पारंपरिक बुनाई और हथकरघा कौशल से बढ़ेंगे रोजगार के अवसर: उपायुक्त सचिन गुप्ता

बोहर में समर्थ योजना के तहत 45 दिवसीय बुनकर प्रशिक्षण शिविर का शुभारंभ, 25 महिलाओं को मिलेगा प्रशिक्षण; उपायुक्त और संयुक्त आयुक्त हेना सुखना ने स्वयं भी सीखे बुनाई व कताई के गुर

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पारंपरिक बुनाई और हथकरघा कौशल से बढ़ेंगे रोजगार के अवसर: उपायुक्त सचिन गुप्ता

पारंपरिक बुनाई और हथकरघा कौशल से बढ़ेंगे रोजगार के अवसर: उपायुक्त सचिन गुप्ता

- बोहर में समर्थ योजना के तहत 45 दिवसीय बुनकर प्रशिक्षण शिविर का शुभारंभ, 25 महिलाओं को मिलेगा प्रशिक्षण; उपायुक्त और संयुक्त आयुक्त हेना सुखना ने स्वयं भी सीखे बुनाई व कताई के गुर

टीएचटी न्यूज, रोहतक :

उपायुक्त सचिन गुप्ता ने कहा कि पारंपरिक बुनाई और हथकरघा कला केवल सांस्कृतिक विरासत ही नहीं, बल्कि रोजगार सृजन का प्रभावी माध्यम भी है। इन विलुप्त होती पारंपरिक कलाओं को पुनर्जीवित कर महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के साथ-साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर विकसित किए जा सकते हैं।

उपायुक्त ने आयकर विभाग की संयुक्त आयुक्त हेना सुखना के साथ रविवार को बोहर गांव स्थित जुगल भवन में केंद्रीय वस्त्र मंत्रालय के विकास आयुक्त (हथकरघा) कार्यालय के माध्यम से बुनकर सेवा केंद्र, पानीपत द्वारा समर्थ योजना के तहत आयोजित 45 दिवसीय बुनाई प्रशिक्षण शिविर का शुभारंभ किया। इस दौरान उन्होंने प्रशिक्षणार्थियों से संवाद किया और स्वयं लूप पर बुनाई का कार्य सीखा, जबकि हेना सुखना ने पारंपरिक चरखे पर रेजे की कताई कर प्रशिक्षण गतिविधियों का अवलोकन किया।

उपायुक्त ने कहा कि प्राकृतिक रेशों से तैयार पारंपरिक वस्त्र स्वास्थ्य के लिए लाभकारी होते हैं। ये पूरी तरह ब्रेथेबल होने के कारण गर्मी के मौसम में अधिक आरामदायक रहते हैं और इनमें एंटी-माइक्रोबियल गुण भी पाए जाते हैं। उन्होंने कहा कि आधुनिक समय में इन उत्पादों की उपयोगिता लगातार बढ़ रही है।

उन्होंने बताया कि 27 जुलाई से 19 सितंबर 2026 तक चलने वाले इस प्रशिक्षण शिविर में 25 महिलाओं ने पंजीकरण कराया है। प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद महिलाएं स्वरोजगार शुरू करने के साथ अन्य लोगों को भी प्रशिक्षित कर सकेंगी। इससे कोट, साड़ी और अन्य पारंपरिक वस्त्रों के निर्माण के जरिए स्थानीय स्तर पर रोजगार की मजबूत श्रृंखला विकसित होगी।

सचिन गुप्ता ने कहा कि भारतीय हस्तकरघा उत्पादों की मांग देश ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी है। यदि गुणवत्ता और प्रशिक्षण पर विशेष ध्यान दिया जाए तो यह क्षेत्र विशेषकर महिलाओं के लिए स्थायी आजीविका का सशक्त माध्यम बन सकता है। उन्होंने इस क्षेत्र में कार्यरत विशेषज्ञों और संस्थाओं की सराहना करते हुए कहा कि उनके प्रयासों से विलुप्त होती पारंपरिक कला को नई पहचान मिल रही है।

कार्यक्रम के दौरान प्रशिक्षक ललिता ने उपायुक्त सचिन गुप्ता और संयुक्त आयुक्त हेना सुखना को रेजे से तैयार शॉल एवं पौधे भेंट कर सम्मानित किया। दोनों अधिकारियों ने प्रशिक्षण प्राप्त कर रही महिलाओं को बैग वितरित किए तथा प्रशिक्षण शिविर में सहयोग करने वाले जनप्रतिनिधियों और बुनकर सेवा केंद्र के प्रतिनिधियों को भी शॉल और पौधे देकर सम्मानित किया।

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