रोहतक की 20 एकड़ जमीन विवाद: सुभाष बतरा और बीबी बतरा को 50-50 लाख का कानूनी नोटिस
- कंपनी का दावा—IMT के पास जमीन सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के तहत खरीदी गई; भ्रामक बयानबाजी बंद करें या माफी मांगें
रोहतक की 20 एकड़ जमीन विवाद: सुभाष बतरा और बीबी बतरा को 50-50 लाख का कानूनी नोटिस
- कंपनी का दावा—IMT के पास जमीन सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के तहत खरीदी गई; भ्रामक बयानबाजी बंद करें या माफी मांगें
ओपी वशिष्ठ, रोहतक :
हरियाणा के Rohtak में IMT के पास स्थित 20 एकड़ जमीन को लेकर नया विवाद सामने आया है। इस मामले में कंपनी अधिकारियों ने पूर्व गृहमंत्री Subhash Batra और रोहतक के विधायक Bharat Bhushan Batra को 50-50 लाख रुपये का कानूनी नोटिस भेजा है। कंपनी का आरोप है कि दोनों नेताओं ने जमीन को लेकर भ्रामक और गलत बयानबाजी की है।
कंपनी अधिकारियों का कहना है कि IMT के पास स्थित जमीन पूरी तरह कानूनी प्रक्रिया के तहत खरीदी गई है और इसके लिए सुप्रीम कोर्ट तक से मंजूरी मिल चुकी है। ऐसे में सार्वजनिक मंचों और विधानसभा में इस मामले को लेकर सवाल उठाना और आरोप लगाना सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर भी उंगली उठाने जैसा है।
नोटिस में कहा गया है कि अगर दोनों नेता अपने बयान पर माफी नहीं मांगते हैं तो उन्हें कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा।
कंपनी के अधिकारियों के मुताबिक, जिस जमीन को लेकर विवाद खड़ा किया जा रहा है, वह 1988 से Haryana Telecom Limited के पास थी। वर्ष 2020 में कंपनी दिवालिया घोषित हो गई, जिसके बाद उसके लेनदारों और संबंधित विभागों ने अपने-अपने क्लेम के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाया।
मामला National Company Law Tribunal में पहुंचा, जहां अदालत ने एक अधिकारी नियुक्त कर कंपनी के समाधान की प्रक्रिया शुरू करवाई। इसके तहत कॉर्पोरेट इनसॉल्वेंसी रेजोल्यूशन प्रोसेस (CIRP) के माध्यम से सभी लेनदारों से क्लेम मांगे गए, जिनमें संबंधित विभागों ने भी अपने दावे पेश किए।
कंपनी अधिकारियों का कहना है कि पूरी प्रक्रिया के दौरान अखबारों में विज्ञापन देकर बोली आमंत्रित की गई थी। कुल तीन खरीदार सामने आए, जिनमें उनकी कंपनी ने 25 करोड़ 14 लाख रुपये की सबसे अधिक बोली लगाई। इसके बाद लेनदारों से आपत्तियां मांगी गईं और 31 अक्टूबर 2020 को सभी ने इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी।
इसके बाद पूरा प्लान संबंधित अधिकारी द्वारा NCLT में प्रस्तुत किया गया। मार्च 2021 में विभाग ने इस पर आपत्ति दर्ज करवाई, लेकिन अदालत में चली कानूनी प्रक्रिया के बाद फैसला कंपनी के पक्ष में आया।
कंपनी अधिकारियों का कहना है कि विभाग चार बार कोर्ट में केस हार चुका है और सभी संबंधित पक्षों को उनका क्लेम भी दिया जा चुका है। ऐसे में जमीन को लेकर किसी भी तरह की गड़बड़ी का आरोप पूरी तरह गलत है। उन्होंने लोगों से अपील की है कि इस मामले में फैलाए जा रहे भ्रम से बचें।
पूर्व मंत्री का पक्ष
पूर्व मंत्री सुभाष बतरा ने कहा कि हम पूरी तरह से लीगल नोटिस को लेकर तैयार हैं। मैं खुद एक अधिवक्ता हूं और विधायक भारत भूषण बतरा ने इस मुद्दे को विधानसभा में भी उठाया है। लीगल नोटिस का जवाब दिया जाएगा।
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