़ा वादक सुभाष नगाड़ा, कपिल सहगल, आशीष नेहरा, प्रदीप चाहर, अनिल सैनी, पंकज शर्मा, शक्ति सरोवर त्रिखा, पवन गहलौत, विकास रोहिल्ला, ललित शर्मा, राहुल हुड्डा, जगदीप सिंह, पूनम सिंह, हरदीप सिंह, अमित शर्मा सहित अनेक नाटक प्रेमी उपस्थित रहे।

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