MDU Rohtak की सुरक्षा ? बुलेटप्रूफ स्कॉर्पियो, फायरिंग और ड्रग्स का सच
सुरक्षा संकट गहराया, छात्राओं की सुरक्षा पर गंभीर सवाल
MDU Rohtak की सुरक्षा ? बुलेटप्रूफ स्कॉर्पियो, फायरिंग और ड्रग्स का सच
- सुरक्षा संकट गहराया, छात्राओं की सुरक्षा पर गंभीर सवाल
- विश्वविद्यालय की छात्र नेता निशा राणा ने बताई हकीकत
टीएचटी न्यूज, रोहतक :
महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय (MDU), रोहतक में कैंपस सुरक्षा का मुद्दा अब गंभीर संकट का रूप ले चुका है। हालिया घटनाओं ने न सिर्फ छात्रों बल्कि खासकर छात्राओं और उनके अभिभावकों की चिंता को बढ़ा दिया है। विश्वविद्यालय परिसर में बुलेटप्रूफ काली स्कॉर्पियो में सवार युवकों द्वारा छात्रों को कुचलने की कोशिश, पहले से दर्ज फायरिंग की घटनाएं और जमानत पर बाहर आने के बाद दोबारा कैंपस में सक्रिय असामाजिक तत्वों की मौजूदगी ने प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है।
सूत्रों के मुताबिक, जिन युवकों पर हालिया घटना का आरोप है, वे पहले भी एमडीयू परिसर में एक छात्र पर फायरिंग के मामले में जेल जा चुके हैं। जमानत पर रिहा होने के बाद उनका दोबारा कैंपस में दिखाई देना यह दर्शाता है कि विश्वविद्यालय में बाहरी तत्वों की आवाजाही पर कोई प्रभावी नियंत्रण नहीं है। छात्रों का कहना है कि ऐसे लोग बेखौफ होकर परिसर में घूमते हैं, जिससे डर का माहौल बना हुआ है।
एमडीयू कैंपस में यह पहली बार नहीं है जब सुरक्षा को लेकर सवाल उठे हों। इससे पहले भी हिंसा, मारपीट, हथियारों की मौजूदगी और ड्रग्स के सेवन से जुड़े कई मामले सामने आ चुके हैं। छात्र संगठनों और अभिभावकों का आरोप है कि विश्वविद्यालय प्रशासन ने बार-बार चेतावनी के बावजूद ठोस कदम नहीं उठाए। नतीजा यह है कि कैंपस में पढ़ने वाली छात्राएं खुद को असुरक्षित महसूस कर रही हैं।
The Haryana Talks से बातचीत करते हुए एमडीयू की एक छात्रा निशा राणा, जो अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) से जुड़ी हुई हैं, ने कैंपस की जमीनी हकीकत को सामने रखा। छात्रा ने बताया कि लाइब्रेरी, हॉस्टल के आसपास, पार्किंग एरिया और सुनसान रास्तों पर असामाजिक तत्वों की मौजूदगी आम बात हो चुकी है। कई बार शिकायत करने के बावजूद कार्रवाई न होना प्रशासन की गंभीर लापरवाही को दर्शाता है।
बातचीत में यह भी सामने आया कि ड्रग्स की समस्या एमडीयू परिसर में तेजी से बढ़ रही है। छात्रा के अनुसार, कुछ बाहरी तत्व युवाओं को नशे की ओर धकेल रहे हैं, जिससे न सिर्फ छात्रों का भविष्य बल्कि कैंपस का माहौल भी खराब हो रहा है। अभिभावक अपने बच्चों को विश्वविद्यालय भेजने से पहले सुरक्षा को लेकर आशंकित हैं।
छात्र संगठनों ने प्रशासन से मांग की है कि कैंपस में प्रवेश व्यवस्था को सख्त किया जाए, बाहरी लोगों की आवाजाही पर रोक लगे, सीसीटीवी और सुरक्षा कर्मियों की संख्या बढ़ाई जाए तथा ड्रग्स के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति अपनाई जाए। सवाल यह है कि क्या विश्वविद्यालय प्रशासन इन चेतावनियों को गंभीरता से लेगा या फिर किसी बड़ी अनहोनी के बाद ही कार्रवाई होगी।
यह मामला केवल एमडीयू तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे हरियाणा और देश के विश्वविद्यालयों में छात्र सुरक्षा की स्थिति पर एक बड़ा सवाल खड़ा करता है।