राज्यपाल प्रो. असीम कुमार घोष ने एमडीयू फैकल्टी क्लब में स्वर्ण जयंती स्मारिका का लोकार्पण किया

-शिक्षकों से किया संवाद, विश्वविद्यालय की प्रगति में शिक्षकों की भूमिका को बताया अत्यंत महत्वपूर्ण

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राज्यपाल प्रो. असीम कुमार घोष ने एमडीयू फैकल्टी क्लब में स्वर्ण जयंती स्मारिका का लोकार्पण किया

राज्यपाल प्रो. असीम कुमार घोष ने एमडीयू की स्वर्ण जयंती स्मारिका का लोकार्पण किया, शिक्षकों को बताया विश्वविद्यालय की आत्मा

टीएचटी न्यूज | रोहतक

हरियाणा के राज्यपाल एवं महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय (एमडीयू) के कुलाधिपति प्रो. असीम कुमार घोष ने रविवार को विश्वविद्यालय के फैकल्टी क्लब में आयोजित एक गरिमामयी समारोह में एमडीयू की स्वर्ण जयंती स्मारिका का लोकार्पण किया। इस अवसर पर हरियाणा की प्रथम महिला मित्रा घोष भी उपस्थित रहीं, जिनका विश्वविद्यालय परिवार ने हार्दिक स्वागत किया।

कार्यक्रम में कुलपति प्रो. राजबीर सिंह, कुलसचिव डॉ. कृष्णकांत, डीन एकेडमिक अफेयर्स प्रो. एस.सी. मलिक, फैकल्टी क्लब की अध्यक्षा प्रो. सीमा सिंह सहित विश्वविद्यालय के विभिन्न संकायों के डीन, निदेशक, विभागाध्यक्ष और बड़ी संख्या में शिक्षक उपस्थित रहे।

राज्यपाल प्रो. असीम कुमार घोष ने अपने संबोधन में कहा कि “शिक्षक किसी भी विश्वविद्यालय की आत्मा होते हैं।” उन्होंने कहा कि एमडीयू अब अपने स्वर्णिम दौर में प्रवेश कर चुका है, और यह समय विश्वविद्यालय के लिए आत्ममंथन और नई दिशा तय करने का है। उन्होंने शिक्षकों से आग्रह किया कि वे विद्यार्थियों में नवाचार, नैतिकता और राष्ट्रीय मूल्यों की भावना को विकसित करें ताकि शिक्षा केवल रोजगार का माध्यम न रहकर समाज निर्माण का भी आधार बने।

राज्यपाल ने कहा कि विश्वविद्यालय केवल ज्ञान का केंद्र नहीं, बल्कि राष्ट्र के चरित्र निर्माण की प्रयोगशाला होता है। उन्होंने शिक्षकों को प्रेरित करते हुए कहा कि बदलते वैश्विक परिदृश्य में शिक्षा को जीवन मूल्यों, तकनीकी दक्षता और मानवीय संवेदनाओं के साथ जोड़ा जाना आवश्यक है।

स्वर्ण जयंती स्मारिका का लोकार्पण करते हुए प्रो. घोष ने कहा कि यह प्रकाशन एमडीयू की 50 वर्ष की गौरवशाली यात्रा का दर्पण है। यह केवल उपलब्धियों का दस्तावेज़ नहीं, बल्कि आने वाले वर्षों के लिए प्रेरणा स्रोत भी है। उन्होंने विश्वविद्यालय के शिक्षकों और प्रशासन की सराहना करते हुए कहा कि एमडीयू ने प्रदेश ही नहीं, देश की उच्च शिक्षा में उत्कृष्टता की नई मिसालें कायम की हैं।

इस अवसर पर कुलपति प्रो. राजबीर सिंह ने राज्यपाल एवं कुलाधिपति का स्वागत करते हुए कहा कि प्रो. घोष का मार्गदर्शन विश्वविद्यालय समुदाय के लिए ऊर्जा और प्रेरणा का स्रोत है। उन्होंने बताया कि एमडीयू अपने स्वर्ण जयंती वर्ष में नवाचार, अनुसंधान, सामाजिक उत्तरदायित्व और वैश्विक दृष्टि के विस्तार के लिए अनेक नई पहल कर रहा है।

कुलसचिव डॉ. कृष्णकांत ने आभार प्रस्ताव प्रस्तुत करते हुए कहा कि राज्यपाल का स्नेह, प्रेरणा और मार्गदर्शन विश्वविद्यालय परिवार के लिए अमूल्य है। उन्होंने कहा कि स्मारिका का लोकार्पण विश्वविद्यालय के गौरवशाली इतिहास और भावी संकल्पों का प्रतीक है।

समारोह के दौरान फैकल्टी क्लब परिसर में राज्यपाल दंपति का शिक्षकों ने आत्मीय स्वागत किया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय परिवार ने संकल्प लिया कि एमडीयू शिक्षा, अनुसंधान और सामाजिक प्रतिबद्धता के क्षेत्र में नई ऊँचाइयाँ हासिल करेगा और राज्यपाल के मार्गदर्शन में "ज्ञान और संस्कार" के आदर्शों को आगे बढ़ाएगा।

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