प्रकृति से संवाद: वेटलैंड भ्रमण ने विद्यार्थियों को जोड़ा पक्षी संरक्षण से
- एमडीयू के ईएसएम सेल और बॉटनी विभाग की पहल, प्रवासी पक्षियों व जैव विविधता का मिला प्रत्यक्ष अनुभव
प्रकृति से संवाद: वेटलैंड भ्रमण ने विद्यार्थियों को जोड़ा पक्षी संरक्षण से
- एमडीयू के ईएसएम सेल और बॉटनी विभाग की पहल, प्रवासी पक्षियों व जैव विविधता का मिला प्रत्यक्ष अनुभव
टीएचटी न्यूज, रोहतक।
महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय (एमडीयू) में पर्यावरण संरक्षण और पक्षी जागरूकता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से ईएसएम सेल एवं बॉटनी विभाग द्वारा एक प्रेरणादायी पक्षी जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को पक्षियों के संरक्षण, जैव विविधता और प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र के महत्व से प्रत्यक्ष रूप से जोड़ना रहा।
कार्यक्रम के तहत विद्यार्थियों ने सांपला और मांडोठी वेटलैंड का शैक्षणिक भ्रमण किया। इस दौरान उन्होंने विभिन्न प्रवासी और स्वदेशी पक्षी प्रजातियों को उनके प्राकृतिक आवास में देखा तथा उनके व्यवहार, जीवन चक्र और संरक्षण से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियाँ प्राप्त कीं।
ईएसएम सेल की कोऑर्डिनेटर प्रो. विनीता हुड्डा ने कहा कि पक्षी प्रकृति के संतुलन को बनाए रखने में अहम भूमिका निभाते हैं। उनका संरक्षण न केवल जैव विविधता की रक्षा करता है, बल्कि जलवायु परिवर्तन से उत्पन्न चुनौतियों से निपटने में भी सहायक है। उन्होंने विद्यार्थियों से प्राकृतिक संसाधनों और पक्षी आवासों की रक्षा के लिए सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।
बॉटनी विभाग की अध्यक्षा प्रो. अनिता सहरावत ने स्थानीय स्तर पर पक्षी संरक्षण की संभावनाओं पर प्रकाश डालते हुए कहा कि जल स्रोतों का संरक्षण, देशी वृक्षों का रोपण और जन-जागरूकता अभियान जैसे छोटे प्रयास भी पक्षियों के अस्तित्व को सुरक्षित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
कार्यक्रम में पक्षी वैज्ञानिक डा. टी.के. रॉय और पारिस्थितिकी वैज्ञानिक राकेश अहलावत ने विद्यार्थियों को पक्षियों की विविध प्रजातियों, उनके व्यवहार, वैज्ञानिक पक्षी गणना प्रक्रिया और व्यावहारिक संरक्षण उपायों की जानकारी दी। उन्होंने प्रकृति के प्रति संवेदनशील और जिम्मेदार दृष्टिकोण अपनाने पर जोर दिया।
प्रख्यात वाइल्डलाइफ फोटोग्राफर संदीप दांगी ने बर्ड फोटोग्राफी के तकनीकी और रचनात्मक पहलुओं पर प्रकाश डालते हुए बताया कि फोटोग्राफी के माध्यम से पक्षी प्रजातियों का दस्तावेजीकरण कर समाज में संरक्षण के प्रति जागरूकता फैलाई जा सकती है।
शैक्षणिक भ्रमण के दौरान विद्यार्थियों ने बाबा गरीब दास मंदिर, गांदरा का भी दौरा किया, जहाँ उन्होंने कैम, कैर, जांटी, जाल, बरना, चमरोड और केंदू जैसी स्थानिक वृक्ष प्रजातियों का अवलोकन किया और उनके पर्यावरणीय महत्व को समझा।
भ्रमण के दौरान मध्य एशिया, उत्तरी एशिया और साइबेरिया से आने वाली कई प्रवासी पक्षी प्रजातियों की उपस्थिति दर्ज की गई, जिससे विद्यार्थियों में प्रकृति और वन्यजीव संरक्षण के प्रति गहरी रुचि देखने को मिली।
कार्यक्रम का संचालन बॉटनी विभाग के सीनियर लेक्चर असिस्टेंट राजेश कुमार ने किया। इस अवसर पर पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के सेवानिवृत्त प्रोफेसर हरीश कुमार भी उपस्थित रहे। यह कार्यक्रम विद्यार्थियों में पर्यावरण और पक्षी संरक्षण के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित करने में सफल रहा।
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