पेपर लीक, छात्र आंदोलन और पुलिस कार्रवाई पर संसद में सरकार पर बरसे दीपेंद्र हुड्डा

- छात्र आंदोलन को बताया लोकतंत्र की ताकत; बोले- युवाओं के हाथ में पत्थर नहीं, संविधान और मोबाइल था, सवाल पूछने वाले देशद्रोही नहीं बल्कि लोकतंत्र के प्रहरी

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पेपर लीक, छात्र आंदोलन और पुलिस कार्रवाई पर संसद में सरकार पर बरसे दीपेंद्र हुड्डा

पेपर लीक, छात्र आंदोलन और पुलिस कार्रवाई पर संसद में सरकार पर बरसे दीपेंद्र हुड्डा

- 'जेन-जी ने सरकार से मांगी जवाबदेही, लोकतंत्र में असली राजा जनता' : संसद में बोले दीपेंद्र हुड्डा

- छात्र आंदोलन को बताया लोकतंत्र की ताकत; बोले- युवाओं के हाथ में पत्थर नहीं, संविधान और मोबाइल था, सवाल पूछने वाले देशद्रोही नहीं बल्कि लोकतंत्र के प्रहरी

टीएचटी न्यूज, चंडीगढ़ :

कांग्रेस सांसद दीपेंद्र हुड्डा ने लोकसभा में छात्र आंदोलन और युवाओं की भूमिका का जिक्र करते हुए कहा कि देश की जेन-जी ने साबित कर दिया है कि लोकतंत्र में असली ताकत जनता के पास है। उन्होंने कहा कि छात्र-युवाओं ने अहिंसक और रचनात्मक तरीके से अपनी आवाज बुलंद कर सरकार से जवाबदेही मांगी और यह दिखा दिया कि लोकतंत्र में सवाल पूछने वाले देशद्रोही नहीं, बल्कि उसके प्रहरी होते हैं।

लोकसभा में चर्चा के दौरान कांग्रेस सांसद दीपेंद्र हुड्डा ने कहा कि देश की जेन-जी ने यह साबित कर दिया है कि लोकतंत्र में असली राजा जनता होती है। उन्होंने कहा कि आज देश का युवा सरकार से जवाबदेही मांग रहा है और यही लोकतांत्रिक व्यवस्था की सबसे बड़ी ताकत है।

दीपेंद्र हुड्डा ने जंतर-मंतर पर हुए छात्र आंदोलन का उल्लेख करते हुए कहा कि वहां "शिक्षा मंत्री तो झांकी है, प्रधानमंत्री बाकी है" जैसे नारे गूंजे। उन्होंने कहा कि इन आंदोलनों ने यह संदेश दिया कि देश का युवा केवल भविष्य नहीं, बल्कि वर्तमान में भी एक जागरूक और जिम्मेदार नागरिक की भूमिका निभा रहा है।

उन्होंने छात्र-युवाओं को बधाई देते हुए कहा कि उन्होंने अहिंसा और रचनात्मकता के माध्यम से शिक्षा और परीक्षा व्यवस्था जैसे गंभीर मुद्दों को सरकार तक पहुंचाया। उन्होंने कहा कि प्रदर्शन कर रहे युवाओं के हाथों में पत्थर नहीं, बल्कि संविधान और मोबाइल फोन थे। किसी ने रील बनाकर, किसी ने मीम के जरिए और किसी ने गीतों के माध्यम से अपनी बात रखी।

हुड्डा ने कहा कि प्रदर्शन के दौरान युवाओं ने व्यंग्य और रचनात्मक अंदाज में सरकार से इस्तीफे की मांग की। उन्होंने कहा कि आंदोलनकारियों ने "कुचु पुचु इस्तीफा दे दो, आज हमारा जन्मदिन है" जैसे नारों के जरिए अपनी बात रखी, जो लोकतांत्रिक विरोध का शांतिपूर्ण स्वरूप था।

उन्होंने कहा कि देश के छात्र-युवाओं ने यह साबित कर दिया कि लोकतंत्र में सवाल पूछने वाले लोग देशद्रोही नहीं, बल्कि लोकतंत्र के प्रहरी होते हैं। उनके अनुसार, यह आंदोलन सरकार की विफलता और देश के छात्रों व युवाओं की लोकतांत्रिक जीत का प्रतीक है।

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