रोहतक अग्निकांड: कुछ मिनटों की आग बनी महाविनाश, 3 लोगों की गई जान

- डी-पार्क के समीप दस से ज्यादा दुकानें हुई खाक, अफरा-तफरी मची

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रोहतक अग्निकांड: कुछ मिनटों की आग बनी महाविनाश, 3 लोगों की गई जान

रोहतक अग्निकांड: कुछ मिनटों की आग बनी महाविनाश, 3 लोगों की गई जान

- डी-पार्क के समीप दस से ज्यादा दुकानें हुई खाक, अफरा-तफरी मची

- मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने किया मुआवजा का ऐलान, मृतकों के स्वजनों को मिलेंगे दस-दस लाख

ओपी वशिष्ठ, रोहतक :

रोहतक की डी-पार्क मार्केट में लगी भीषण आग ने न केवल 10 दुकानों को राख कर दिया, बल्कि तीन लोगों की जान भी ले ली। अब हादसे के बाद कई सवाल खड़े हो रहे हैं। शुरुआती जांच, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और घटनास्थल की परिस्थितियां बताती हैं कि यह केवल एक आगजनी नहीं थी, बल्कि कई चूकों और परिस्थितियों का ऐसा मेल था जिसने आग को बेकाबू बना दिया। इस घटना में रोहतक शू- शोरूम के मालिक के बेटे रोहित, कर्मचारी अमन और कपिल की दर्दनाक मौत हो गई।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि शुरुआती स्तर पर कुछ व्यवस्थाएं बेहतर होतीं तो नुकसान की भयावहता काफी कम हो सकती थी।

1. फायर ब्रिगेड की कथित देरी ने आग को फैलने का मौका दिया

प्रत्यक्षदर्शियों और दुकानदारों का आरोप है कि आग लगने के बाद फायर ब्रिगेड की पहली गाड़ी करीब आधे घंटे बाद मौके पर पहुंची। इस दौरान आग एक दुकान से निकलकर आसपास के शोरूम और दुकानों तक फैल चुकी थी।

शुरुआती 20 से 30 मिनट किसी भी आग की घटना में सबसे महत्वपूर्ण माने जाते हैं। इसी अवधि में आग पर नियंत्रण न होने के कारण लपटों ने विकराल रूप धारण कर लिया।

2. एक्सपायर फायर एक्सटिंग्विशर बने बेकार

 मौजूद लोगों ने आग लगते ही फायर एक्सटिंग्विशर से आग बुझाने की कोशिश की, लेकिन प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार कई उपकरण प्रभावी ढंग से काम नहीं कर पाए। बताया जा रहा है कि कुछ एक्सटिंग्विशर की वैधता अवधि समाप्त हो चुकी थी। यदि शुरुआती स्तर पर आग को नियंत्रित कर लिया जाता तो संभवतः यह एक दुकान तक ही सीमित रह सकती थी।

3. शटर गिरा और मौत का जाल बन गया शोरूम

हादसे का सबसे दुखद पहलू यह रहा कि आग के दौरान शोरूम का शटर नीचे आ गया। धुआं और लपटें तेजी से फैलने लगीं और अंदर मौजूद कर्मचारी बाहर निकलने का रास्ता नहीं ढूंढ़ पाए। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि अगर निकासी का रास्ता खुला रहता या कोई वैकल्पिक इमरजेंसी एग्जिट होता तो जान बचने की संभावना बढ़ सकती थी।

4. बाइक-स्कूटी का पेट्रोल बना आग का अतिरिक्त ईंधन

जब आग दुकानों से बाहर निकली तो सड़क किनारे खड़ी करीब एक दर्जन बाइक और स्कूटी उसकी चपेट में आ गईं। वाहनों की टंकियों में मौजूद पेट्रोल ने आग को और भड़का दिया। एक वाहन से दूसरे वाहन तक आग फैलती गई और आसपास का तापमान इतना बढ़ गया कि राहत कार्य भी प्रभावित होने लगा।

5. जूते, रबर और कपड़ों का भारी स्टॉक बना सबसे बड़ी चुनौती

जिन दुकानों में आग लगी, उनमें बड़ी मात्रा में जूते, रबर, फोम, कपड़े और अन्य ज्वलनशील सामग्री मौजूद थी। आग लगने के बाद ये सामग्री लगातार जलती रही, जिससे न केवल धुआं बढ़ा बल्कि आग बुझाने में भी कई घंटे लग गए। रबर और सिंथेटिक सामग्री से निकलने वाले धुएं ने बचाव कार्य को और कठिन बना दिया।

डी-पार्क अग्निकांड ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं—

क्या मार्केट में अग्नि सुरक्षा मानकों का नियमित ऑडिट होता था?

क्या सभी फायर एक्सटिंग्विशर कार्यशील और वैध थे?

क्या इमरजेंसी एग्जिट की पर्याप्त व्यवस्था थी?

फायर ब्रिगेड के रिस्पॉन्स टाइम की जांच होगी?

भीड़भाड़ वाले व्यावसायिक क्षेत्रों में आपदा प्रबंधन व्यवस्था कितनी प्रभावी है?

