शिखर पर उपलब्धियां, धरातल पर नीतियां

- भारत की सबसे तेज पर्वतारोही रीना भट्टी ने मांगी सरकार से नौकरी और आर्थिक सहायता

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शिखर पर उपलब्धियां, धरातल पर नीतियां

शिखर पर उपलब्धियां, धरातल पर नीतियां

- भारत की सबसे तेज पर्वतारोही रीना भट्टी ने मांगी सरकार से नौकरी और आर्थिक सहायता

- मुख्यमंत्री नायब सैनी को लिखा पत्र, विधायक व अंतररष्ट्रीय पहलवान विनेश फौगाट से पूछा सवाल

- खुद से लड़ी, पहाड़ों से जीती – अब सरकार से रीना भट्टी की विनती: मुझे भी मेरा हक़ मिले

- 23 चोटियां चढ़कर भी रीना की मंज़िल अधूरी – सरकार से है नौकरी और मदद की आस

ओपी वशिष्ठ, रोहतक :

ट्रैक्टर मिस्त्री की बेटी और भारत की सबसे तेज़ पर्वतारोही जिसने एक साथ एवरेस्ट और ल्होत्से दोनों चोटियों को मात्र 20.50 घंटे मे फतेह कर एक नया राष्ट्रीय रिकार्ड बनाया लेकिन अनदेखी के चलते अब सरकार से गुहार लगा रही है | शिखर पर उपलब्धियां, धरातल पर सरकार की नीतियां से खिन्न मुख्यमंत्री , खेल मंत्री और अन्य के नाम पत्र लिखकर और ट्वीट कर रीना भट्टी ने सरकार से ए ग्रेड की नौकरी और आर्थिक मदद की गुहार लगाई है| हरियाणा के हिसार जिले मे बरवाला खंड के बालक गांव के एक ट्रैक्टर मकेनिक की बेटी रीना भट्टी सरकार से अपने रिकॉर्ड-तोड़ पर्वतारोहण की उपलब्धियों के लिए उचित मान्यता और लाभ की अपील कर रही हैं।

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ट्वीट करते हुए रीना भट्टी ने लिखा मैं रीना भट्टी, हिंदुस्तान की सबसे तेज पर्वतारोही हरियाणा में हिसार के बालक गांव की ट्रैक्टर मिस्त्री की बेटी हूँ। दुनिया की सबसे ऊंची चोटी एवरेस्ट और ल्होत्से को एक साथ सबसे कम समय में फतेह कर, बीते 5 वर्षों में 20 से ज्यादा देश और विदेश मे चोटियों पर तिरंगा लहराया| बीते दिनों बेटियों के लिए आपका स्नेह देख, हिम्मत और उम्मीद जगी है…

बस एक आस है — मेरी उपलब्धियों को भी मान दें, ए ग्रेड नौकरी और आर्थिक सहारा देकर एक बेटी का संबल बनें। एक बेटी को सरकार की पहचान और सहारा चाहिए ताकि आगे की पर्वतारोहण यात्राओं के लिए समर्थन और आशीर्वाद मिलता रहे। सरकार की पहचान और साथ से एक बेटी और कई बेटियाँ उड़ान भरेंगी। मेरी कामयाबियाँ सिर्फ मेरी नहीं, पूरे देश की जीत हैं। बस ज़रूरत है उन्हें सराहे जाने की, पहचाने जाने की।

गौरतलब है की "हिमपुत्री" के नाम से प्रसिद्ध रीना भट्टी ने पिछले पाँच वर्षों में विश्व की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट सहित कुल 20 से ज्यादा पर्वत चोटियों को फतेह किया, जो एक नया राष्ट्रीय रिकॉर्ड है। विश्व स्तर की ये उपलब्धियाँ हासिल करने के बाद अब वह सरकार से ध्यान देने और समर्थन की अपील कर रही हैं।

आईटी प्रोफेशनल से बनी भारत की सबसे तेज़ पर्वतारोही | रीना भट्टी की कहानी

अपनी कहानी साझा करते हुए रीना भट्टी ने कहा,

"लड़कियाँ सिर्फ़ सपने नहीं देखतीं, बल्कि उन्हें पूरा करने की हिम्मत भी रखती हैं। मैंने लगातार कई राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाए हैं और भारत का नाम गर्व से ऊँचा किया है। मैंने माउंट एवरेस्ट (दुनिया की सबसे ऊँची चोटी) और माउंट ल्होत्से (चौथी सबसे ऊँची चोटी) को केवल 20.5 घंटे में एक साथ 2024 में फतेह कर नया राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाया और भारत की सबसे तेज़ महिला पर्वतारोही बन गई," उन्होंने बताया।

