भारत में पारिवारिक व्यवसायों ने समय की कठिनाइयों के बावजूद अपनी पहचान और विरासत बनाए रखी है : प्रो. धीरज शर्मा

- भारतीय प्रबंध संस्थान, रोहतक ने लुधियाना में किया “बिज़नेस कॉन्क्लेव 2025” का सफल आयोजन

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भारत में पारिवारिक व्यवसायों ने समय की कठिनाइयों के बावजूद अपनी पहचान और विरासत बनाए रखी है : प्रो. धीरज शर्मा

भारत में पारिवारिक व्यवसायों ने समय की कठिनाइयों के बावजूद अपनी पहचान और विरासत बनाए रखी है : प्रो. धीरज शर्मा

- भारतीय प्रबंध संस्थान, रोहतक ने लुधियाना में किया “बिज़नेस कॉन्क्लेव 2025” का सफल आयोजन

टीएचटी न्यूज, रोहतक :

भारतीय प्रबंध संस्थान (IIM) रोहतक ने लुधियाना में “बिज़नेस कॉन्क्लेव 2025” का सफल आयोजन किया। इस वर्ष कॉन्क्लेव का विषय था “विरासत, स्थानीयता और उदारीकरण: व्यापार के भविष्य की दिशा।” इस आयोजन का उद्देश्य उद्योग और शिक्षा जगत के बीच सार्थक संवाद स्थापित करना तथा पारिवारिक और स्थानीय व्यवसायों को बदलते वैश्विक परिदृश्य में सशक्त बनाना था।

कॉन्क्लेव में हीरो इकोटेक, वर्धमान स्पेशल स्टील्स और विशाल साइकिल्स जैसी प्रतिष्ठित कंपनियों के प्रतिनिधियों सहित प्रमुख शिक्षाविद् और नीति-निर्माता शामिल हुए। लगभग 200 छात्रों ने इसमें भाग लिया और व्यवसाय के भविष्य, नवाचार तथा पारंपरिक मूल्यों की प्रासंगिकता पर गहन चर्चा हुई।

कार्यक्रम का शुभारंभ आईआईएम रोहतक के निदेशक प्रो. धीरज शर्मा के स्वागत भाषण से हुआ। उन्होंने कॉन्क्लेव को छात्रों के लिए उद्योग जगत से जुड़ने और व्यावहारिक अनुभव प्राप्त करने का एक अवसर बताया। उन्होंने कहा कि भारत में पारिवारिक व्यवसायों ने समय की कठिनाइयों के बावजूद अपनी पहचान और विरासत बनाए रखी है। उन्होंने उत्तराधिकार योजना (succession planning) को केवल नेतृत्व परिवर्तन नहीं, बल्कि पीढ़ियों तक पहचान और गर्व बनाए रखने की प्रक्रिया बताया।

मुख्य वक्ता वैभव माहेश्वरी, सदस्य, पंजाब विकास आयोग ने शासन और व्यवसाय के बीच समन्वय की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि पंजाब की कृषि, वस्त्र और खेल उद्योग में अपार संभावनाएं हैं, जिन्हें मूल्य संवर्धन और नवाचार के जरिये वैश्विक स्तर पर आगे बढ़ाया जा सकता है। उन्होंने छात्रों से आग्रह किया कि वे पारंपरिक व्यवसायों में तकनीक और नए विचारों को शामिल करें ताकि वे रोज़गार खोजने वाले नहीं, बल्कि रोजगार देने वाले बन सकें।

कॉन्क्लेव की मुख्य अतिथि हरप्रीत कांग, अध्यक्ष, लुधियाना मैनेजमेंट एसोसिएशन रहीं। उन्होंने भारत की सांस्कृतिक विरासत और लचीलापन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि “भारत भले ही 78 साल का राष्ट्र है, लेकिन यह 5000 साल पुरानी सभ्यता है जिसने हमेशा नए रास्ते खोजे हैं।” उन्होंने पारिवारिक व्यवसायों में आने वाली आंतरिक चुनौतियों—मतभेद और दृष्टिकोणों के अंतर—पर भी चर्चा की और कहा कि स्पष्ट संवाद ही इन चुनौतियों को पार करने की कुंजी है।

पहले सत्र “थिंक ग्लोबल, एक्ट लोकल: ग्लोबल मार्केट में जीत” में स्थानीय जड़ों को मजबूत रखते हुए अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा में सफल होने की रणनीतियों पर विचार-विमर्श हुआ। प्रो. कौस्तव घोष, डीन (अकादमिक्स), आईआईएम रोहतक ने कहा कि पीढ़ियों के बीच संवाद और अपेक्षाओं का संतुलन बनाए रखना पारिवारिक व्यवसायों की निरंतरता के लिए आवश्यक है।

दूसरे सत्र “परंपरागतता और बदलाव में संतुलन” में उत्तराधिकार योजना, पेशेवर प्रबंधन और पारिवारिक संबंधों के संतुलन पर चर्चा हुई। निष्कर्ष में वक्ताओं ने कहा कि नवाचार और अगली पीढ़ी की दृष्टि को अपनाना ही स्थायी विकास की कुंजी है।

तीसरे सत्र “शिफ्टिंग ट्रेड विंड्स: टैरिफ, सप्लाई चेन और रणनीतिक विकल्प” में अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक नीतियों के बदलते प्रभावों और घरेलू उद्योगों को मज़बूत बनाने के उपायों पर चर्चा हुई। इसमें नवाचार, वित्तीय साधनों और नीति-समर्थन के माध्यम से सप्लाई चेन को सुदृढ़ बनाने पर बल दिया गया।

कॉन्क्लेव का समापन सचित जैन, अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक, वर्धमान स्पेशल स्टील्स लिमिटेड के संबोधन से हुआ। उन्होंने प्रतिभागियों से कहा कि वे यहां प्राप्त सीख को अपने पेशेवर और शैक्षणिक जीवन में लागू करें। समापन अवसर पर प्रो. धीरज शर्मा ने सभी प्रतिभागियों और सहयोगियों का आभार जताते हुए कार्यक्रम की सफलता की घोषणा की।

आईआईएम रोहतक, जो राष्ट्रीय महत्व का संस्थान है, वर्तमान में लगभग 1800 छात्रों को प्रवेश देता है और AMBA मान्यता प्राप्त है। संस्थान को QS विश्व रैंकिंग में 151+ स्थान और NIRF भारत रैंकिंग 2024 में 19वां स्थान प्राप्त है, जो इसे देश के अग्रणी प्रबंधन संस्थानों में स्थापित करता है।

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