एमडीयू में लगा हास्य का तड़का, कवियों ने श्रोताओं के गुदगुदाया

- एमडीयू के स्वर्ण जयंती समारोह में हास्य कवि सम्मेलन

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एमडीयू में लगा हास्य का तड़का, कवियों ने श्रोताओं के गुदगुदाया
एमडीयू में लगा हास्य का तड़का, कवियों ने श्रोताओं के गुदगुदाया

एमडीयू में लगा हास्य का तड़का, कवियों ने श्रोताओं के गुदगुदाया

- एमडीयू के स्वर्ण जयंती समारोह में हास्य कवि सम्मेलन

टीएचटी न्यूज, रोहतक

महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय के टैगोर सभागार में विश्वविद्यालय के 50वें स्थापना दिवस की संध्या पर हास्य कवि सम्मेलन आयोजित किया गया। देशभर से आए हास्य कवियों ने अपनी चुटीली कविताओं तथा हास्य और व्यंग्य भरी रचनाओं से श्रोताओं को खूब गुदगुदाया, हंसाया और मंत्रमुग्ध किया।

एमडीयू कुलपति प्रो. राजबीर सिंह ने प्रारंभ में हास्य कवि सम्मेलन का शुभारंभ करते हुए कहा कि हास्य का जीवन में विशेष महत्व है। हरियाणा की बात करें तो हरियाणा की जमीन पर हास्य हर रंग में रचा-बसा है, हरियाणवी आदमी के रग-रग में हास्य शामिल है। उन्होंने कहा कि हास्य कवि सम्मेलन न केवल मनोरंजन का माध्यम है, बल्कि समाज में सकारात्मक ऊर्जा और संवाद का भी संचार करता है।

हास्य कवि सम्मेलन में प्रतिष्ठित कवियों- शम्भू शिखर, डा. जगबीर राठी, पद्मिनी शर्मा, विनीत चौहान, महेन्द्र अजनबी, वेद प्रकाश वेद तथा सुन्दर कटारिया ने अपनी अनोखी रचनाओं और अंदाज से उपस्थित जन को खूब लोट-पोट किया। हर एक कवि की प्रस्तुति ने श्रोताओं की तालियों और ठहाकों से माहौल को जीवंत कर दिया। विशेष रूप से शम्भू शिखर के व्यंग्य, डा. जगबीर राठी की हरियाणवी शैली और पद्मिनी शर्मा की चुटीली कविताओं ने दर्शकों को खूब आनंदित किया।

डीन, स्टूडेंट वेलफेयर प्रो. रणदीप राणा ने इस कार्यक्रम का संयोजन किया। सहायक निदेशक युवा कल्याण डा. प्रताप राठी ने कार्यक्रम का समन्वयन किया। छात्र कल्याण कर्मी नरेश अहलावत ने स्टेज संचालन सहयोग दिया। इस अवसर पर डीन, एकेडमिक एफेयर्स प्रो. ए.एस. मान, परीक्षा नियंत्रक प्रो. गुलशन लाल तनेजा समेत एमडीयू के डीन, विभागाध्यक्ष, प्राध्यापक, शोधार्थी, विद्यार्थी, गैर शिक्षक कर्मी एवं शहर के गणमान्यजन उपस्थित रहे।

विनीत चौहान ने सैनिकों की वीरगाथा से कराया अवगत

प्रतिष्ठित वीर रस कवि विनीत चौहान ने कारगिल की लड़ाई पर कविता-गोलियों को झेलते थे वीर सैनिकों के वक्ष, कारगिल घाटी मौत वाली घाटी हो गई, रणबांकुरों का रक्त जहां जहां गिर गया, चंदन से ज्यादा वो पवित्र माटी हो गई, सुनाकर देश के सैनिकों के पराक्रम और वीरगाथा से युवा पीढ़ी को अवगत करवाया और उपस्थित जन की आंखों को नम कर दिया।

जगबीर राठी ने ठेठ हरियाणवी बोली पर दी प्रस्तुति

डा. जगबीर राठी की ठेठ हरियाणवी बोली में हास्य की प्रस्तुति ने सभागार को देर तक गुंजायमान रखा। डा. जगबीर राठी ने- एक खटोला जेल के भीतर, जिस्प बैठ भगत सिंह सरदार, डर्या नहीं वो झुका नहीं, भारत मां से करता प्यार, बंदूक बोई अपने खेत म, देश का सच्चा पहरेदार की भावपूर्ण प्रस्तुति देकर कहा कि जेल में खटौला हो तो शहीद भगत सिंह की तरह देश के लिए हो। उन्होंने देशभक्ति के साथ अपनी रचनाओं में व्यंग्य और हंसी का तडक़ा लगाते हुए कहा कि आधुनिक प्यार पर कटाक्ष करते हुए कहा- दस्तुर ये इश्क का बदलना चाहिए, गम दोनों को बराबर मिलना चाहिए, तमाशा बनकर रह गया सरेआम मजनू, अब लैला को भी घर से निकलना चाहिए।

शंभु शिखर ने व्यवस्था पर किया हास्य से प्रहार

शम्भु शिखर ने अपने तीखे व्यंग्य और हास्य से व्यवस्था पर करारा प्रहार करते हुए दर्शकों को गुदगुदाया। महेन्द्र अजनबी ने कहा- सब कुछ लुटा दिया तेरे प्यार में सितमगर, एक भैंस बच गई थी आज बेच दी है और सीप जैसी खूबसूरत है तुम्हारी आंखें, जी करता है फोड़ कर मोती निकाल दूं।

उसका चेहरा मुस्लसल निगाहों में हैं : पद्मिनी शर्मा

प्रेम एवं श्रृंगार की कवि पद्मिनी शर्मा ने अपनी मधुर आवाज में- उसका चेहरा मुस्लसल निगाहों में है, रोशनी हर कदम मेरी राहों में है, उससे बिछड़े एक अरसा हुआ, अब भी लगता है जैसे वो बाहों में है तथा प्यार के गीत की एक कड़ी रह गई, उसके तस्वीर दिल में जड़ी रह गई, वो मुझे जिस जगह पर गया छोडक़र, उम्र भर उस जगह मैं खड़ी रह गई समेत अन्य मनमोहक रचनाएं सुनाई।

वेद प्रकाश ने श्रोताओं में किया नई ऊर्जा का संचार

वेद प्रकाश वेद की अनुभवी कलम से निकले शब्दों ने श्रोताओं को हंसी के साथ सोचने पर भी मजबूर किया। सुन्दर कटारिया की हास्य कविता ने श्रोताओं में नई ऊर्जा का संचार किया। हर कवि ने अपनी विशिष्ट शैली में समाज, राजनीति, रिश्तों और जीवन के हल्के-फुल्के पलों पर ऐसी हास्य और व्यंग्य से भरपूर रचनाएँ प्रस्तुत कीं, जिनसे श्रोताओं के चेहरे खिल उठे।

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