"हर घर तिरंगा अभियान" के अंतर्गत, 15 अगस्त 2022 को यूरोप की सबसे ऊंची चोटी माउंट एल्ब्रुस (पश्चिम – 5642 मीटर, पूर्व – 5621 मीटर) को दोनों दिशाओं से 24 घंटे में फतेह कर तिरंगा लहराया। इसके साथ ही वह भारत की पहली महिला बनीं जिन्होंने स्नो लेपर्ड पीक – पीक लेनिन (7134 मीटर), किर्गिस्तान में फतेह किया।

उन्होंने आगे कहा, “मैं हरियाणा राज्य की पहली महिला बनी जिसने माउंट कांग यात्से (6270 मीटर) और माउंट जो जोंगो (पश्चिम) (6240 मीटर) को 70 घंटों में फतेह किया और दोनों चोटियों पर तिरंगा लहराया। इसके अलावा, मैंने दुनिया की सबसे तकनीकी चोटी माउंट आमा दबलम (6812 मीटर) को भी सिर्फ़ 5 दिनों में चढ़ा, जो नेपाल में स्थित है।

उन्होंने बताया कि वह “Depression Against Running” नामक विश्व की सबसे लंबी रिले दौड़ में शामिल हुईं और ऑक्सफ़र्ड वर्ल्ड रिकॉर्ड में 10,000 पुश-अप्स पूरा करने के लिए नाम दर्ज करवाया।

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हरियाणा के मुख्यमंत्री  नायब सिंह सैनी से अपील करते हुए, रीना भट्टी, जो कंप्यूटर साइंस में मास्टर डिग्री धारक हैं, ने कहा: "मैंने माउंट एवरेस्ट को फतेह करने के दौरान अनेक कठिनाइयों का सामना किया। 2023 में पहली बार माउंट एवरेस्ट मिशन की शुरुआत की थी लेकिन तकनीकी और मौसम की परेशानियों के कारण मुझे एवरेस्ट की चोटी से सिर्फ़ 50 मीटर पहले लौटना पड़ा। यह घटना मेरे लिए एक बुरे सपने जैसी थी। लेकिन समाज और परिवार के सहयोग से मुझे दोबारा हिम्मत मिली। मई 2024 में मैंने एवरेस्ट और ल्होत्से को लगातार 20.5 घंटों में चढ़कर एक नया राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाया। साथ ही अब तक मैं 20 से ज्यादा चोटियाँ फतेह कर चुकी हूँ जो किसी भी लड़की के लिए एक अद्वितीय राष्ट्रीय रिकॉर्ड है,"

उन्होंने कहा मेरी सरकार से विनम्र अपील है कि मेरी उपलब्धियों को देखते हुए मुझे ए ग्रेड की सरकारी नौकरी और आर्थिक सहायता प्रदान की जाए। मैंने राज्य और देश का नाम गौरव से ऊँचा किया है। जैसे आप बेटियों के हित में प्रगतिशील निर्णय ले रहे हैं, मुझे विश्वास है कि मेरी उपलब्धियों को भी आप नजरअंदाज़ नहीं करेंगे|

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रीना ने कहा एवरेस्ट पर चढ़ाई ने सिखाया कि सपने लिंग नहीं, बल्कि साहस देखते हैं। अगर इरादे मज़बूत हों तो कोई भी सपना, यहाँ तक कि एवरेस्ट पर चढ़ाई भी, सच हो सकता है। जूनून पर्वत से भी ऊँचा होता है और लड़कियाँ ये साबित कर चुकी हैं। हमारी ऊँचाइयों की कोई सीमा नहीं है – जो ठान लिया, वो हासिल किया। मंज़िलें हौसलों से तय होती हैं, जेन्डर से नहीं। मैंने आर्थिक, शारीरिक, मानसिक, सामाजिक और प्राकृतिक कई बाधाओं को पार करते हुए दुनिया की सबसे ऊँची चोटी पर तिरंगा फहराया है।

