भीड़ में अकेलेपन की पीड़ा को मंच पर जीवंत करता ‘बियोंड द इमेजिनेशन’

- महानगरीय जीवन की असुरक्षा, आत्मसंघर्ष और पहचान की तलाश को छात्रों ने किया प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत

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भीड़ में अकेलेपन की पीड़ा को मंच पर जीवंत करता ‘बियोंड द इमेजिनेशन’

भीड़ में अकेलेपन की पीड़ा को मंच पर जीवंत करता ‘बियोंड द इमेजिनेशन’

- सुपवा में तीन दिवसीय नाट्य महोत्सव का दूसरा दिन, आज होंगे अंतिम दो शो

- महानगरीय जीवन की असुरक्षा, आत्मसंघर्ष और पहचान की तलाश को छात्रों ने किया प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत

टीएचटी न्यूज, रोहतक :

दादा लख्मी चंद स्टेट यूनिवर्सिटी ऑफ परफॉर्मिंग एंड विजुअल आर्ट्स (डीएलसीसुपवा) के फिल्म एवं टेलीविजन फैकल्टी (एफटीवी) स्थित मिनी ऑडिटोरियम में चल रहे तीन दिवसीय नाट्य मंचन ‘बियोंड द इमेजिनेशन’ के दूसरे दिन दर्शकों ने एक संवेदनशील और विचारोत्तेजक प्रस्तुति का अनुभव किया। नाटक में महानगर की भीड़भाड़ के बीच एक संवेदनशील और बुद्धिजीवी व्यक्ति के भीतर पनप रहे अकेलेपन, असुरक्षा और आत्मसंघर्ष को प्रभावशाली ढंग से मंचित किया गया।

प्रसिद्ध साहित्यकार महेश एलकुंचवार के चर्चित मराठी नाटक ‘प्रतिबिंब’ पर आधारित इस प्रस्तुति में छात्रों ने सामाजिक मुखौटों और वास्तविक पहचान के बीच चल रहे द्वंद्व को जीवंत अभिनय के माध्यम से दर्शाया। नाटक ने दर्शकों को यह सोचने पर मजबूर किया कि आधुनिक जीवन की चकाचौंध के पीछे व्यक्ति किस प्रकार मानसिक और भावनात्मक संघर्षों से गुजरता है।

छात्र कलाकारों की अदाकारी ने बांधा समां

नाटक के मुख्य पात्रों की भूमिका एक्टिंग विभाग के चौथे सेमेस्टर के छात्र भारती, प्रिंस और पुष्कर ने निभाई। उनके अभिनय ने दर्शकों को पात्रों की मनोस्थिति और भावनात्मक संघर्षों से जोड़ने में सफलता हासिल की।

मुंबई से आए विशेषज्ञों के मार्गदर्शन में हुई लंबी रिहर्सल का असर मंचन में स्पष्ट दिखाई दिया। मंच सज्जा, प्रकाश व्यवस्था, ध्वनि और अभिनय के समन्वय ने प्रस्तुति को पेशेवर रंगमंच का स्वरूप प्रदान किया।

हरियाणा कला परिषद के पदाधिकारियों ने की सराहना

 शो में हरियाणा कला परिषद के उपाध्यक्ष महेश जोशी ने बतौर मुख्य अतिथि शिरकत की, जबकि बुधवार को अतिरिक्त निदेशक बिंदर दनोदा और गगन हरियाणवी ने छात्रों का उत्साहवर्धन किया।

आज होंगे अंतिम दो शो

नाटक का समापन गुरुवार को दो अंतिम प्रस्तुतियों के साथ होगा। दोनों शो दोपहर 3:30 बजे और शाम 6:30 बजे एफटीवी मिनी ऑडिटोरियम में आयोजित किए जाएंगे। कला, रंगमंच और साहित्य प्रेमियों के लिए प्रवेश पूरी तरह निशुल्क रखा गया है।

अनुभवी कलाकारों की टीम ने संभाली जिम्मेदारी

नाटक का निर्देशन राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय (NSD) से स्नातक सुशील कांत ने किया है। प्रोडक्शन डिजाइन बिपिन गोबाले, कॉस्ट्यूम डिजाइन पाली फुकॉन, हिंदी अनुवाद वसंत देव तथा साउंड डिजाइन दीपा वर्मा द्वारा तैयार किया गया।

इस अवसर पर डीएलसीसुपवा के कुलगुरु डॉ. अमित आर्य, डीन एकेडमिक अफेयर्स डॉ. अजय कौशिक, एफटीवी फैकल्टी कोऑर्डिनेटर महेश टीपी, विजुअल आर्ट्स फैकल्टी कोऑर्डिनेटर विनय कुमार और डिजाइन फैकल्टी कोऑर्डिनेटर डॉ. शैली खन्ना सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।

नाटक देखने पहुंचे कला और रंगमंच प्रेमियों ने छात्रों की जीवंत प्रस्तुति और संवेदनशील अभिनय की सराहना करते हुए इसे एक यादगार नाट्य अनुभव बताया।

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