गोंडा में बृजभूषण शरण सिंह का जन्मदिन बना शक्ति-प्रदर्शन, हरियाणा से पहुंचे महंगे तोहफे चर्चा का केंद्र
ढाई करोड़ के घोड़े से लेकर प्रीमियम गाय तक, समर्थकों की मौजूदगी ने दिया सियासी-सामाजिक संदेश
गोंडा में बृजभूषण शरण सिंह का जन्मदिन बना शक्ति-प्रदर्शन, हरियाणा से पहुंचे महंगे तोहफे चर्चा का केंद्र
ढाई करोड़ के घोड़े से लेकर प्रीमियम गाय तक, समर्थकों की मौजूदगी ने दिया सियासी-सामाजिक संदेश
टीएचटी न्यूज, रोहतक/गोंडा (उ.प्र.)।
भारतीय कुश्ती संघ (WFI) के पूर्व अध्यक्ष और पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह के 69वें जन्मदिन पर गुरुवार को उत्तर प्रदेश के गोंडा में आयोजित कार्यक्रम ने निजी समारोह से आगे बढ़कर सार्वजनिक शक्ति-प्रदर्शन का रूप ले लिया। देश के अलग-अलग राज्यों से समर्थक इस आयोजन में पहुंचे, लेकिन हरियाणा से आई मौजूदगी और महंगे तोहफों ने सबसे अधिक सुर्खियां बटोरीं।
कार्यक्रम में हरियाणा के रेवाड़ी जिले के गोठड़ा गांव निवासी रवि (रविंद्र) चौहान और उनकी पत्नी संगीता चौहान ने बृजभूषण को एक घोड़ा भेंट किया, जिसकी कीमत करीब ढाई करोड़ रुपये बताई जा रही है। बताया गया कि यह घोड़ा थॉरोब्रेड नस्ल का है और इसे लंदन से मंगवाया गया था। मंच से स्वयं बृजभूषण शरण सिंह ने दंपती का परिचय कराया, जिसके बाद यह तोहफा पूरे आयोजन की सबसे चर्चित बात बन गया।
इसके अलावा हरियाणा से आए एक खिलाड़ी ने बृजभूषण को सोने की चेन पहनाई। वहीं हरियाणा कुश्ती संघ (HWA) के अध्यक्ष रमेश बोहर ने ‘श्यामा’ नस्ल की गाय भेंट की, जिसकी कीमत करीब 20 लाख रुपये बताई जा रही है। आयोजन में मौजूद लोगों ने गाय को प्रीमियम और दुर्लभ नस्ल बताते हुए इसके विशेष रख-रखाव का भी उल्लेख किया।
रोड शो, लंबा काफिला और लाखों की दावत
जन्मदिन समारोह का स्वरूप पूरी तरह भव्य रहा। बृजभूषण शरण सिंह खुली जीप में निकले, उनके साथ वाहनों का लंबा काफिला रहा। आयोजकों का दावा है कि इस मौके पर करीब पांच लाख लोगों के लिए दावत की व्यवस्था की गई। धार्मिक पहलू भी कार्यक्रम का हिस्सा रहा—बृजभूषण ने मंदिर में पूजा-अर्चना की और प्रसाद ग्रहण किया।
‘ढाई करोड़’ के घोड़े के बाद फिर चर्चा में रवि चौहान
घोड़े के तोहफे के बाद रवि चौहान का नाम एक बार फिर चर्चा में आ गया। रवि चौहान ने 2014 में अटेली विधानसभा सीट से निर्दलीय चुनाव लड़ा था और 11,361 वोट हासिल कर तीसरे स्थान पर रहे थे। उसी चुनाव में उनके हलफनामे में घोषित 212 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति को लेकर भी काफी चर्चा हुई थी और उन्हें हरियाणा के सबसे अमीर प्रत्याशियों में गिना गया था।
रवि चौहान का घोड़ों के कारोबार से जुड़ाव बताया जाता है। वे दिल्ली में “रविंद्रगढ़” नाम से घुड़साल/हॉर्स फार्म चलाने का दावा करते हैं, जहां देसी और विदेशी नस्लों के घोड़े रखे जाते हैं। हालांकि इन दावों का स्वतंत्र सत्यापन संभव नहीं हो सका।
इस संवाददाता से बातचीत में रवि चौहान ने कहा,
“मैंने यह घोड़ा सम्मान स्वरूप भेंट किया है। कीमत पर टिप्पणी नहीं करूंगा, लेकिन घोड़ा पालने वाले लोग इसकी सच्चाई जानते हैं। जब घोड़ा मेरे पास था तो वह सोना था, बृजभूषण शरण सिंह को देने के बाद हीरा हो गया।”
गाय का तोहफा और कुश्ती नेटवर्क का संकेत
हरियाणा कुश्ती संघ से जुड़े पदाधिकारी द्वारा दी गई श्यामा नस्ल की गाय को सिर्फ एक महंगे तोहफे के रूप में नहीं, बल्कि परंपरा, सम्मान और संगठनात्मक समर्थन के संकेत के तौर पर भी देखा जा रहा है। उत्तर भारत में गाय-दान को सांस्कृतिक रूप से शुभ माना जाता है, ऐसे में इस भेंट का प्रतीकात्मक महत्व भी रेखांकित किया जा रहा है।
हरियाणा की पृष्ठभूमि और नए ‘ऑप्टिक्स’
महिला पहलवानों द्वारा लगाए गए आरोपों के बाद हरियाणा में बृजभूषण शरण सिंह को लेकर भावनाएं लंबे समय तक उबाल पर रही थीं। राज्य की कई शीर्ष महिला पहलवान इस आंदोलन का चेहरा बनीं और गांव-गांव, अखाड़ों तक बहस पहुंची थी—एक ओर बेटियों की सुरक्षा और सम्मान का सवाल, दूसरी ओर खेल राजनीति और सिस्टम की ताकत।
ऐसे माहौल के बाद गोंडा में हरियाणा से पहुंचकर महंगे तोहफे देना और मंच से सार्वजनिक परिचय कराना—यह तस्वीर प्रदेश में अलग-अलग नजरिए से देखी जा रही है। समर्थक इसे निजी निष्ठा और सम्मान का प्रतीक मानते हैं, जबकि आलोचक इसे महिला पहलवानों के संघर्ष की पृष्ठभूमि में असहज ऑप्टिक्स के तौर पर देख रहे हैं।
विवाद की छाया अब भी साथ
कार्यक्रम जितना भव्य रहा, उतना ही यह भी स्पष्ट रहा कि बृजभूषण शरण सिंह से जुड़ा विवाद सार्वजनिक स्मृति से पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। महिला पहलवानों के आरोपों के बाद 2023 में दिल्ली पुलिस द्वारा एफआईआर दर्ज की गई थी, जबकि बृजभूषण लगातार आरोपों को खारिज करते रहे हैं।
गोंडा का यह जन्मदिन समारोह समर्थकों के लिए शक्ति और समर्थन का संदेश हो सकता है, लेकिन हरियाणा—खासकर अखाड़ों, युवा खिलाड़ियों और महिला पहलवानों के बीच—इसकी क्या प्रतिक्रिया बनेगी, यह आने वाले समय में साफ होगा। उत्सव की चमक के बीच वे सवाल भी मौजूद हैं, जिनकी गूंज अभी पूरी तरह थमी नहीं है।
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