"वंदे मातरम हमारे राष्ट्र का जीवंत प्रतीक है": डॉ. अमित आर्य
डीएलसी सुपवा ने कुलपति के नेतृत्व में सामूहिक गायन कार्यक्रम से मनाई वंदे मातरम की 150वीं वर्षगांठ
"वंदे मातरम हमारे राष्ट्र का जीवंत प्रतीक है": डॉ. अमित आर्य
डीएलसी सुपवा ने कुलपति के नेतृत्व में सामूहिक गायन कार्यक्रम से मनाई वंदे मातरम की 150वीं वर्षगांठ
टीएचटी न्यूज, रोहतक :
हरियाणा के कला एवं सांस्कृतिक कार्य विभाग की पहल पर, दादा लखमी चंद राज्य प्रदर्शन एवं दृश्य कला विश्वविद्यालय (डीएलसी सुपवा), रोहतक ने शुक्रवार को "वंदे मातरम" के 150वें वर्ष के उपलक्ष्य में सामूहिक गायन कार्यक्रम का आयोजन किया। यह आयोजन प्रधानमंत्री के राष्ट्रव्यापी कार्यक्रम के साथ जुड़ा हुआ था और देशभर में मनाए जा रहे ‘वंदे मातरम स्मरणोत्सव’ का हिस्सा था।
कार्यक्रम का आयोजन विश्वविद्यालय के कुलपति कार्यालय परिसर के लॉन में किया गया, जहां सुबह से ही देशभक्ति और उल्लास का माहौल दिखाई दिया। कुलपति डॉ. अमित आर्य के नेतृत्व में संकाय सदस्य, प्रशासनिक अधिकारी, कर्मचारी और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं एकत्र हुए और एक स्वर में “वंदे मातरम” का गायन किया। सामूहिक स्वर में गूंजता यह गीत विश्वविद्यालय परिसर को राष्ट्रीय एकता और सांस्कृतिक गर्व की भावना से भर गया।
कार्यक्रम की शुरुआत पारंपरिक दीप प्रज्वलन के साथ हुई। इसके बाद विश्वविद्यालय के संगीत विभाग के विद्यार्थियों ने "वंदे मातरम" की संगीतमय प्रस्तुति दी, जिसमें भारतीय शास्त्रीय और आधुनिक संगीत का सुंदर संगम देखने को मिला। गायन के दौरान प्रतिभागियों ने तिरंगे झंडे लहराकर देशभक्ति की भावना का प्रतीकात्मक प्रदर्शन भी किया।
इस अवसर पर कुलपति डॉ. अमित आर्य ने कहा,
“आज का यह सामूहिक गायन केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि हमारे राष्ट्रीय गौरव का पुनर्स्मरण है। ‘वंदे मातरम’ सिर्फ एक गीत नहीं, बल्कि यह हमारे राष्ट्र के सपनों, संघर्षों और अमर भावना का जीवंत प्रतीक है। यह गीत हमें हमारी मातृभूमि से भावनात्मक रूप से जोड़ता है और नई पीढ़ी को राष्ट्रभक्ति की प्रेरणा देता है।”
उन्होंने आगे कहा कि डीएलसी सुपवा जैसे संस्थान, जो कला और संस्कृति के केंद्र हैं, उन्हें ऐसे आयोजनों के माध्यम से देश की आत्मा को जीवित रखने की जिम्मेदारी निभानी चाहिए।
“हमारा लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि हर छात्र न केवल अपने क्षेत्र में उत्कृष्टता हासिल करे, बल्कि अपनी सांस्कृतिक जड़ों से भी जुड़ा रहे,” — डॉ. आर्य ने जोड़ा।
रजिस्ट्रार डॉ. गुंजन मलिक ने भी इस अवसर पर अपने विचार साझा किए। उन्होंने कहा,
“यह आयोजन हमारी कलात्मक और सांस्कृतिक विरासत का उत्सव है। यह हमारे छात्रों में एकता, अनुशासन, और देशभक्ति के मूल्यों को मजबूत करने का माध्यम भी है। डीएलसी सुपवा हमेशा से राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रतिबद्ध रहा है, और ऐसे अवसर उस दिशा में हमारे प्रयासों को और सशक्त करते हैं।”
डॉ. मलिक ने यह भी बताया कि विश्वविद्यालय आगामी महीनों में इसी श्रृंखला के अंतर्गत कई सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित करेगा, जिनमें स्वतंत्रता आंदोलन के गीतों, लोककला, और देशभक्ति पर आधारित नाट्य प्रस्तुतियां शामिल होंगी।
कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ। अंत में, सभी उपस्थितों ने तिरंगा लहराते हुए “भारत माता की जय” के नारों से वातावरण गुंजायमान कर दिया।
डीएलसी सुपवा का यह आयोजन न केवल एक गीत की स्मृति का उत्सव था, बल्कि यह एक ऐसे भारत की भावना का भी प्रतीक था, जो अपनी सांस्कृतिक जड़ों और राष्ट्रीय अस्मिता पर गर्व करता है।
मुख्य बिंदु:
- “वंदे मातरम” के 150 वर्ष पूरे होने पर डीएलसी सुपवा में सामूहिक गायन।
- कुलपति डॉ. अमित आर्य और रजिस्ट्रार डॉ. गुंजन मलिक की उपस्थिति।
- छात्रों, शिक्षकों और कर्मचारियों की उत्साही भागीदारी।
- हरियाणा कला एवं सांस्कृतिक कार्य विभाग की पहल के तहत कार्यक्रम।
- देशभक्ति और सांस्कृतिक एकता का संदेश देने वाला आयोजन।
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