शेफाली का रोहतक घर लौटना – जीत पर पूरा शहर झूम उठा
शेफाली का रोहतक घर लौटना – जीत पर पूरा शहर झूम उठा
लोगों ने कहा – ये सिर्फ क्रिकेट नहीं, हर हरियाणवी की जीत है
टीएचटी न्यूज, रोहतक :
रविवार की दोपहर रोहतक कुछ अलग था। सड़कों पर भीड़ थी, गाड़ियों के हॉर्नों के बीच ढोल बज रहे थे, और हवा में गूंज रहे थे नारे – “शेफाली वर्मा जिंदाबाद!”
सांपला टोल से लेकर शहर के दिल तक, लोगों की आंखों में चमक थी, जैसे कोई अपनी बेटी के घर लौटने का इंतज़ार कर रहा हो।
जब खुली जीप में भारतीय महिला क्रिकेट टीम की विश्वकप विजेता शेफाली वर्मा दिखाई दीं, तब हर तरफ़ से फूल बरसने लगे। बच्चों ने उनके नाम के पोस्टर उठाए, महिलाएं बालकनियों से जयकारे लगाने लगीं। यह सिर्फ एक खिलाड़ी का स्वागत नहीं था, बल्कि हर उस सपने का जश्न था जो छोटे शहरों में पलता है।
“वो पहले बल्ला बिना ग्लव्स के चलाती थी, आज पूरी दुनिया उसके बल्ले से डरती है,” – कहते हैं उनके पिता संजय वर्मा, जिनकी आंखों में गर्व और आंसू दोनों झलकते हैं।
सर्किट हाउस में सम्मान समारोह के दौरान मंत्री कृष्ण कुमार बेदी ने कहा, “शेफाली ने सिर्फ कप नहीं जीता, बल्कि रोहतक की गलियों में एक नई उम्मीद जगाई है।” वहीं डीसी सचिन गुप्ता ने कहा कि जब वे शेफाली के घर गए तो उनके मोहल्ले की दीवारों तक मुस्कुरा रही थीं।
शेफाली खुद शांत और विनम्र रहीं। उन्होंने कहा, “जब मैं मैदान में उतरती हूं, तो सिर्फ तिरंगा याद रहता है। बाकी सब भूल जाती हूं।” उन्होंने यह भी बताया कि सचिन तेंदुलकर से मुलाकात ने उन्हें “धैर्य से जीतना” सिखाया।
जब जीप शहर से गुज़री, तो रोहतक की गलियां एक स्टेडियम में बदल गईं। बच्चे उनके साथ दौड़ते रहे, युवाओं ने “भारत माता की जय” के नारे लगाए। शहर के हर कोने में वही चर्चा थी – “हमारी बेटी आ गई!”
दिन के अंत में जब शैफाली अपने घर पहुंचीं, तो उनके पड़ोसी – जो कभी उनकी प्रैक्टिस बॉल्स से परेशान हो जाते थे – आज वही लोग उन्हें फूल-मालाएं पहना रहे थे।
यह सिर्फ शेफाली वर्मा की जीत नहीं थी। यह हर उस पिता की जीत थी जो अपनी बेटी के सपनों पर यकीन करता है, हर उस मोहल्ले की जीत थी जो एक लड़की को बैट पकड़े देखने से अब गर्व महसूस करता है।
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