‘सांग समागम’ में जीवंत हुई हरियाणा की लोक-आत्मा, स्वर–लय–कथा से स्पंदित हुआ विश्वविद्यालय परिसर
- शिक्षा मंत्री महिपाल ढांडा रहे मुख्य अतिथि, सांग परंपरा के महान संवाहकों को किया गया सम्मानित
‘सांग समागम’ में जीवंत हुई हरियाणा की लोक-आत्मा, स्वर–लय–कथा से स्पंदित हुआ विश्वविद्यालय परिसर
- शिक्षा मंत्री महिपाल ढांडा रहे मुख्य अतिथि, सांग परंपरा के महान संवाहकों को किया गया सम्मानित
टीएचटी न्यूज, रोहतक :
हरियाणवी लोक-नाट्य परंपरा सांग की जीवंतता, वैचारिक गहराई और सांस्कृतिक चेतना का अद्भुत संगम ‘सांग समागम’ के रूप में विश्वविद्यालय परिसर में देखने को मिला। लोक रंगमंच प्रेमियों, संस्कृति अध्येताओं, कलाकारों और हरियाणवी लोक परंपराओं के संवाहकों की बड़ी उपस्थिति ने परिसर को स्वर, लय और कथा का एक स्पंदित मंच बना दिया।
कार्यक्रम की शुरुआत पंडित विष्णु दत्त एवं उनकी टीम द्वारा प्रस्तुत किस्सा छप सिंह से हुई, जिसने वीरगाथा और नाटकीय प्रवाह को प्रभावशाली ढंग से मंच पर सजीव किया। इसके पश्चात डॉ. सतीश कश्यप एवं उनकी टीम की प्रस्तुति सांगत कबीर में आध्यात्मिक चिंतन और लोक-कथात्मक तीव्रता का सुंदर समन्वय देखने को मिला। समापन प्रदीप राय एवं उनकी टीम की ऊर्जावान प्रस्तुति लीलो चमन से हुआ, जिसने अपनी भावनात्मक गहराई और मंचीय प्रभाव से दर्शकों की भरपूर सराहना बटोरी।
इस अवसर पर हरियाणा के शिक्षा मंत्री महिपाल ढांडा मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उनके साथ पूर्व मंत्री मनीष ग्रोवर, हरियाणा राज्य सूचना आयुक्त अमरजीत सिंह, एमडीयू के कुलपति प्रो. राजबीर सिंह, एनसीज़ेडसीसी सदस्य अजय गुप्ता, भाजपा जिला अध्यक्ष रणबीर ढाका, एलपीएस बोसार्ड के एमडी राजेश जैन, सीबीएलयू भिवानी की कुलपति प्रो. दीप्ति धामानी, आईजीयू मीरपुर के कुलपति प्रो. असीम मिगलानी और आईआईएम रोहतक के निदेशक प्रो. धीरज शर्मा सहित अनेक विशिष्ट अतिथियों ने कार्यक्रम की गरिमा बढ़ाई।
मुख्य अतिथि का स्वागत करते हुए कुलपति डॉ. अमित आर्य ने विश्वविद्यालय की सांस्कृतिक दृष्टि और लोक कलाओं के संरक्षण के प्रति प्रतिबद्धता को रेखांकित किया। शिक्षा मंत्री महिपाल ढांडा ने ‘सांग समागम’ की सराहना करते हुए कहा कि सांग हरियाणा की उस मिट्टी की आवाज़ है, जो हमारी पहचान का मूल है। उन्होंने युवाओं से आधुनिकता के साथ-साथ अपनी सांस्कृतिक विरासत से जुड़े रहने का आह्वान किया और इस आयोजन के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन व छात्रों की प्रशंसा की।
कार्यक्रम का एक अत्यंत भावुक क्षण तब आया, जब हरियाणा की सांग परंपरा के महान प्रतीकों—शहीद फौजी मेहर सिंह, पंडित मांगे राम, प्रदीप राय निंदाना, पंडित विष्णु दत्त और सूर्य कवि बाजे भगत —के परिवारजनों और सहयोगियों को उनके कालजयी योगदान के लिए सम्मानित किया गया। परिजनों ने मंच से अपने भाव साझा करते हुए विश्वविद्यालय का आभार व्यक्त किया।
कुलपति डॉ. अमित आर्य ने अपने संबोधन में कहा कि सांग अतीत की धरोहर मात्र नहीं, बल्कि हरियाणा की सामाजिक स्मृति, साहस, हास्य और विवेक को वहन करने वाली जीवंत परंपरा है। उन्होंने कहा कि डीएलसी सुपवा सांस्कृतिक पुनर्जागरण को एक सक्रिय शैक्षणिक मिशन के रूप में आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है, जिसमें छात्रों की केंद्रीय भूमिका है।
इससे पूर्व कुलसचिव डॉ. गुंजन मलिक ने अतिथियों का स्वागत करते हुए सांग समागम की पृष्ठभूमि और उद्देश्य पर प्रकाश डाला तथा अमूर्त सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण में विश्वविद्यालयों की भूमिका को रेखांकित किया।
सांध्य सत्र में डीएलसी सुपवा के छात्रों ने गीत और नृत्य प्रस्तुतियों के माध्यम से समागम में युवा ऊर्जा का संचार किया। मंच संचालन अभिनय विभागाध्यक्ष दुष्यंत और फिल्मकार हरिओम कौशिक ने प्रभावी ढंग से किया, जिससे पूरे कार्यक्रम की गति और लय बनी रही।
‘सांग समागम’ के माध्यम से डीएलसी सुपवा ने केवल एक सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि हरियाणा की सांग परंपरा के पुनर्जीवन, पहचान और पुनर्निर्माण का एक सशक्त सांस्कृतिक आह्वान प्रस्तुत किया है।
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