हरियाणा के आइएएस अशोक खेमका का अब नहीं होगा तबादला
- तबादलों को लेकर चर्चा में रहे हैं अशोक खेमका, 30 अप्रैल हो हुए रिटायर
हरियाणा के आइएएस अशोक खेमका का अब नहीं होगा तबादला
- तबादलों को लेकर चर्चा में रहे हैं अशोक खेमका, 30 अप्रैल हो हुए रिटायर
- पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा और राबर्ट वाड्रा के लिए खड़ी कर चुके हैं मुसीबत
ओपी वशिष्ठ, रोहतक :
हरियाणा के चर्चित अाईएएस अशोक खेमका 30 अप्रैल को रिटायर हो गए हैं। हमेशा विवादों में रहने वाले इस आईएएस का करीब 60 बार सेवा के दौरान तबादला हुआ। हरियाण कैडर के ही सीनियर आईएएस संजीव वर्मा के साथ भी उनका लंबे समय से छत्तीस का आंकड़ा रहा है। गुरुग्राम में डीएलएफ विवादित भूमि सौदे में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा और राबर्ट वार्डा के लिए भी बड़ी मुसीबत खड़ी खेमका ने ही की थी क्योंकि उन्होंने ही इस मामले को उजागर किया था। खेमका का जन्म भारत के पूर्वोत्तर राज्य बंगाल की राजधानी कोलकाता में हुआ था। उन्होंने 1988 में प्रौद्योगिकी खड़गपुर के भारतीय संस्थान से स्नातक और टाटा मूलभूत अनुसंधान संस्थान,मुंबई से कंप्यूटर साइंस में पीएचडी और एमबीए की पढ़ाई की है।
डीएलएफ भूमि विवाद में अाए थे सुर्खियों में खेमका
आईएएस अशोक खेमका ने तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा की सरकार में चकबंदी निदेशक रहते हुए गुरुग्राम में डीएलएफ और राबर्ट वाड्रा के बीच हुए भूमि सौदे की म्युटेशन रद करने के आदेश दिए थे। इसके बाद से ही हुड्डा और वाड्रा की मुश्किलें शुरू हुईं थी, जो अब भी प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की जांच का सामना कर रहे हैं। इसके अलावा बीज घोटाला भी खेमका ने ही उजागर किया।
बृजभूषण और पहलवानों के विवाद में एंट्री
जनवरी 2023 में हरियाणा के पहलवानों और भारतीय कुश्ती महासंघ के पूर्व अध्यक्ष एवं पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह के बीच विवाद में भी अशोक खेमका कूद पड़े थे। अशोक खेमका ने एक्स हैंडल पर पहलवानों के समर्थन में पोस्ट डाली थी। जिसमें उन्होंने बृजभूषण की गिरफ्तारी और इस्तीफे की मांग करने के साथ हरियाणा के पहलवानों को सच्चा नायक बताया था।
तबादलों को लेकर चर्चा में रहे हैं अशोक खेमका
1991 बैच के आईएएस अधिकारी खेमका को साहसी फैसलों के लिए जाना जाता है। पूरी सेवा के दौरान औसतन हर छह माह में उनका विभाग बदला गया। खेमका अभी परिवहन विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव (एसीएस) की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। 34 वर्ष के सेवाकाल में 57 बार उनको तबादला किय गया।
आईएएस संजीव वर्मा से रहा छत्तीस का आंकड़ा
अप्रैल 2022 में दो आईएएस अधिकारियों के बीच विवाद काफी चर्चित रहा था। हरियाणा राज्य भंडारण निगम (एचएसडब्ल्यूसी) के तत्कालीन प्रबंध निदेशक (एमडी) संजीव वर्मा ने एक दशक से अधिक समय पहले खेमका के कार्यकाल में एचएसडब्ल्यूसी में हुई नियुक्तियों में कथित अनियमितताओं के लिए खेमका समेत तीन अधिकारियों के खिलाफ मामला दर्ज करने के लिए शिकायत भेजी थी। 2010 में खेमका के प्रबंध निदेशक रहते समय दो प्रबंधक ग्रेड-1 अधिकारी प्रदीप कुमार और सुरिंदर सिंह की भर्ती की थी। मामला पुलिस को सौंपे जाने से पहले वर्मा ने 20 अप्रैल को प्रदीप और सुरिंदर को बर्खास्त कर दिया। इसके बाद एसीएस स्तर के अधिकारी खेमका ने वर्मा के खिलाफ अपनी शिकायत में वर्मा और रविंदर पर उनके खिलाफ साजिश रचने का आरोप लगाया था।
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