“अल फलाह यूनिवर्सिटी से दिल्ली ब्लास्ट तक – जांच की परतें खोल रही बड़ी साजिश?”
- रोहतक की डा. प्रियंका शर्मा से भी की गई पूछताछ, अनंतनाग में कर रही एमडी
“अल फलाह यूनिवर्सिटी से दिल्ली ब्लास्ट तक – जांच की परतें खोल रही बड़ी साजिश?”
- रोहतक की डा. प्रियंका शर्मा से भी की गई पूछताछ, अनंतनाग में कर रही एमडी
टीएचटी न्यूज, दिल्ली
फरीदाबाद स्थित अल फलाह यूनिवर्सिटी (Al Falah University) एक बार फिर सवालों के घेरे में है। दिल्ली के लाल किला मेट्रो स्टेशन के पास 10 नवंबर 2025 को हुए बम विस्फोट के बाद, जांच एजेंसियों ने अपनी पड़ताल को हरियाणा और दिल्ली की सीमाओं तक बढ़ा दिया है। इस विस्फोट में 13 लोगों की मौत हुई थी और घटना की जिम्मेदारी एक आतंकी मॉड्यूल से जुड़ी मानी जा रही है। अब इसी केस की कड़ी अल फलाह यूनिवर्सिटी, उसके ट्रस्ट और कुछ फैकल्टी सदस्यों तक पहुंच रही है।
ED और NIA की बड़े पैमाने पर छापेमारी
सोमवार सुबह 5 बजे से ईडी और एनआईए की संयुक्त टीमों ने दिल्ली, हरियाणा, मध्य प्रदेश और जम्मू-कश्मीर में लगभग 30 ठिकानों पर छापेमारी की। फरीदाबाद स्थित अल फलाह यूनिवर्सिटी का परिसर, ओखला में ट्रस्ट का ऑफिस, चेयरमैन जवाद अहमद के महू स्थित पुराने घर सहित कई स्थानों की तलाशी ली गई। ईडी पहले से ही अल फलाह चैरिटेबल ट्रस्ट पर वित्तीय अनियमितताओं और संदिग्ध फंडिंग की जांच कर रही थी। एजेंसियों के अनुसार, दो संदिग्धों की गिरफ्तारी के बाद कुछ डिजिटल ट्रेल सामने आए, जो विश्वविद्यालय के कुछ कर्मचारियों और शोधार्थियों से होते हुए एक बड़े नेटवर्क की तरफ इशारा करते हैं।
अल फलाह यूनिवर्सिटी: इतिहास और पृष्ठभूमि
2014 में स्थापित, अल फलाह यूनिवर्सिटी Mewat–Faridabad बेल्ट में एक प्रमुख निजी विश्वविद्यालय है। इसे अल फलाह चैरिटेबल ट्रस्ट संचालित करता है, जिसके चेयरमैन जवाद अहमद और कुछ ट्रस्टी पहले भी आय स्रोतों और फंडिंग को लेकर जांच के दायरे में रहे हैं। यूनिवर्सिटी ने विस्फोट में किसी भी प्रत्यक्ष जुड़ाव से इनकार किया है, लेकिन जांच एजेंसियों के अनुसार, “कुछ फैकल्टी और स्टाफ के डिजिटल रिकॉर्ड की तुलना आवश्यक” है।
Delhi Blast Link – डॉक्टरों का मॉड्यूल से कनेक्शन
एनआईए की जांच में सामने आया कि इस ब्लास्ट मॉड्यूल में शामिल दो व्यक्ति डॉक्टर थे। इनमें से एक डॉ. उमर, अल फलाह यूनिवर्सिटी में कुछ समय प्रोफेसर रहा था। हालांकि यूनिवर्सिटी के प्रशासन ने इस संबंध को “भ्रामक और असत्य” बताया है। इसी कड़ी में RDX की “सप्लाई लाइन” ने एजेंसियों को चौंकाया है। शुरुआती रिपोर्टों के अनुसार, विस्फोटक सामग्री Mewat → Faridabad → Jammu & Kashmir रूट से होकर गई। जम्मू-कश्मीर में असेंबली के दौरान हुए विस्फोट को “तकनीकी दुर्घटना” बताया गया, लेकिन इसका संबंध मॉड्यूल से जुड़ा माना जा रहा है।
रोहतक की मेडिकल छात्रा प्रियंका शर्मा भी जांच के दायरे में
इस केस ने तब और तूल पकड़ा जब रोहतक निवासी और अनंतनाग में MBBS कर रही डॉ. प्रियंका शर्मा को काउंटर-इंटेलिजेंस ने पूछताछ के लिए रोका। वह ऐसे घर में रह रही थी, जहाँ के मालिक का संबंध आरोपी उमर नबी के एक सहयोगी से पाया गया। परिवार ने इस आरोप को “पूरी तरह गलत और प्रतिष्ठा पर आघात” बताया है। वहीं एजेंसियों का कहना है कि “सिर्फ डिजिटल मिलान और लोकेशन ट्रैकिंग की प्रक्रिया चल रही है।”
ट्रस्टीज़ से पूछताछ, छात्रों के डिवाइसेज़ जब्त
ईडी और एनआईए ने यूनिवर्सिटी के कुछ ट्रस्टीज़ को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। छात्रों और फैकल्टी के लैपटॉप, मोबाइल, सर्वर बैकअप और कॉल डिटेल रिकॉर्ड जब्त कर जांच की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि शिक्षा संस्थानों का दुरुपयोग होता रहा है और यह केस “नेटवर्क आधारित मॉडल” को समझने में महत्वपूर्ण है।
निष्कर्ष
अल फलाह यूनिवर्सिटी का मामला अब केवल एक अकादमिक संस्थान का विवाद नहीं रहा—यह दिल्ली ब्लास्ट, RDX ट्रेल और बहु-राज्य नेटवर्क की जांच के केंद्र में आ चुका है। अभी जांच जारी है और आने वाले दिनों में कई और अहम खुलासों की उम्मीद है।
TheHaryana.com इस केस की हर अपडेट पाठकों तक पहुंचाता रहेगा।
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