राष्ट्रीय एकता शिविर में देशभक्ति और सांस्कृतिक उल्लास से सराबोर रहा एमडीयू परिसर

– चौथे दिन खेलकूद, सीपीआर प्रशिक्षण और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने बढ़ाया उत्साह

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राष्ट्रीय एकता शिविर में देशभक्ति और सांस्कृतिक उल्लास से सराबोर रहा एमडीयू परिसर

राष्ट्रीय एकता शिविर में देशभक्ति और सांस्कृतिक उल्लास से सराबोर रहा एमडीयू परिसर
– चौथे दिन खेलकूद, सीपीआर प्रशिक्षण और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने बढ़ाया उत्साह

टीएचटी न्यूज, रोहतक।

महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय (एमडीयू) में जारी सात दिवसीय राष्ट्रीय एकीकरण शिविर का चौथा दिन देशभक्ति, ऊर्जा और सांस्कृतिक विविधता के रंगों से सराबोर रहा। यह शिविर विश्वविद्यालय के राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) प्रकोष्ठ और राज्य एनएसएस प्रकोष्ठ, उच्चतर शिक्षा विभाग, हरियाणा के संयुक्त तत्वावधान में कुलपति प्रो. राजबीर सिंह के मार्गदर्शन तथा एनएसएस कार्यक्रम समन्वयक प्रो. सविता राठी के संयोजन में आयोजित किया जा रहा है।

दिन की शुरुआत प्रभात फेरी से हुई, जिसमें विभिन्न राज्यों से आए स्वयंसेवकों ने देशभक्ति गीतों के साथ पूरे परिसर को देश प्रेम की भावना से गुंजा दिया। इसके बाद रस्साकशी, नींबू दौड़ और 100 मीटर दौड़ जैसी रोमांचक खेल प्रतियोगिताओं ने प्रतिभागियों में उत्साह और जोश भर दिया।

शिविर के दौरान सीपीआर (Cardiopulmonary Resuscitation) पर एक महत्वपूर्ण प्रशिक्षण सत्र आयोजित किया गया। सत्र का संचालन सेवानिवृत्त सूबेदार मेजर राजबीर सिंह ने किया, जिन्होंने स्वयंसेवकों को आपातकालीन परिस्थितियों में जीवनरक्षक तकनीकों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि हृदयाघात, सड़क दुर्घटना या आकस्मिक स्थितियों में सीपीआर का त्वरित उपयोग किसी की जान बचा सकता है।

दोपहर के सत्र में एनएसएस नेशनल अवार्डी नेहा गुलिया ने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि एनएसएस केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि सेवा, अनुशासन और समर्पण का संस्कार है। उन्होंने बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ, स्वच्छ भारत अभियान और नशा मुक्त हरियाणा जैसे अभियानों में अपनी सक्रिय भूमिका साझा करते हुए युवाओं से समाज परिवर्तन में योगदान देने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि “छोटे प्रयास भी बड़े बदलाव की नींव रख सकते हैं।”

विश्वविद्यालय की सीसीपीसी निदेशक प्रो. दिव्या मल्हान ने भी एक सत्र में स्वयंसेवकों को व्यक्तित्व विकास और करियर निर्माण से जुड़े प्रेरक सुझाव दिए।

शाम के सांस्कृतिक सत्र में ओडिशा और पश्चिम बंगाल की टीमों ने अपनी पारंपरिक लोकनृत्य प्रस्तुतियों से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। इन प्रस्तुतियों ने भारत की विविधता में एकता की भावना को सजीव रूप में प्रदर्शित किया।

दिनभर चले इस आयोजन ने एमडीयू परिसर को राष्ट्रीय चेतना, अनुशासन और सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना से ओतप्रोत कर दिया। कार्यक्रम का समापन समीक्षा बैठक और आगामी प्रतियोगिताओं की तैयारियों के साथ हुआ।

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