खर्च नहीं उठा सकते तो मत भेजे अपने बच्चों को विदेश पढ़ने

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खर्च नहीं उठा सकते तो मत भेजे अपने बच्चों को विदेश पढ़ने

विदेश जाकर पढ़ाई करना आजकल एक फैशन और सामाजिक स्टेटस का प्रतीक बन गया है। कई बार माता-पिता अपनी आर्थिक स्थिति को नज़रअंदाज़ करते हुए सिर्फ समाज में ‘इमेज’ बनाने के लिए बच्चों को विदेश भेज देते हैं। लेकिन सच्चाई यह है कि विदेश में पढ़ाई का खर्च बेहद ज़्यादा होता है—कॉलेज फीस, हॉस्टल, खाने-पीने, यात्रा और मेडिकल इंश्योरेंस तक सब कुछ डॉलर या पाउंड में होता है, जो भारतीय रुपये में कई गुना महंगा पड़ता है।

कई बार छात्र आर्थिक तंगी के कारण पढ़ाई के साथ-साथ पार्ट-टाइम नौकरी करने को मजबूर हो जाते हैं, जिससे न पढ़ाई ढंग से हो पाती है और न ही मानसिक शांति मिलती है। कुछ मामलों में तो छात्र अवसाद में चले जाते हैं या गलत रास्ते पकड़ लेते हैं।

इसलिए यदि आपकी आर्थिक स्थिति मजबूत नहीं है, तो केवल दिखावे के लिए अपने बच्चों को विदेश न भेजें। भारत में भी आज उच्च गुणवत्ता की शिक्षा उपलब्ध है। सही योजना और सोच से बच्चों का भविष्य यहां भी संवर सकता है। पढ़ाई जीवन संवारने का ज़रिया है, दिखावे का नहीं।