दिल्ली में कांग्रेस की ‘वोट चोर, गद्दी छोड़’ रैली: हरियाणा के नेताओं की साख दांव पर, भीड़ जुटाना बना सबसे बड़ी चुनौती
NCR में कांग्रेस के कमजोर विधायकों की संख्या ने बढ़ाई परेशानी; हुड्डा, सैलजा, सुरजेवाला और चौधरी बीरेंद्र–बृजेंद्र सिंह पर है सबसे बड़ी जिम्मेदारी
दिल्ली में कांग्रेस की ‘वोट चोर, गद्दी छोड़’ रैली: हरियाणा के नेताओं की साख दांव पर, भीड़ जुटाना बना सबसे बड़ी चुनौती
- NCR में कांग्रेस के कमजोर विधायकों की संख्या ने बढ़ाई परेशानी; हुड्डा, सैलजा, सुरजेवाला और चौधरी बीरेंद्र–बृजेंद्र सिंह पर है सबसे बड़ी जिम्मेदारी
ओपी वशिष्ठ, रोहतक :
कांग्रेस पार्टी 14 दिसंबर को दिल्ली में अपनी बड़ी राजनीतिक रैली—**‘वोट चोर, गद्दी छोड़’—**आयोजित करने जा रही है। यह रैली पार्टी के लिए केवल शक्ति प्रदर्शन भर नहीं, बल्कि 2024 के बाद अपनी राजनीतिक ज़मीन दोबारा मजबूत करने की रणनीति का हिस्सा भी मानी जा रही है। राहुल गांधी द्वारा बिहार विधानसभा चुनाव से पहले चलाए गए अभियान की तर्ज पर यह रैली कांग्रेस हाईकमान के लिए एक परीक्षण के रूप में देखी जा रही है।
एनसीआर के जिलों पर रहेगी भीड़ जुटाने की जिम्मेदारी
दिल्ली में आयोजित होने वाली किसी भी रैली का अर्थ यह होता है कि भीड़ जुटाने की सबसे बड़ी जिम्मेदारी **NCR के जिलों—फरीदाबाद, गुरुग्राम, सोनीपत, पलवल, नूहं, रोहतक और झज्जर—**पर आती है। लेकिन इस बार कांग्रेस की स्थिति इन जिलों में बेहद कमजोर है। फरीदाबाद और गुरुग्राम जैसे बड़े शहरों में कांग्रेस का एक भी विधायक नहीं है। सोनीपत में एक, पलवल में एक, नूहं में तीन, जबकि रोहतक में चार और झज्जर में तीन विधायक हैं। इस वजह से NCR से भारी भीड़ जुटाना कांग्रेस के लिए मुश्किल चुनौती बन गया है। फिलहाल 14 दिसंबर की यह रैली न केवल दिल्ली की राजनीतिक गर्मी बढ़ाएगी, बल्कि हरियाणा कांग्रेस के आंतरिक समीकरणों को भी नया मोड़ दे सकती है।
गुलाबी पगड़ी पर रहेगी हर किसी की नजर
यह रैली खास तौर पर हरियाणा कांग्रेस के बड़े नेताओं की साख से जुड़ी हुई है। पूर्व मुख्यमंत्री और पूर्व नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा इस तरह के आयोजनों में परंपरागत रूप से सबसे ज्यादा समर्थक लाने वाले नेता माने जाते रहे हैं। NCR खासकर रोहतक–झज्जर क्षेत्र में हुड्डा की पकड़ मजबूत रही है। हुड्डा गुट की पहचान गुलाबी पगड़ी या गुलाबी पटका भी रही है, जिसे विपक्ष और पार्टी का हुड्डा-विरोधी गुट अक्सर “गुलाबी गैंग” कहकर संबोधित करता रहा है। रैली में इस बात पर भी खास निगाहें होंगी कि किस नेता के समर्थक कितनी संख्या में पहुंचे। कांग्रेस के भीतर यह भी चर्चा है कि इस बार समर्थकों की पहचान के लिए कुछ अलग तरीका अपनाया जा सकता है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि दिल्ली की रैली में किस नेता ने कितना योगदान दिया।
कांग्रेस के बड़े नेताओं की साख दांव पर
इसके अलावा कांग्रेस की राष्ट्रीय नेता और सिरसा सांसद कुमारी सैलजा, राजस्थान से राज्यसभा सदस्य रणदीप सिंह सुरजेवाला, जींद–हिसार से जुड़े वरिष्ठ नेता चौधरी बीरेंद्र सिंह और उनके पुत्र पूर्व सांसद बृजेंद्र सिंह, तथा प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राव नरेंद्र सिंह भी इस रैली की भीड़ को लेकर अपनी ताकत साबित करने की तैयारी में हैं। हर नेता यह दिखाना चाहता है कि संगठनात्मक ताकत और जनसंपर्क में कौन सबसे आगे है।
भीड़ कम रही तो भाजपा करेगी कांग्रेस पर हमला
यह रैली हरियाणा कांग्रेस के भविष्य के नेतृत्व समीकरणों पर सीधा असर डाल सकती है। राजनीतिक जानकारों के अनुसार, अगर हरियाणा से भारी भीड़ पहुंचती है, तो यह हाईकमान के सामने नेताओं की ताकत को स्थापित करेगी। वहीं यदि भीड़ कम जुटी, तो यह विपक्ष और भाजपा के लिए कांग्रेस पर हमले का नया अवसर भी बना सकती है।
--------------