सुपवा के छात्रों ने गांव की चौपाल को बनाया आर्ट गैलरी, ग्रामीणों तक पहुंचाई समकालीन कला
- रिठाल फौगाट गांव में पहली बार चौपाल बनी कला और संवाद का मंच; विजुअल आर्ट्स के छात्रों ने पेंटिंग, फिल्म, स्कल्पचर और इंस्टॉलेशन से जोड़ा समाज
सुपवा के छात्रों ने गांव की चौपाल को बनाया आर्ट गैलरी, ग्रामीणों तक पहुंचाई समकालीन कला
- रिठाल फौगाट गांव में पहली बार चौपाल बनी कला और संवाद का मंच; विजुअल आर्ट्स के छात्रों ने पेंटिंग, फिल्म, स्कल्पचर और इंस्टॉलेशन से जोड़ा समाज
टीएचटी न्यूज, रोहतक :
दादा लख्मी चंद स्टेट यूनिवर्सिटी ऑफ परफॉर्मिंग एंड विजुअल आर्ट्स (डीएलसीसुपवा) के छात्रों ने कला को शहरों की दीवारों से निकालकर गांव की चौपाल तक पहुंचाने का अनूठा प्रयास किया है। सुपवा के मास्टर इन विजुअल आर्ट्स फाइनल ईयर के छात्रों ने गांव रिठाल फौगाट की पारंपरिक चौपाल को आर्ट गैलरी में बदलकर कला, समुदाय और संवाद का नया मंच तैयार किया।
गिल्ड कलेक्टिव’ शीर्षक से आयोजित इस प्रदर्शनी में छात्रों हर्षुल शंकर, ज्योति, किरण सिंह, निखिल फौगाट, रश्मि और सोनी ने मिलकर अपनी रचनात्मकता का प्रदर्शन किया। तीन दिनों तक चलने वाली यह आर्ट गैलरी आम लोगों के लिए निशुल्क खुली रहेगी, जहां ग्रामीण और कला प्रेमी छात्रों की कलाकृतियों को करीब से देख सकेंगे।
प्रदर्शनी में ड्राइंग, पेंटिंग, फोटोग्राफी, इंस्टॉलेशन, प्रिंट, वीडियो आर्ट और स्कल्पचर जैसी विभिन्न कलाओं को प्रदर्शित किया गया है। इसके साथ ही कलाकार वार्ता, इंटरेक्शन सेशन, कविता पाठ और फिल्म स्क्रीनिंग जैसे कार्यक्रम भी आयोजित किए जा रहे हैं। पहले दिन निर्देशक अमन पूनिया की फिल्म ‘चूल्हा न्योंदा’ की स्क्रीनिंग की गई।
सुपवा की विजुअल आर्ट्स फैकल्टी के एफसी विनय कुमार ने बताया कि गांव की चौपाल हमेशा से सामूहिक संवाद, कहानी सुनाने और सामाजिक मेलजोल का केंद्र रही है। इसी विचार को आधार बनाकर छात्रों ने चौपाल को कला के जीवंत मंच में बदला है। उन्होंने कहा कि आमतौर पर कलाकार अपनी प्रदर्शनियों के लिए बड़े शहरों का चयन करते हैं, लेकिन यह पहला मौका है जब किसी गांव को आर्ट गैलरी के रूप में चुना गया है।
उन्होंने कहा कि यह प्रदर्शनी ग्रामीण पहचान और समकालीन कला के बीच एक नया संवाद स्थापित करती है। छात्रों ने अपनी पढ़ाई के दौरान सीखी गई विभिन्न कला विधाओं को ग्रामीण समाज के बीच प्रस्तुत कर कला को जनसामान्य से जोड़ने का प्रयास किया है। इस प्रदर्शनी के क्यूरेटर शरद और विनय केडी हैं।
डीएलसीसुपवा के कुलगुरु डॉ. अमित आर्य ने छात्रों के प्रयास की सराहना करते हुए कहा कि गांव की चौपाल को आर्ट गैलरी में बदलना सामाजिक जिम्मेदारी और रचनात्मक सोच का बेहतरीन उदाहरण है। उन्होंने कहा कि ऐसे प्रयास भविष्य में छात्रों को नई पहचान दिलाएंगे और विश्वविद्यालय के साथ प्रदेश का नाम भी रोशन करेंगे।
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