रोहतक अग्निकांड: बेटी का जन्मदिन, फैक्ट्री का सपना और 20 साल की नौकरी... 7 घंटे बाद मलबे से निकले तीन कंकाल

रोहतक की डी-पार्क मार्केट में मंगलवार दोपहर लगी भीषण आग ने तीन परिवारों की दुनिया उजाड़ दी। किसी ने तीन दिन पहले ही अपनी बेटी का जन्मदिन मनाया था, कोई अपने भाई के साथ जूता फैक्ट्री शुरू करने का सपना देख रहा था, तो कोई पिछले दो दशकों से एक ही शोरूम में नौकरी कर अपने परिवार का सहारा बना हुआ था। लेकिन कुछ ही मिनटों में भड़की आग ने तीनों की जिंदगी छीन ली।

हादसे में 'होम टाउन शूज' के संचालक 19 वर्षीय सौरभ उर्फ रोहित, 'रोहतक शूज' के कर्मचारी 38 वर्षीय अमन यादव और 50 वर्षीय कपिल जिंदा जल गए। आग पर आंशिक नियंत्रण के बाद करीब सात घंटे बाद NDRF की टीम ने मलबे के बीच सर्च ऑपरेशन चलाया और तीनों के शव बरामद किए। शव इतनी बुरी तरह झुलस चुके थे कि वे लगभग कंकाल में तब्दील हो चुके थे।

कैसे शुरू हुआ मौत का यह सिलसिला

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार मंगलवार दोपहर करीब 2 बजे रोहतक शूज शोरूम में लगे एयर कंडीशनर का कंप्रेसर फट गया। धमाके के साथ आग भड़की और कुछ ही मिनटों में आसपास की दुकानों तक फैल गई। देखते ही देखते करीब 10 दुकानें आग की चपेट में आ गईं। दुकानदारों का आरोप है कि सूचना देने के बावजूद फायर ब्रिगेड की पहली गाड़ी करीब आधे घंटे बाद मौके पर पहुंची। तब तक आग विकराल रूप ले चुकी थी। बाद में झज्जर, जींद, गोहाना, भिवानी और चरखी दादरी समेत कई जिलों से दर्जनों फायर टेंडर बुलाने पड़े।

तीन परिवारों की अधूरी कहानियां

अमन यादव: तीन दिन पहले मनाया था बेटी का जन्मदिन

बाबरा मोहल्ला निवासी अमन यादव अपने पीछे पत्नी, आठ वर्षीय बेटे और तीन वर्षीय बेटी को छोड़ गए हैं। परिवार ने अभी 6 जून को बेटी का जन्मदिन मनाया था। कभी खुद की जूते की दुकान चलाने वाले अमन पिछले दो वर्षों से रोहतक शूज शोरूम में नौकरी कर रहे थे।

कपिल: 20 साल की नौकरी, एक पल में खत्म

नेहरू कॉलोनी निवासी कपिल पिछले 20 वर्षों से उसी शोरूम में कार्यरत थे। परिवार में दो बेटे और एक बेटी हैं। पूरी जिंदगी परिवार की जिम्मेदारियां निभाने में गुजारने वाले कपिल उस दिन भी रोज की तरह ड्यूटी पर पहुंचे थे, लेकिन वापस घर नहीं लौट सके।

सौरभ: फैक्ट्री लगाने का सपना अधूरा रह गया

महज 19 वर्षीय सौरभ उर्फ रोहित अपने बड़े भाई चेतन के साथ 'होम टाउन शूज' शोरूम संभालते थे। परिवार दीपावली से पहले जूता निर्माण इकाई शुरू करने की योजना बना रहा था। चेतन इसके लिए प्रशिक्षण भी ले चुका था। लेकिन आग ने परिवार के सपनों को भी राख कर दिया।

प्रत्यक्षदर्शियों की जुबानी...

शटर गिरा और अंदर फंस गए कर्मचारी

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक आग लगने के दौरान रोहतक शूज का मालिक किसी तरह बाहर निकल आया, लेकिन शटर गिर जाने से अमन और कपिल अंदर ही फंस गए। धुएं और आग की वजह से उन्हें बाहर निकलने का मौका नहीं मिला।

रोते-बिलखते रहे परिजन

घटना के बाद डी-पार्क मार्केट शोक और चीख-पुकार का केंद्र बन गई। कई परिजन घंटों तक अपनों के बारे में जानकारी पाने के लिए भटकते रहे। सांसद दीपेंद्र हुड्डा के पहुंचने पर एक व्यक्ति उनसे लिपटकर फूट-फूट कर रो पड़ा और अपने बेटे को ढूंढने की गुहार लगाता रहा।

मुख्यमंत्री ने किया मुआवजे का ऐलान

मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने घटना पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए मृतकों के परिजनों को 10-10 लाख रुपये तथा घायलों को 2-2 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है। साथ ही घायलों के मुफ्त इलाज और पूरे मामले की विस्तृत जांच के निर्देश दिए गए हैं।

सिर्फ दुकानें नहीं जलीं, कई परिवारों की उम्मीदें भी राख हुईं

डी-पार्क की यह आग केवल 10 दुकानों को नहीं निगल गई। इसने तीन परिवारों के सपने, वर्षों की मेहनत और कई लोगों का भविष्य भी अपने साथ राख कर दिया। अब पूरे शहर में एक ही सवाल गूंज रहा है—क्या यह त्रासदी टाली जा सकती थी?

सांसद दीपेंद्र हुड्डा ने बंधाया ढांढस

रोहतक से कांग्रेस सांसद दीपेंद्र सिंह हुड्डा को जैसे ही घटना की जानकारी मिली, वो तुरंत रोहतक पहुंचे और पीड़ित दुकानदारों से मुलाकात की। उन्होंने मौके पर पहुंचे आई सिमरदीप सिंह, डीसी सचिन गुप्ता और एसपी गौरव राजपुरोहित से मुलाकात की और उनसे जल्दी आग पर काबू पाने बारे में चर्चा की। पूर्व राज्यगृह मंत्री सुभाष बतरा, पूर्व मंत्री मनीष ग्रोवर, विधायक शकुंतला खटक ने भी मौके पर पहुंचकर पीड़ितों का हालचाल जाना और इस घटना पर दुख प्रकट किया।

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