एमडीयू में अनुशासनहीनता पर सख़्त कार्रवाई; छात्र संगठनों का विरोध प्रदर्शन तेज

- कैंपस प्रवेश पर प्रतिबंध के विरोध में छात्र संगठनों ने VC का पुतला फूंका, आंदोलन की चेतावनी

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एमडीयू में अनुशासनहीनता पर सख़्त कार्रवाई; छात्र संगठनों का विरोध प्रदर्शन तेज

एमडीयू में अनुशासनहीनता पर सख़्त कार्रवाई; छात्र संगठनों का विरोध प्रदर्शन तेज

- कैंपस प्रवेश पर प्रतिबंध के विरोध में छात्र संगठनों ने VC का पुतला फूंका, आंदोलन की चेतावनी

टीएचटी न्यूज, रोहतक :

महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय (एमडीयू) में कुलपति आवास पर जबरन प्रवेश और सुरक्षा व्यवस्था भंग करने से जुड़े हालिया प्रकरण पर प्रशासन ने कड़ा संज्ञान लिया है। प्रॉक्टोरियल बोर्ड की संस्तुति और सक्षम प्राधिकारी की मंजूरी के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने कई छात्रों के खिलाफ सख़्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की है। इसी कार्रवाई के विरोध में मंगलवार को विभिन्न छात्र संगठनों ने एमडीयू गेट के बाहर कुलपति का पुतला फूंककर प्रदर्शन किया और आंदोलन तेज करने की चेतावनी दी।

लवकुश दहिया पर एमडीयू कैंपस में प्रवेश पर पूर्ण प्रतिबंध

आदेशानुसार, प्रशासन ने तथाकथित यूट्यूबर और बाहरी व्यक्ति लवकुश दहिया का विश्वविद्यालय परिसर में प्रवेश पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया है।

प्रॉक्टोरियल बोर्ड द्वारा उपलब्ध साक्ष्यों की समीक्षा के बाद यह माना गया कि आरोपी व्यक्ति ने विश्वविद्यालय की अनुशासनात्मक सीमाओं का उल्लंघन किया था।

छात्र प्रदीप ‘मोटा’ दो वर्ष के लिए विश्वविद्यालय से निष्कासित

प्रॉक्टोरियल बोर्ड की विस्तृत जांच के बाद सर्टिफिकेट कोर्स इन जर्मन के छात्र प्रदीप उर्फ प्रदीप मोटा को तत्काल प्रभाव से दो वर्ष के लिए विश्वविद्यालय एवं विभाग से निष्कासन की सिफारिश की गई, जिसे प्रशासन ने मंजूरी दे दी।

उन पर आरोप है कि उन्होंने अपने साथियों के साथ मिलकर कुलपति आवास में घुसपैठ की, सुरक्षा कर्मियों से धक्का-मुक्की की और अभद्र भाषा का प्रयोग किया।

चार छात्रों को कड़ी चेतावनी, शपथ पत्र जमा कराने तक कक्षाओं में प्रवेश व परीक्षा पर रोक

प्रकरण में शामिल माने गए अन्य छात्रों—धीरज अहलावत, युद्धवीर बड़सरा (शारीरिक शिक्षा विभाग), तथा हिमांशु और कपिल देव (रक्षा एवं सामरिक अध्ययन विभाग)—को कड़ी चेतावनी दी गई है।

उन्हें स्वयं और अभिभावकों के संयुक्त नाम से अच्छे आचरण का शपथ-पत्र प्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेट से सत्यापित कर प्रस्तुत करना होगा।

शपथ पत्र जमा होने तक वे कक्षाओं में उपस्थित होने और परीक्षाओं में बैठने के पात्र नहीं होंगे।

छह अन्य छात्रों को अनुशासनहीन आचरण को लेकर औपचारिक चेतावनी जारी की गई है।

विश्वविद्यालय ने कहा—अनुशासनहीनता पर शून्य सहनशीलता, पर सुधार का अवसर भी दिया जाएगा

एमडीयू प्रशासन ने बयान जारी कर कहा कि विश्वविद्यालय सुरक्षित, अनुशासित और सकारात्मक शैक्षणिक माहौल बनाए रखने के लिए कटिबद्ध है।

प्रशासन ने स्पष्ट किया—

“किसी भी प्रकार की अनुचित गतिविधि, अवैध प्रवेश, दुव्यर्वहार या विश्वविद्यालय की मर्यादा भंग करने के प्रति शून्य सहनशीलता की नीति अपनाई जाएगी। हालांकि, युवाओं को सुधार का अवसर देना भी विश्वविद्यालय की सकारात्मक सोच का हिस्सा है।”

छात्र संगठनों का आक्रोश: आदेश वापसी की मांग, अवैध गमला फैक्ट्री का आरोप

उधर, अनुशासनात्मक कार्रवाई के विरोध में संयुक्त छात्र संघर्ष समिति और अन्य संगठनों ने एमडीयू गेट के बाहर प्रदर्शन किया। छात्रों ने कुलपति का पुतला फूंका और नारेबाजी की।

छात्र नेताओं का आरोप है कि—

प्रदीप मोटा ने कुलपति आवास पर “अवैध गमला फैक्ट्री” चलने का मुद्दा उठाया था।

प्रशासन ने निष्पक्ष जांच की बजाय जल्दबाजी में मुकदमे दर्ज किए।

छात्रों को अपराधी की तरह पेश किया जा रहा है।

छात्र नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि प्रतिबंधात्मक आदेश वापस नहीं लिए गए, तो आंदोलन बड़े स्तर पर किया जाएगा।

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