"ग्रामीण इलाकों में लड़कियों के लिए ऐसे साहसिक कार्यों में भाग लेना एक बहुत बड़ा कदम है। परंपरागत सोच, सामाजिक बंदिशों और लैंगिक भेदभाव के कारण लड़कियों को अक्सर वह समर्थन नहीं मिल पाता जिसकी उन्हें ज़रूरत है। हमारे देश में कई लड़कियाँ खेल, शिक्षा, विज्ञान और साहसिक गतिविधियों में अव्वल हैं, लेकिन जब बात सम्मान और पहचान की आती है, तो उन्हें अनदेखा कर दिया जाता है। सरकार को इन बहादुर उपलब्धियों को पहचान कर उचित सम्मान देना चाहिए," उन्होंने ज़ोर देते हुए कहा।

"बेटियों को सशक्त बनाना सिर्फ़ विकल्प नहीं, बल्कि ज़रूरत है। एवरेस्ट जैसी चुनौती को पार करना अन्य लड़कियों के लिए प्रेरणा है। यदि हम इस प्रेरणा को उचित पहचान दें, तो समाज की अन्य बेटियाँ भी अपने सपनों को पूरा करने की हिम्मत करेंगी। लेकिन आज भी ऐसी बेटियों को समाज और सरकार से वह सहयोग नहीं मिलता जो मिलना चाहिए। अब समय आ गया है कि हम समझें कि किसी लड़की की बड़ी उपलब्धि समाज की सोच और दिशा दोनों को बदल सकती है। और यह बदलाव सिर्फ़ लड़कियों की नहीं, बल्कि पूरे समाज और सरकार की ज़िम्मेदारी है," उन्होंने कहा।

मेरे रिकॉर्ड को देखते हुए मैं सरकार से समर्थन की अपील करती हूँ ताकि राज्य की अन्य बेटियाँ भी यह संदेश पाएं कि अगर कोई लड़की आगे बढ़ने का संकल्प लेती है, तो सरकार उसके साथ खड़ी मिलती है। पूर्व मे कई पर्वतारोहियों को सरकार द्वारा नौकरी और प्रोत्साहन दिया गया है, जिससे उनका मनोबल बढ़ा है। मैं भी अपनी कठिनाइयों की मान्यता और समर्थन चाहती हूँ।

रीना भट्टी ने विनेश फोगाट से पूछा बड़ा सवाल

देश की सबसे तेज़ पर्वतारोही रीना भट्टी ने मशहूर पहलवान कांग्रेस विधायक विनेश फोगाट को X पर टैग करते हुए एक ट्वीट में बड़ा सवाल खड़ा किया है।

रीना ने पूछा कि क्या जिस तरह विनेश ने अपने लिए विधानसभा में आवाज़ उठाई थी, उसी तरह वह बाकी खिलाड़ियों की आवाज़ भी बनेंगी?

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रीना ने ट्वीट में लिखा

विनेश बहन, आपकी दो माँगें मानी गईं — ये आपकी हिम्मत और हक़ की जीत है।

हम पर्वतारोहिणियाँ भी जान जोखिम में डालकर तिरंगे का मान बढ़ाती हैं।

क्या हमारे संघर्ष को भी वही सम्मान मिलेगा?

हमारी भी एक उम्मीद आपसे जुड़ी है — क्या आप हमारी आवाज़ बनेंगी?

बता दें कि रीना भट्टी ने हाल ही में हरियाणा के मुख्यमंत्री के नाम एक पत्र भेजकर A ग्रेड की सरकारी नौकरी और आर्थिक सहायता की मांग की थी। उन्होंने अपने पत्र में उल्लेख किया कि उन्होंने सीमित संसाधनों और विपरीत परिस्थितियों में देश और राज्य का नाम रोशन किया है।

उन्होंने लिखा कि 5 साल में देश और विदेश की चोटियां जिसमें दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट और तकनीनी पीक माउंट लहोतसे को एक साथ सबसे कम समय में फतेह करते हुए नेशनल रिकॉर्ड भी बनाया है लेकिन अब उन्हें भी सरकार से न्याय और सहयोग की अपेक्षा है।

गौरतलब है कि हरियाणा सरकार ने विनेश फोगाट को एक प्लॉट और 4 करोड़ रुपए की मदद की है

विनेश के अलावा रीना भट्टी ने मुख्यमंत्री नायब सैनी, योगेश्वर दत्त, बबीता फोगाट, खेल मंत्री व अन्य को भी टैग किया है

रीना का यह सवाल अब सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है।

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