केंद्रीय बजट 2025-26 में हरियाणा की अनदेखी, जनता को भी नहीं मिली राहत: भूपेंद्र सिंह हुड्डा
- किसान, मजदूर, शिक्षा-स्वास्थ्य सब उपेक्षित; बजट को बताया खोखला और जनविरोधी
केंद्रीय बजट 2025-26 में हरियाणा की अनदेखी, जनता को भी नहीं मिली राहत: भूपेंद्र सिंह हुड्डा
- किसान, मजदूर, शिक्षा-स्वास्थ्य सब उपेक्षित; बजट को बताया खोखला और जनविरोधी
टीएचटी न्यूज, रोहतक ।
पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने केंद्रीय बजट 2025-26 को हरियाणा के साथ खुला सौतेला व्यवहार करार देते हुए कहा कि इस बजट में राज्य को पूरी तरह खाली हाथ रखा गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि बजट न केवल हरियाणा बल्कि आम आदमी, किसान, मजदूर और ग्रामीण समाज—सभी के लिए निराशाजनक साबित हुआ है।
पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए हुड्डा ने कहा कि यह बजट जनता की उम्मीदों पर बिल्कुल खरा नहीं उतरता। महंगाई से राहत देने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया और इनकम टैक्स में भी आम नागरिक को कोई राहत नहीं दी गई। उन्होंने कहा कि सरकार क्रिप्टो करेंसी पर टैक्स तो वसूल रही है, लेकिन अब तक यह स्पष्ट नहीं किया गया कि इसे वैध माना जाए या अवैध, जो नीति-निर्धारण में गंभीर असमंजस को दर्शाता है।
शिक्षा और स्वास्थ्य बजट में लगातार गिरावट
हुड्डा ने शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र की उपेक्षा को बेहद चिंताजनक बताया। उन्होंने कहा कि 2002-03 में शिक्षा पर जीडीपी का 2.3 प्रतिशत खर्च किया जाता था, जो अब घटकर मात्र 1.1 प्रतिशत रह गया है। इसी तरह 2017 में स्वास्थ्य पर जीडीपी का 2.5 प्रतिशत खर्च करने का लक्ष्य तय किया गया था, लेकिन मौजूदा बजट में यह 1 प्रतिशत से भी नीचे है। उन्होंने आरोप लगाया कि इन दोनों बुनियादी क्षेत्रों में लगातार कटौती की जा रही है।
किसानों को बजट से कोई सहारा नहीं
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि बजट में किसानों को पूरी तरह नजरअंदाज किया गया है। न तो कर्जमाफी की कोई व्यवस्था की गई और न ही स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों के अनुरूप न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) तय करने का कोई संकेत दिया गया। उन्होंने कहा कि किसान पहले से ही आर्थिक संकट में हैं, लेकिन केंद्र सरकार ने उनकी समस्याओं पर आंखें मूंद ली हैं।
सामाजिक और विकास योजनाओं में भारी कटौती
हुड्डा ने बताया कि विभिन्न विभागों के बजट में भारी कटौती की गई है। ग्रामीण विकास, शहरी विकास, सामाजिक कल्याण, कृषि, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे अहम क्षेत्रों में हजारों करोड़ रुपये घटाए गए हैं। इसके अलावा राजस्व व्यय में 75,168 करोड़ रुपये की कमी आई है, जबकि पूंजीगत व्यय में भी केंद्र और राज्यों—दोनों स्तरों पर बड़ी कटौती की गई है।
मनरेगा पर संकट के बादल
हुड्डा ने आशंका जताई कि केंद्र सरकार मनरेगा जैसी महत्वपूर्ण योजना को धीरे-धीरे समाप्त करने की तैयारी में है। उन्होंने कहा कि यह योजना दलितों, पिछड़ों और ग्रामीण गरीबों के लिए जीवनरेखा है और इसे कमजोर करना सामाजिक न्याय पर सीधा हमला होगा।
अंत में भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा कि यह बजट बीजेपी की जनविरोधी नीतियों का आईना है। बेरोजगारी, महंगाई और आर्थिक असमानता से जूझ रही जनता को इस बजट से कोई राहत नहीं मिली और हरियाणा के साथ एक बार फिर अन्याय किया गया है।
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