हरियाणा राज्यसभा चुनाव: 0.66 वोट से पलटा खेल, कांग्रेस के कर्मवीर बौद्ध की जीत, भाजपा के संजय भाटिया भी पहुंचे संसद
- क्रॉस वोटिंग, रद्द वोट और INLD की दूरी ने बदला पूरा समीकरण; भूपेंद्र सिंह हुड्डा बोले—“अग्नि परीक्षा पास की
हरियाणा राज्यसभा चुनाव: 0.66 वोट से पलटा खेल, कांग्रेस के कर्मवीर बौद्ध की जीत, भाजपा के संजय भाटिया भी पहुंचे संसद
- क्रॉस वोटिंग, रद्द वोट और INLD की दूरी ने बदला पूरा समीकरण; भूपेंद्र सिंह हुड्डा बोले—“अग्नि परीक्षा पास की”
- ओपी वशिष्ठ, रोहतक :
हरियाणा राज्यसभा चुनाव में इस बार बेहद दिलचस्प और कांटे की टक्कर देखने को मिली, जहां जीत का फैसला एक वोट से भी कम अंतर से हुआ। भाजपा के संजय भाटिया और कांग्रेस के कर्मवीर बौद्ध ने जीत दर्ज की, जबकि भाजपा समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार सतीश नांदल बेहद मामूली अंतर से हार गए।
वोटिंग का गणित
विधानसभा के कुल 90 विधायकों में से 2 (INLD) ने मतदान नहीं किया, जबकि 5 वोट रद्द हो गए। ऐसे में कुल 83 वोट ही वैध माने गए।
राज्यसभा चुनाव में जीत का कोटा निकालने के लिए फार्मूला लागू होता है:
(कुल वैध वोट ÷ (सीट + 1)) + 1
इसी आधार पर जीत का आंकड़ा 27.66 तय हुआ।
किसे कितने वोट मिले?
संजय भाटिया को 27.66 वोट (पहली प्राथमिकता से जीत)
कर्मवीर बौद्ध को 28 वोट
सतीश नांदल को 27.34 वोट
इस प्रकार नांदल, बौद्ध से केवल 0.66 वोट से पीछे रह गए।
क्रॉस वोटिंग और रद्द वोट बने निर्णायक
कांग्रेस के 37 विधायकों में से 4 वोट रद्द हुए और 5 विधायकों ने क्रॉस वोटिंग की। इसके बावजूद कांग्रेस के पास 28 वोट बचे, जो जीत के लिए पर्याप्त थे।
दूसरी ओर भाजपा के 48 विधायकों में से एक वोट रद्द हो गया, जिसने चुनावी समीकरण बदल दिया।
INLD की गैरहाजिरी का असर
इंडियन नेशनल लोकदल (INLD) के दो विधायकों ने मतदान में हिस्सा नहीं लिया। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यदि ये वोट नांदल के पक्ष में जाते, तो परिणाम बदल सकता था।
हुड्डा का बयान
जीत के बाद नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा कि यह चुनाव पार्टी के लिए “अग्नि परीक्षा” था और कांग्रेस ने इसे पास किया है। उन्होंने क्रॉस वोटिंग करने वाले विधायकों पर भी सवाल उठाए।
कांग्रेस की रणनीति
कांग्रेस ने इस चुनाव में कई रणनीतिक फैसले लिए। पार्टी नेतृत्व, खासकर राहुल गांधी ने गुटबाजी से हटकर उम्मीदवार का चयन किया। अनुसूचित वर्ग से प्रत्याशी उतारकर पार्टी ने अपने पारंपरिक वोट बैंक को साधने की कोशिश की। साथ ही विधायकों की बाड़ाबंदी भी की गई।
भाजपा की चूक
भाजपा ने निर्दलीय उम्मीदवार सतीश नांदल को समर्थन देकर रणनीति बनाई, लेकिन पर्याप्त वोट नहीं जुटा पाई। एक वोट का रद्द होना भी पार्टी के लिए नुकसानदायक साबित हुआ।
काउंटिंग में देरी क्यों हुई?
मतगणना से पहले वोट की गोपनीयता को लेकर विवाद खड़ा हो गया। जांच के बाद एक वोट रद्द किया गया, जबकि अन्य को वैध माना गया। विवाद के चलते मतगणना देर रात शुरू हुई और परिणाम रात 1:10 बजे घोषित किया गया।
जीत के साथ चुनौती भी
कांग्रेस ने चुनाव जीत लिया, लेकिन 9 वोट गंवाने पड़े। पार्टी के 5 विधायकों द्वारा क्रॉस वोटिंग किए जाने से संगठन के भीतर सवाल खड़े हो गए हैं।
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने भी दावा किया कि कांग्रेस के कई विधायक “ट्रांसफर” हुए हैं।
राज्यसभा में नई स्थिति
इस चुनाव के बाद हरियाणा से राज्यसभा की 5 सीटों में से 4 भाजपा और 1 कांग्रेस के खाते में हैं।
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