मनरेगा खत्म करने की साजिश के खिलाफ कांग्रेस का हुंकार, संसद से सड़क तक आंदोलन का ऐलान

कांग्रेस सांसद दीपेंद्र सिंह हुड्डा ने की रोहतक में पत्रकारवार्ता

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मनरेगा खत्म करने की साजिश के खिलाफ कांग्रेस का हुंकार, संसद से सड़क तक आंदोलन का ऐलान

मनरेगा खत्म करने की साजिश के खिलाफ कांग्रेस का हुंकार, संसद से सड़क तक आंदोलन का ऐलान

- कांग्रेस सांसद दीपेंद्र सिंह हुड्डा ने की रोहतक में पत्रकारवार्ता

टीएचटी न्यूज, रोहतक :

कांग्रेस ने मनरेगा योजना को कमजोर कर अंततः समाप्त करने की साजिश का आरोप लगाते हुए भाजपा सरकार पर जोरदार हमला बोला है। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि भाजपा सरकार ने पहले मनरेगा को धीरे-धीरे कमजोर किया और अब इसे खत्म करने की दिशा में निर्णायक कदम उठा लिए हैं। भगवान राम करोड़ों भारतीयों के आराध्य हैं, लेकिन उनके नाम पर गरीबों का निवाला छीना जाना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। महात्मा गांधी से बड़ा रामभक्त कोई नहीं हो सकता, जिनके अंतिम शब्द भी ‘हे राम’ थे।

कांग्रेस ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार ने न केवल महात्मा गांधी के नाम को योजना से हटाया, बल्कि मनरेगा का बजट घटाकर मजदूरों के अधिकार भी छीने हैं। कांग्रेस पार्टी मनरेगा मजदूरों के अधिकारों की रक्षा के लिए मजबूती से खड़ी है और ‘मनरेगा बचाओ संग्राम’ के तहत संसद से लेकर सड़क तक संघर्ष करेगी।

सांसद दीपेन्द्र हुड्डा ने कहा कि पहले मनरेगा पूरी तरह डिमांड आधारित योजना थी। कानून के तहत बजट की कोई सीमा नहीं थी और जितने मजदूर काम मांगते थे, उतना काम और बजट देना केंद्र सरकार की जिम्मेदारी थी। लेकिन नए कानून में यह अधिकार खत्म कर दिया गया है। अब केंद्र सरकार तय करेगी कि किस राज्य को कितना बजट मिलेगा और अगर बजट खत्म हो गया तो मजदूरों को रोजगार नहीं मिलेगा।

उन्होंने बताया कि हरियाणा में 8 लाख से अधिक मनरेगा मजदूर पंजीकृत हैं, लेकिन वर्ष 2024-25 में केवल 2,191 परिवारों को ही 100 दिन का काम मिला। वर्ष 2019 के बाद से हरियाणा में एक भी मजदूर को बेरोजगारी भत्ता नहीं दिया गया, जबकि कानून में इसका स्पष्ट प्रावधान है।

दीपेन्द्र हुड्डा ने कहा कि यूपीए सरकार के समय देश में औसतन 100 दिन के करीब रोजगार मिलता था, जो भाजपा शासन में घटकर 48 दिन रह गया है। इसके बावजूद भाजपा 125 दिन रोजगार देने का दावा कर रही है। मनरेगा बजट 2020-21 में 1.11 लाख करोड़ रुपये था, जिसे 2024-25 में घटाकर 85,839 करोड़ कर दिया गया। हरियाणा का बजट भी 764 करोड़ से घटकर 590 करोड़ रह गया है।

उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने अपना हिस्सा 100% से घटाकर 60% कर दिया और 40% बोझ राज्यों पर डाल दिया, जिससे पहले से कर्ज में डूबा हरियाणा और संकट में आ गया है। नए VB GRAM G कानून के तहत ग्राम पंचायतों के अधिकार भी छीन लिए गए हैं और सारे ग्रामीण कार्य अब केंद्र के ‘PM Gati Shakti National Master Plan’ पर निर्भर होंगे, जिससे पंचायती व्यवस्था कमजोर हो रही है।

दीपेन्द्र हुड्डा ने हरियाणा में एचपीएससी भर्तियों का मुद्दा उठाते हुए कहा कि ग्रुप-A, B, C की नौकरियों में बड़े पैमाने पर बाहरी उम्मीदवारों का चयन हो रहा है, जबकि हरियाणा के युवाओं और आरक्षित वर्गों के साथ अन्याय किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के युवा बेरोजगारी और पलायन के लिए मजबूर हैं, जबकि भाजपा सरकार पूरी तरह विफल साबित हुई है।

पत्रकार वार्ता के दौरान प्रमुख रूप से विधायक बीबी बतरा, विधायक शकुंतला खटक, विधायक बलराम दांगी, पूर्व मंत्री आनंद सिंह दांगी, पूर्व मंत्री सुभाष बत्रा, प्रोफेसर वीरेंद्र सिंह, चक्रवर्ती शर्मा, जयदीप धनखड़, जिलाध्यक्ष बलवान रंगा, जिलाध्यक्ष कुलदीप केडी, सूरजमल किलोई, सूरजमल रोज, गुलशन ईशपुनियानी आदि मौजूद रहे।

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