कांग्रेस में ‘फोटो चोरी’ विवाद: सैलजा–हुड्डा गुटों के टकराव से हरियाणा की राजनीति में नई हलचल

- हिसार में कुमारी सैलजा तथा सिरसा में भूपेंद्र हुड्डा और दीपेंद्र हुड्डा के फोटो पोस्टर से गायब

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कांग्रेस में ‘फोटो चोरी’ विवाद: सैलजा–हुड्डा गुटों के टकराव से हरियाणा की राजनीति में नई हलचल

कांग्रेस में ‘फोटो चोरी’ विवाद: सैलजा–हुड्डा गुटों के टकराव से हरियाणा की राजनीति में नई हलचल

- हिसार में कुमारी सैलजा तथा सिरसा में भूपेंद्र हुड्डा और दीपेंद्र हुड्डा के फोटो पोस्टर से गायब

ओपी वशिष्ठ, रोहतक :

हरियाणा कांग्रेस हाल के दिनों में जिस आंतरिक तनाव से गुजर रही है, वह अब खुलकर सतह पर आ गया है। पूरे देश में जहां कांग्रेस “वोट चोरी” मुद्दे को लेकर सरकार पर हमलावर है, वहीं हरियाणा में पार्टी खुद अपने पोस्टरों को लेकर दो बड़े गुटों—सैलजा गुट और हुड्डा गुट—के बीच सीधी भिड़ंत में फंसी हुई दिख रही है। मामला इतना बढ़ गया है कि अब इसका असर जिला स्तर से लेकर प्रदेश नेतृत्व तक स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है।

ताज़ा विवाद उस समय शुरू हुआ जब सिरसा में आयोजित होने वाले “वोट चोर – गद्दी छोड़” अभियान के पोस्टरों में कांग्रेस की नेशनल जनरल सेक्रेटरी और सिरसा सांसद कुमारी सैलजा ने पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा और उनके बेटे दीपेंद्र हुड्डा की तस्वीरें शामिल नहीं कीं। यह कदम चौंकाने वाला इसलिए माना गया क्योंकि पार्टी हाईकमान की ओर से चल रहे अभियान के तहत 11 शीर्ष नेताओं की तस्वीरें पोस्टरों में लगाना अनिवार्य बताया गया है। इनमें सोनिया गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे, राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा, प्रदेश अध्यक्ष राव नरेंद्र सिंह, भूपेंद्र हुड्डा, दीपेंद्र हुड्डा, कुमारी सैलजा और अन्य वरिष्ठ नेता शामिल हैं।

सैलजा के इस निर्णय ने सिरसा कांग्रेस में हलचल मचा दी। खासकर इसलिए भी कि सिरसा जिले के तीन विधायकों में से दो—भरत सिंह बेनीवाल और शीशपाल केहरवाला—हुड्डा समर्थक माने जाते हैं। ऐसे में सैलजा गुट के पोस्टरों से हुड्डा परिवार की गैरमौजूदगी को शक्ति-प्रदर्शन के रूप में देखा जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम सिरसा में प्रभाव क्षेत्र को परिभाषित करने और आगामी राजनीतिक समीकरणों को मजबूत करने की कोशिश हो सकता है।

यह विवाद तब और बढ़ गया जब इससे पहले हिसार में हुए कांग्रेस प्रदर्शन के दौरान तीन विधायकों—आदमपुर के चंद्रप्रकाश, नारनौंद के जस्सी पेटवाड़ और उकलाना के नरेश सेलवाल—ने अपने पोस्टरों में कुमारी सैलजा की तस्वीर शामिल नहीं की थी। सैलजा समर्थकों ने इसे जानबूझकर किया गया अपमान बताया और इसकी शिकायत प्रदेश अध्यक्ष राव नरेंद्र सिंह और अनुशासन समिति के चेयरमैन धर्मपाल मलिक को भेजी।

अब दोनों मामलों की सुनवाई 22 नवंबर को अंबाला में होगी, जहां अनुशासन समिति इन्हें विस्तार से सुनेगी। हालांकि, यह समिति केवल प्रदेश स्तर के नेताओं—जैसे विधायक या पदाधिकारियों—पर कार्रवाई कर सकती है। सांसदों या राष्ट्रीय पदाधिकारियों से जुड़े मामलों में समिति केवल रिपोर्ट बनाकर हाईकमान को भेज सकती है। ऐसे में सैलजा द्वारा हुड्डा पिता-पुत्र की तस्वीर हटाने पर क्या निर्णय होगा, यह अभी स्पष्ट नहीं है।

इन घटनाओं की श्रृंखला ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या हरियाणा कांग्रेस में गुटबाज़ी अब खुले टकराव में बदल रही है। पार्टी का जनाधार पहले से चुनौतियों का सामना कर रहा है और ऐसे विवाद संगठनात्मक एकता को कमज़ोर करते हैं। जहां हुड्डा गुट लंबे समय से हरियाणा कांग्रेस का सबसे प्रभावशाली धड़ा रहा है, वहीं सैलजा गुट लगातार अपने राजनीतिक प्रभाव को पुनर्स्थापित करने की कोशिश में है।

अब नज़रें 22 नवंबर की अनुशासन समिति बैठक पर टिकी हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि पार्टी हाईकमान इस अंदरूनी खींचतान को कैसे नियंत्रित करता है और हरियाणा में कांग्रेस किस दिशा में आगे बढ़ती है। फिलहाल इतना स्पष्ट है कि “वोट चोरी” के मुद्दे पर सरकार को घेरने निकली कांग्रेस खुद “फोटो चोरी” की लड़ाई में उलझ गई है।

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